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Health : अचानक भूलना, नई पहचान बनाना कहीं डिसोसिएटिव डिसऑर्डर तो नहीं, हर माह आ रहे 20 से 25 मरीज
Sat, 03 Feb 2024 11:56 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 03 Feb 2024 11:56 AM IST
सार
यह कोई आदत नहीं बल्कि डिसोसिएटिव डिसऑर्डर नामक मानसिक रोग है, जो कि तनाव की वजह से व्यक्ति में जन्म लेता है। कोरोना संक्रमण के बाद से इस प्रकार के मामले काफी बढ़े हैं।
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भूलने की बीमारी। सांकेतिक
- फोटो : Social Media
विस्तार
पारिवारिक कलह, पढ़ाई की चिंता, आर्थिक समस्या या किसी अन्य परेशानी के कारण व्यक्ति पर तनाव हावी होता है। कभी-कभी अधिक तनाव की वजह से कई लोग भूलना शुरू कर देते हैं, अलग पहचान बनाने लगते हैं या फिर खुद में कई पहचान स्थापित कर लेते हैं।
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यह कोई आदत नहीं बल्कि डिसोसिएटिव डिसऑर्डर नामक मानसिक रोग है, जो कि तनाव की वजह से व्यक्ति में जन्म लेता है। कोरोना संक्रमण के बाद से इस प्रकार के मामले काफी बढ़े हैं। स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय के मनोरोग विभाग और मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय के मन कक्ष को मिलाकर हर महीने ऐसे तकरीबन 20 से 25 मरीज सामने आते हैं। काउंसलिंग के दौरान इनमें अधिक तनाव का होना पाया जाता है। हैरत तो यह कि इस बीमारी की जद में अधिकतर महिला और नवयुवक आ रहे हैं।
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केस नंबर 1- सोहबतियाबाग के गरीब घर की 16 वर्षीय एक लड़की करीब पांच माह पहले रात में अचानक चिल्लाने लगी। पूछने पर बताया कि उसका नाम सोनू है, जो कि उसी मोहल्ले में रहता था और एक मार्ग दुर्घटना में उसकी मौत हो गई थी।
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पहले तो परिजन उसे मजार और नीम हकीम के पास ले गए, लेकिन दो महीने पहले जब कॉल्विन हॉस्पिटल के मन कक्ष लेकर पहुंचे, तो काउंसिंलिंग में उसने बताया कि उसकी छह बहनें हैं, पिता नहीं है, मां दूसरे के घरों में बर्तन-चौका करती है। इसके कारण वह हमेशा चिंता में रहती है।
केस नंबर 2- मुंडेरा की 15 वर्षीय लड़की एक दिन अचानक से दिन, तारीख भूल गई। वह वर्ष 2023 को 2022 बताने लगी। एसआरएन के मनोरोग विभाग में उसे कई प्रकार से समझाने की कोशिश की गई, मगर वह मानने को तैयार नहीं हुई। उसने बताया कि वह अधिक पढ़ाई करना चाहती थी, जिसके कारण उसे नींद तक नहीं आती है। बीते पांच महीने से उसका इलाज एसआरएन के मनोरोग विभाग में चल रहा है।
केस नंबर 3- म्योराबाद का 26 वर्षीय एक युवक करीब पांच महीने पहले एक दिन अचानक से अपनी दुकान छोड़कर ट्रेन में बैठा और पहले दिल्ली गया, फिर हरियाणा पहुंच गया। परिजन उसे न पाकर काफी परेशान हुए। वहीं कुछ दिन बाद उसका फोन आया कि तो उसने बताया कि वह पता नहीं कैसे हरियाणा पहुंच गया है। परिजन जब उसे लेकर एसआरएन पहुंचे, तो उसने बताया कि आर्थिक तंगी और सिर पर अधिक कर्ज होने के कारण वह परेशान रहता है।
केस नंबर 4- करछना की 37 वर्षीय एक महिला चार महीने पहले अचानक से अपना घर परिवार छोड़कर मथुरा के एक आश्रम में रहने लगी। वहीं दो महीने बाद अचानक से वह घर आ गई। उसने बताया कि वह मथुरा कैसे पहुंची, उसे कुछ याद नहीं। मन कक्ष में काउंसलिंग के दौरान पता चला कि संतान न होने से वह तनाव में थी।
अधिक तनाव के कारण ऐसे मानसिक रोग का जन्म होता है। इस बीमारी के लक्षण की जानकारी होने पर इसका समय पर इलाज जरूरी होता है। -डॉ.राकेश पासवान, मनोचिकित्सक, कॉल्विन हॉस्पिटल
महिलाओं और नवयुवकों में यह मनोरोग अधिक होता है। इसके इलाज में साइकोथेरेपी का बड़ा योगदान है। इसमें इंसान को कुछ याद नहीं रहता है। - डॉ.कमलेश तिवारी, मनोवैज्ञानिक, पूर्व प्रधानाध्यापक, मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज।