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अधीनस्थ अदालतें ही तय करेंगी अपने मामलों की प्राथमिकता : कोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में अधीनस्थ अदालत को किसी मुकदमे का निश्चित समय में निस्तारण करने का आदेश नहीं दिया जा सकता। अपने मामलों की प्राथमिकता अधीनस्थ अदालतें ही तय करेंगी। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने की।
जौनपुर निवासी याची कृष्ण प्रसाद ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत में लंबित दीवानी वाद पर जल्द निस्तारण का आदेश देने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर थी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य (2024) के फैसले का उल्लेख किया।
कोर्ट ने कहा कि संविधान पीठ ने सांविधानिक न्यायालयों को सामान्य तौर पर अधीनस्थ अदालतों में लंबित मामलों के निस्तारण के लिए समय तय करने से बचना चाहिए। केवल असाधारण परिस्थितियों में ही ऐसे निर्देश दिए जा सकते हैं। लंबित मामलों की प्राथमिकता तय करने का निर्णय संबंधित अदालत पर ही छोड़ना चाहिए।
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हालांकि, कोर्ट ने याची को कहा कि वह संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष शीघ्र सुनवाई के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर सकता है। संबंधित न्यायालय लंबित मामलों की स्थिति, अपनी कार्यसूची और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए उस आवेदन पर कानून के अनुसार निर्णय करेगा।
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जौनपुर निवासी याची कृष्ण प्रसाद ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत में लंबित दीवानी वाद पर जल्द निस्तारण का आदेश देने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर थी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य (2024) के फैसले का उल्लेख किया।
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कोर्ट ने कहा कि संविधान पीठ ने सांविधानिक न्यायालयों को सामान्य तौर पर अधीनस्थ अदालतों में लंबित मामलों के निस्तारण के लिए समय तय करने से बचना चाहिए। केवल असाधारण परिस्थितियों में ही ऐसे निर्देश दिए जा सकते हैं। लंबित मामलों की प्राथमिकता तय करने का निर्णय संबंधित अदालत पर ही छोड़ना चाहिए।
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हालांकि, कोर्ट ने याची को कहा कि वह संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष शीघ्र सुनवाई के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर सकता है। संबंधित न्यायालय लंबित मामलों की स्थिति, अपनी कार्यसूची और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए उस आवेदन पर कानून के अनुसार निर्णय करेगा।