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कथक की प्रस्तुत को सराहा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Dec 2014 01:40 AM IST
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इलाहाबाद। कथक केंद्र नई दिल्ली और प्रयाग संगीत समिति की ओर से ‘कथक उत्सव-2014’ के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को नीलाक्षी खांडकर, हेमंत कलिता और शिखा खरे ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दिल्ली की नीलाक्षी खांडकर ने गणेश स्तवन ‘शुक्लांबर धरन’ और ठुमरी ‘कानन गिरधारी’, हेमंत कलिता ने कृष्ण वंदना ‘वृंदावन वंशी तट यमुना तट निरवत कान्हा’, गोपिका विरह गीत पर भाव नृत्य ‘ऐही मुरारी कुंज बिहारी’ प्रस्तुत कर कथक की बारीकियां बताईं।
शिखा खरे ने गणेश स्तुति ‘गाइये गणपति जग वंदना’, ठुमरी भाव नृत्य ‘काहे रोकता डगर प्यारे’ पर तालियां बटोरीं। सचिव अरुण कुमार और कोषाध्यक्ष आदित्य नारायण ने दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन और ऋचा मालवीय ने संचालन किया।
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दिल्ली की नीलाक्षी खांडकर ने गणेश स्तवन ‘शुक्लांबर धरन’ और ठुमरी ‘कानन गिरधारी’, हेमंत कलिता ने कृष्ण वंदना ‘वृंदावन वंशी तट यमुना तट निरवत कान्हा’, गोपिका विरह गीत पर भाव नृत्य ‘ऐही मुरारी कुंज बिहारी’ प्रस्तुत कर कथक की बारीकियां बताईं।
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शिखा खरे ने गणेश स्तुति ‘गाइये गणपति जग वंदना’, ठुमरी भाव नृत्य ‘काहे रोकता डगर प्यारे’ पर तालियां बटोरीं। सचिव अरुण कुमार और कोषाध्यक्ष आदित्य नारायण ने दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन और ऋचा मालवीय ने संचालन किया।
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