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आयोग से सवाल, पीसीएस में स्केलिंग हुई या नहीं
Tue, 06 Oct 2020 05:45 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2020 05:45 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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पीसीएस-2018 में स्केलिंग लागू की गई या नहीं, इस सवाल पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग लगातार घिरता जा रहा है। सोमवार को इसी सवाल के साथ पीसीएस-2018 के तमाम अभ्यर्थी आयोग पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। अभ्यर्थियों ने आयोग के सचिव से मिलने की मांग की, लेकिन उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिल सका। अभ्यर्थी का कहना है कि आयोग स्पष्ट करे कि पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा में स्केलिंग लागू की गई या नहीं। साथ ही परीक्षा की मार्कशीट जल्द जारी की जाए।
इस बार पीसीएस-2018 में अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों का चयन बड़ी संख्या में हुआ है और इससे उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थियों में नाराजगी है। प्रतियोगी छात्रों का दावा है कि आयोग ने पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा में स्केलिंग की व्यवस्था लागू नहीं की थी और इसी वजह से परिणाम प्रभावित हुआ। अभ्यर्थी अब मांग कर रहे हैं कि स्केलिंग के मुद्दे पर आयोग स्थिति स्पष्ट करे, लेकिन उन्हें सवालों का जवाब नहीं मिल रहा है। प्रतियोगी छात्रों ने आयोग से पूछा है कि पांच जनवरी 2014 को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति, जिसमें स्केलिंग का फार्मूला वर्णित है। इस फार्मूले के तहत पीसीएस-2018 का परिणाम घोषित किया गया या नहीं?
स्केलिंग प्रणाली को लेकर कोई बदलाव प्रस्तावित है या नहीं, इस संदर्भ में भी आयोग स्थिति स्पष्ट करे। आयोग यह भी बताए कि पीसीएस-2018 का परिणाम उसके विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप जारी किया गया है या नहीं? इसके साथ ही अभ्यर्थियों ने पीसीएस-2017 की मार्कशीट शीघ्र जारी किए जाने की मांग की है। दरअसल, आयोग ने पिछली परीक्षा की मार्कशीट में केवल स्केल्ड अंकों की जानकारी दी थी और नॉन स्केल्ड यानी वास्तविक अंक नहीं बताए थे।
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इससे अभ्यर्थियों को यह मालूम नहीं हो सका कि स्केलिंग के बाद उनके अंक घटे या बढ़ाए गए। आयोग से कोई जवाब न मिलने पर अभ्यर्थियों को अब मार्कशीट का इंतजार है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आयोग ने पीसीएस-2018 में स्केलिंग लागू की थी या नहीं। प्रतियोगी छात्र 11 अक्तूबर को प्रस्तावित पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षा के बाद इस मसले पर 13 अक्तूबर से बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
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इस बार पीसीएस-2018 में अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों का चयन बड़ी संख्या में हुआ है और इससे उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थियों में नाराजगी है। प्रतियोगी छात्रों का दावा है कि आयोग ने पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा में स्केलिंग की व्यवस्था लागू नहीं की थी और इसी वजह से परिणाम प्रभावित हुआ। अभ्यर्थी अब मांग कर रहे हैं कि स्केलिंग के मुद्दे पर आयोग स्थिति स्पष्ट करे, लेकिन उन्हें सवालों का जवाब नहीं मिल रहा है। प्रतियोगी छात्रों ने आयोग से पूछा है कि पांच जनवरी 2014 को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति, जिसमें स्केलिंग का फार्मूला वर्णित है। इस फार्मूले के तहत पीसीएस-2018 का परिणाम घोषित किया गया या नहीं?
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स्केलिंग प्रणाली को लेकर कोई बदलाव प्रस्तावित है या नहीं, इस संदर्भ में भी आयोग स्थिति स्पष्ट करे। आयोग यह भी बताए कि पीसीएस-2018 का परिणाम उसके विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप जारी किया गया है या नहीं? इसके साथ ही अभ्यर्थियों ने पीसीएस-2017 की मार्कशीट शीघ्र जारी किए जाने की मांग की है। दरअसल, आयोग ने पिछली परीक्षा की मार्कशीट में केवल स्केल्ड अंकों की जानकारी दी थी और नॉन स्केल्ड यानी वास्तविक अंक नहीं बताए थे।
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इससे अभ्यर्थियों को यह मालूम नहीं हो सका कि स्केलिंग के बाद उनके अंक घटे या बढ़ाए गए। आयोग से कोई जवाब न मिलने पर अभ्यर्थियों को अब मार्कशीट का इंतजार है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आयोग ने पीसीएस-2018 में स्केलिंग लागू की थी या नहीं। प्रतियोगी छात्र 11 अक्तूबर को प्रस्तावित पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षा के बाद इस मसले पर 13 अक्तूबर से बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।