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सीएए के विरोध में धरना जारी
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strike in protest against caa
- फोटो : CITY DESK
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सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में मंसूर अली पार्क में महिलाओं का लगातार 69वें दिन धरना जारी रहा। शुक्रवार को पार्क में सफाई अभियान भी चलाया गया। साथ ही कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के क्रम में अन्य इंतजाम भी किए गए। प्रशासन की अपील को देखते हुए महिलाओं ने आंदोलनकारियों की संख्या कम करने की बात कही है।
प्रेसवार्ता में महिलाओं का कहना था कि धरना उनका मौलिक अधिकार है। उनका यह भी कहना था कि कोरोना नेमहामारी का रूप ले लिया है, इसलिए मौलिक कर्तव्यों को देखते हुए उनकी तरफ से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन ने भीड़ एकत्रित नहीं होने का निर्देश दिया है, इसके मद्देनजर धरने में महिलाआें की संख्या कम करने का निर्णय लिया गया है। उधर, सीएए के विरोध में धरना जारी रहा और देर रात तक बड़ी संख्या में महिलाएं तथा अन्य संगठन के लोग पार्क में डटे रहे। इस दौरान सबीहा, सारा अहमद, जिशान, इरशाद उल्ला, अकीलुर्रहमान, सै.मो.अस्करी आदि ने संबोधित किया।
बाद में धरने की अनुमति दें तो विचार संभव
आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेताओं ने कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए धरना खत्म करने पर विचार की बात कही है। पूर्व नगर अध्यक्ष अफसर महमूद एवं युवा नगर अध्यक्ष इफ्तेखार अहमद मंदर का कहना है कि डीएम या शासन का जिम्मेदार अधिकारी लिखित आश्वासन दे कि यह संकट दूर होने के बाद उन्हें फिर से धरने पर बैठने दिया जाएगा तो वे इसे खत्म करने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के जनता कर्फ्यू पर भी सवाल उठाए। नेताओं ने धार्मिक स्थलों को बंद किए जाने का भी विरोध किया। उनका कहना था कि यह समय प्रार्थना और दुआ करने का है। ऐसे में धार्मिक स्थलों को बंद करना गलत है। सपा के विनय कुशवाहा ने भी प्रधानमंत्री की जनता कर्फ्यू की अपील पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि रोजाना कमाने वालों का ध्यान नहीं रखा गया। विनय ने इसे राजनीति से प्रेरित अपील बताया।
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प्रेसवार्ता में महिलाओं का कहना था कि धरना उनका मौलिक अधिकार है। उनका यह भी कहना था कि कोरोना नेमहामारी का रूप ले लिया है, इसलिए मौलिक कर्तव्यों को देखते हुए उनकी तरफ से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन ने भीड़ एकत्रित नहीं होने का निर्देश दिया है, इसके मद्देनजर धरने में महिलाआें की संख्या कम करने का निर्णय लिया गया है। उधर, सीएए के विरोध में धरना जारी रहा और देर रात तक बड़ी संख्या में महिलाएं तथा अन्य संगठन के लोग पार्क में डटे रहे। इस दौरान सबीहा, सारा अहमद, जिशान, इरशाद उल्ला, अकीलुर्रहमान, सै.मो.अस्करी आदि ने संबोधित किया।
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बाद में धरने की अनुमति दें तो विचार संभव
आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेताओं ने कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए धरना खत्म करने पर विचार की बात कही है। पूर्व नगर अध्यक्ष अफसर महमूद एवं युवा नगर अध्यक्ष इफ्तेखार अहमद मंदर का कहना है कि डीएम या शासन का जिम्मेदार अधिकारी लिखित आश्वासन दे कि यह संकट दूर होने के बाद उन्हें फिर से धरने पर बैठने दिया जाएगा तो वे इसे खत्म करने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के जनता कर्फ्यू पर भी सवाल उठाए। नेताओं ने धार्मिक स्थलों को बंद किए जाने का भी विरोध किया। उनका कहना था कि यह समय प्रार्थना और दुआ करने का है। ऐसे में धार्मिक स्थलों को बंद करना गलत है। सपा के विनय कुशवाहा ने भी प्रधानमंत्री की जनता कर्फ्यू की अपील पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि रोजाना कमाने वालों का ध्यान नहीं रखा गया। विनय ने इसे राजनीति से प्रेरित अपील बताया।
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