राज्य विश्वविद्यालय : सामूहिक नकल में फंसे परीक्षार्थी रखेंगे अपना पक्ष, इसके बाद फैसला करेगी कमेटी
राज्य विश्वविद्यालय की स्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षा के दौरान आधा दर्जन केंद्रों में सामूहिक नकल के मामले सामने आए थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने वहां परीक्षा दे रहे सभी परीक्षार्थियों की कॉपियां जब्त कर लीं थीं और परीक्षा केंद्रों को तीन साल के लिए डिबार कर दिया था।
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प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय की बीएससी एवं बीकॉम अंतिम वर्ष की परीक्षा के दौरान नकल सामग्री के साथ पकड़े गए परीक्षार्थियों और सामूहिक नकल में चिह्नित परीक्षार्थियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। उनके प्रत्यावेदन पर विचार करने के बाद परीक्षा समिति कार्रवाई को लेकर कोई निर्णय लेगी।
राज्य विश्वविद्यालय की स्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षा के दौरान आधा दर्जन केंद्रों में सामूहिक नकल के मामले सामने आए थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने वहां परीक्षा दे रहे सभी परीक्षार्थियों की कॉपियां जब्त कर लीं थीं और परीक्षा केंद्रों को तीन साल के लिए डिबार कर दिया था। संबंधित कॉलेज अब अगले तीन साल तक परीक्षा केंद्र नहीं बनाए जाएंगे।
पिछले साल भी सामूहिक नकल में कई परीक्षा केंद्र डिबार किए गए थे और नौ हजार से अधिक परीक्षार्थियों को सामूहिक नकल में चिह्नित किया गया था। शुरुआत में ऐसे परीक्षार्थियों को एक साल के लिए डिबार कर दिया गया था, लेकिन बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन्हें राहत प्रदान करते हुए अलग से इनकी परीक्षा कराई थी।
इस बार भी सामूहिक नकल में हजारों परीक्षार्थी चिह्नित किए गए हैं। सामूहिक नकल में जो केंद्र डिबार किए गए हैं, वहां परीक्षा दे रहे परीक्षार्थियों की कॉपियों में काफी एकरूपता है। कुछ केंद्रों में तो व्यापक पैमाने पर नकल सामग्री भी जब्त की गई। वहीं, सैकड़ों परीक्षार्थियों को उड़ाका दलों ने नकल सामग्री का उपयोग करते हुए पकड़ा।
ऐसे परीक्षार्थियाें से विश्वविद्यालय प्रशासन ने 15 जुलाई तक प्रत्यावेदन मांगे है। रजिस्ट्रार संजय कुमार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार परीक्षार्थियों को विश्वविद्यालय के पोर्टल पर उपलब्ध गूगल फॉर्म में केवल ऑनलाइन माध्यम से प्रत्यावेदन प्रेषित करने हैं। कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह का कहना है कि अगर कोई परीक्षार्थी दावा करता है कि वह सामूहिक नकल में शामिल नहीं था या व्यक्तिगत रूप से नकल नहीं कर रहा था, तो परीक्षा समिति उसके प्रत्यावेदन पर विचार करेगी।
सामूहिक नकल में चिह्नित किए गए परीक्षार्थियों की कॉपियां भी सुरक्षित रखी गईं हैं, ताकि नकल के आरोपी परीक्षार्थियों के प्रत्यावेदन आने के बाद उनकी कॉपियों की फिर से जांच कराई जा सके। अगर कोई परीक्षार्थी निर्दोष साबित होता है तो कार्रवाई नहीं होगी और अगर दोषी साबित होता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।