एसआरएन हास्पिटल : डॉक्टरों ने चार साल की मासूम सिद्धि को दी नई जिंदगी, दो घंटे तक चला कूल्हे का जटिल ऑपरेशन
धूमनगंज के झलवा में रहने वाले शिव आसरे की चार साल की बेटी सिद्धि के जन्म से ही कूल्हे अपने स्थान पर नहीं थे। शिव आसरे के मुताबिक शुरू में इस बात की जानकारी नहीं हो सकी, लेकिन जब वह चलने में लंगड़ाने लगी तो शारीरिक दिक्कत का पता चला।
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एसआरएन अस्पताल के हड्डी रोग विभाग के डॉक्टरों ने शुक्रवार को चार साल की बच्ची के कूल्हे का ऑपरेशन कर उसे नया जीवन प्रदान किया। ऑपरेशन बेहद जटिल होने के कारण इसमें करीब दो घंटे का समय लगा। डॉक्टरों ने बताया कि शहर में इस प्रकार का ऑपरेशन नहीं होता है, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति से सफल ऑपरेशन संभव हो सका।
धूमनगंज के झलवा में रहने वाले शिव आसरे की चार साल की बेटी सिद्धि के जन्म से ही कूल्हे अपने स्थान पर नहीं थे। शिव आसरे के मुताबिक शुरू में इस बात की जानकारी नहीं हो सकी, लेकिन जब वह चलने में लंगड़ाने लगी तो शारीरिक दिक्कत का पता चला।
इस पर शहर के कई निजी अस्पतालों में डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन कोई भी ऑपरेशन करने को तैयार नहीं हुआ। लोगों की सलाह पर एसआरएन अस्पताल के हड्डी रोग विभाग के प्रो. अजय कुमार वर्मा के पास बेटी को लेकर गए। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन बेहद जटिल है, लेकिन फिर भी वह अपनी टीम के साथ उसे करेंगे।
एक हजार बच्चों में से एक के अंदर होती है यह समस्या
दो सप्ताह पहले ऑपरेशन की तिथि निर्धारित की गई और पिछले शुक्रवार को प्रो. डॉ. अजय कुमार वर्मा, असिस्टेंट प्रो. डॉ. आनंद कुमार, एनेस्थीसिया टीम व नर्सिंग स्टाफ ने दो घंटे तक कड़ी मेहनत के बाद ऑपरेशन करके कूल्हे को सही स्थान पर स्थापित किया। प्रो. डॉ. आनंद कुमार वर्मा ने बताया कि यह समस्या करीब एक हजार लोगों में एक बच्चे के अंदर पायी जाती है।
शहर में आमतौर पर इस प्रकार के ऑपरेशन नहीं होते हैं, इसके लिए मरीज और उसके परिवार को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। लेकिन एसआरएन में यह सफल ऑपरेशन किया गया। बताया कि अगले सप्ताह बच्ची को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। उसके बाद बीच-बीच में उसकी जांच होगी। जिससे यह पता लग सके कि ऑपरेशन के बाद बच्ची के कूल्हे ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं।