एसआरएन अस्पताल : बैलून तकनीक से गर्भवती महिला के दिल का सफल ऑपरेशन, मां-शिशु सुरक्षित
स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग ने एक पांच माह की गर्भवती महिला के दिल का संकुचित माइट्रल वाल्व सफलतापूर्वक खोला। यह उपचार बिना ओपन हार्ट सर्जरी के बैलून तकनीक से किया गया।
विस्तार
स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग ने एक पांच माह की गर्भवती महिला के दिल का संकुचित माइट्रल वाल्व सफलतापूर्वक खोला। यह उपचार बिना ओपन हार्ट सर्जरी के बैलून तकनीक से किया गया। चिकित्सकों का दावा है कि प्रयागराज मंडल में गर्भावस्था के दौरान यह अपनी तरह का पहला उपचार है।
मांडा क्षेत्र की 25 वर्षीय महिला सांस फूलने, बार-बार खांसी और सीने में जकड़न से परेशान थी। उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि लेटना और रात में सोना भी मुश्किल हो गया था। परिजन उसे एसआरएन अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां जांच में हृदय का माइट्रल वाल्व गंभीर रूप से संकुचित मिला।
गर्भावस्था में हृदय पर अतिरिक्त दबाव और मां-शिशु दोनों के लिए संभावित खतरा था। चिकित्सकों ने बैलून तकनीक से उपचार का निर्णय लिया। कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. पीयूष सक्सेना के निर्देशन में यह जटिल प्रक्रिया पूरी हुई। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वैभव श्रीवास्तव, डॉ. विमल कुमार निषाद और डॉ. ऋषिका पटेल ने इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया। कैथ लैब तकनीशियन विवेक, योगेश और रामनिवास का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
बैलून तकनीक का उपयोग
करीब चार मिलीमीटर के छोटे छेद से कैथेटर की सहायता से 24 मिलीमीटर का बैलून हृदय तक पहुंचाया गया। इस बैलून से संकुचित वाल्व को सफलतापूर्वक खोला गया। प्रक्रिया के दौरान गर्भस्थ शिशु को एक्सरे विकिरण से बचाने के लिए विशेष फीटल शील्ड का इस्तेमाल हुआ। उपचार के बाद महिला को सांस लेने में राहत मिली और हृदय के प्रेशर ग्रेडिएंट में सुधार हुआ। उपचार के बाद महिला और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित हैं।
एसआरएन अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता और टीमवर्क के कारण अब अत्यंत जटिल मामलों का भी सफल उपचार संभव है। - डॉ. एके वर्मा, प्राचार्य, एमएलएन मेडिकल कॉलेज।