एसआरएन हास्पिटल : जांच कमेटी की रिपोर्ट में नहीं मिले सामूहिक दुष्कर्म के साक्ष्य, युवती का भाई आरोप पर अडिग
मोती लाल नेहरू मेडिकल के एसआरएन अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान मिर्जापुर की एक युवती के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों को जांच कमेटी ने खारिज कर दिया है। ऑपरेशन के दौरान सर्जरी में शामिल आठ सदस्यीय दल में शामिल पांच महिला चिकित्सकों, स्टाफ नर्स के साथ वार्ड ब्वाय तक के बयान दर्ज किए गए। पीड़िता से भी पूछताछ की गई फिर भी सामूहिक दुष्कर्म के साक्ष्य नहीं मिले।
अभी सीएमओ की ओर से कराई गई जांच की रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन मेडिकोलीगल रिपोर्ट निगेटिव बताई जा रही है। कुछ पैथालॉजी जांच की रिपोर्ट अभी लंबित हैं। उधर आरोप लगाने वाले युवती का भाई अपने बयान पर अडिग है। प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह के मुताबिक पीड़िता ने जांच कमेटी के सदस्यों को जिस तरह की जानकारी दी है, उससे साफ है कि सर्जरी के दौरान और बाद में अपनाई जाने वाली चिकित्सकीय प्रक्रिया शंका का कारण बनी, लेकिन दुष्कर्म के आरोप निराधार और बेबुनियाद हैं।
उधर सीएमओ के निर्देश पर जिला महिला चिकित्सालय डफरिन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की दो विशेषज्ञों के पैनल ने भी पीड़ित युवती का मेडिकोलीगल किया था। जानकारी के मुताबिक प्रथम दृष्टया दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई। पैनल की ओर से कुछ पैथालॉजी जांचें कराने को नमूने लिए गए थे, जिसकी लैब से रिपोर्ट नहीं आई है। मामले ने बृहस्पतिवार को सियासी रूप ले लिया। आरोप लगाने वाले पीड़िता के भाई ने बयान पर अडिग रहते हुए बहन के इलाज में कोताही और जान का खतरा बताया।
युवती अकेले नहीं थी। पूछताछ में साफ हो गया कि युवती के साथ अमर्यादित आचरण नहीं किया गया। जांच कमेटी की रिपोर्ट में साफ हो गया है कि सर्जरी के पहले और बाद में साफ सफाई का काम स्टाफ नर्स ने चिकित्सकों के साथ किया। बेहोश मरीज की चैतन्यता जानने के लिए महिला चिकित्सकों ने ही प्रयास किए। सर्जरी के बाद कैथरेटर बदला गया। नली बदलने के दौरान की सामान्य प्रक्रियाओं को मरीज ने बेहोशी की हालत में गलत व्यवहार समझा गया। प्राचार्य ने बताया कि मरीज की हालत और सर्जरी के बाद की स्थितियों में अमर्यादित व्यवहार होना संभव नहीं है।