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चेते नहीं तो ‘लाक्षागृह’ बन सकता है एसआरएन अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 17 Jul 2017 02:11 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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एमएलएन मेडिकल कॉलेज के स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में आग से बचाव के उपाय न के बराबर हैं। इमरजेंसी समेत निचले तल पर हमेशा आग का खतरा बना रहता है। मेडिसिन और सर्जिकल आईसीयू में भर्ती मरीज और तीमारदार भगवान भरोसे हैं। खानापूरी के लिए कुछ स्थानों पर लगे फायर इंस्टीग्यूटर शोपीस बने हैं। इन हालात में अस्पताल के ‘लाक्षागृह’ बनने की आशंका बनी हुई है।
मंडल के सबसे बड़े एसआरएन अस्पताल में भर्ती मरीज हमेशा खतरे में रहते हैं। लखनऊ के केजीएमयू की तरह यहां भी इमरजेंसी या किसी वार्ड, ओटी में आग लगने की स्थिति में मरीजों और तीमारदारों को बचाना मुश्किल होगा। पिछले दस वर्षों के दौरान दो बार इमरजेंसी व एक बार ओटी के पास आग लग चुकी है। बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन सचेत नहीं हुआ। अस्पताल से बाहर निकलने एक ही रास्ता है। मुख्य भवन से खतरे की स्थिति में जान बचाने के लिए सिर्फ एक गलियारा है। अस्पताल में लगे ज्यादातर एसी खराब हैं। पॉवर पैनल खुले पड़े हैं, लेकिन गनीमत है कि अभी तक कोई हादसा नहीं हुआ।
एसआरएन अस्पताल की इमरजेंसी, ओपीडी कक्ष, मेडिसिन इमरजेंसी, हीमोफीलिया केयर यूनिट, एनिस्थिीसिया आईसीयू, मेडिसिन आईसीयू, सर्जरी के दो वार्ड मरीजों से भरे हैं। बर्न वार्ड के सामने गैस प्लांट भी मरीजों के लिए खतरा बना है। जितने वार्डों में मरीज उससे ज्यादा बाहर तीमारदार जुटते हैं। मौजूदा हालात ऐसे हैं कि आग लगने की स्थिति में जान पर बन आए।
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आईसीयू और वार्डों के बाहर लगे फायर इंस्टीग्यूटर बने शो पीस
अस्पताल के इमरजेंसी भवन में एनिस्थिीसिया आईसीयू और सर्जरी वार्ड की ओटी के बाहर ही एक-एक फायर इंस्टीग्यूटर लगे हैं। इनमें भी तिथि अंकित नहीं है। मुख्य भवन के 18 वार्डों के बाहर और प्राइवेट वार्डों के गलियारे में फायर इंस्टीग्यूटर शो पीस बने हैं। अस्पताल में फिलहाल ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे आग लगने की स्थिति में तुरंत काबू पाकर मरीजों को सुरक्षित बचाया जा सके।
एसआरएन अस्पताल के इमरजेंसी, मुख्य भवन में फायर अलार्म, स्वचालित अग्निशमन यंत्र, हौज पाइप आदि की व्यवस्था नहीं है। इसी तरह चिल्ड्रेन अस्पताल में भी आग से बचाव के कोई उपाय नहीं हैं। यहां कार्यालय समेत चार स्थानों पर फायर इंस्टीग्यूटर ही लगे हैं। करीब दो महीने पहले अग्निशमन अधिकारी ने चिल्ड्रेन व एसआरएन अस्पताल में आग से बचाव के उपकरण के बारे में जानकारी मांगी थी। दोनों अस्पतालों से अग्निशमन अधिकारी से आग से बचाव के उपायों के मानक के बारे में पूछा गया था। जिसका जवाब अभी तक नहीं मिला है।
एसआरएन अस्पताल में आग से बचाव के लिए सभी स्थानों पर फायर इंस्टीग्यूटर लगाए गए हैं। अग्निशमन यंत्रों का समय-समय पर निरीक्षण और बचाव से उपाय का प्रदर्शन कराया जाता है। शासन के निर्देश पर मुख्य भवन में स्वचालित फायर अलार्म स्थापना का कार्य चल रहा है। - डॉ. करुणाकर द्विवेदी, एसआईसी, एसआरएन अस्पताल
मंडल के सबसे बड़े एसआरएन अस्पताल में भर्ती मरीज हमेशा खतरे में रहते हैं। लखनऊ के केजीएमयू की तरह यहां भी इमरजेंसी या किसी वार्ड, ओटी में आग लगने की स्थिति में मरीजों और तीमारदारों को बचाना मुश्किल होगा। पिछले दस वर्षों के दौरान दो बार इमरजेंसी व एक बार ओटी के पास आग लग चुकी है। बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन सचेत नहीं हुआ। अस्पताल से बाहर निकलने एक ही रास्ता है। मुख्य भवन से खतरे की स्थिति में जान बचाने के लिए सिर्फ एक गलियारा है। अस्पताल में लगे ज्यादातर एसी खराब हैं। पॉवर पैनल खुले पड़े हैं, लेकिन गनीमत है कि अभी तक कोई हादसा नहीं हुआ।
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एसआरएन अस्पताल की इमरजेंसी, ओपीडी कक्ष, मेडिसिन इमरजेंसी, हीमोफीलिया केयर यूनिट, एनिस्थिीसिया आईसीयू, मेडिसिन आईसीयू, सर्जरी के दो वार्ड मरीजों से भरे हैं। बर्न वार्ड के सामने गैस प्लांट भी मरीजों के लिए खतरा बना है। जितने वार्डों में मरीज उससे ज्यादा बाहर तीमारदार जुटते हैं। मौजूदा हालात ऐसे हैं कि आग लगने की स्थिति में जान पर बन आए।
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आईसीयू और वार्डों के बाहर लगे फायर इंस्टीग्यूटर बने शो पीस
अस्पताल के इमरजेंसी भवन में एनिस्थिीसिया आईसीयू और सर्जरी वार्ड की ओटी के बाहर ही एक-एक फायर इंस्टीग्यूटर लगे हैं। इनमें भी तिथि अंकित नहीं है। मुख्य भवन के 18 वार्डों के बाहर और प्राइवेट वार्डों के गलियारे में फायर इंस्टीग्यूटर शो पीस बने हैं। अस्पताल में फिलहाल ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे आग लगने की स्थिति में तुरंत काबू पाकर मरीजों को सुरक्षित बचाया जा सके।
एसआरएन अस्पताल के इमरजेंसी, मुख्य भवन में फायर अलार्म, स्वचालित अग्निशमन यंत्र, हौज पाइप आदि की व्यवस्था नहीं है। इसी तरह चिल्ड्रेन अस्पताल में भी आग से बचाव के कोई उपाय नहीं हैं। यहां कार्यालय समेत चार स्थानों पर फायर इंस्टीग्यूटर ही लगे हैं। करीब दो महीने पहले अग्निशमन अधिकारी ने चिल्ड्रेन व एसआरएन अस्पताल में आग से बचाव के उपकरण के बारे में जानकारी मांगी थी। दोनों अस्पतालों से अग्निशमन अधिकारी से आग से बचाव के उपायों के मानक के बारे में पूछा गया था। जिसका जवाब अभी तक नहीं मिला है।
एसआरएन अस्पताल में आग से बचाव के लिए सभी स्थानों पर फायर इंस्टीग्यूटर लगाए गए हैं। अग्निशमन यंत्रों का समय-समय पर निरीक्षण और बचाव से उपाय का प्रदर्शन कराया जाता है। शासन के निर्देश पर मुख्य भवन में स्वचालित फायर अलार्म स्थापना का कार्य चल रहा है। - डॉ. करुणाकर द्विवेदी, एसआईसी, एसआरएन अस्पताल