SRN Hospital : एसआरएन के डॉक्टरों का दावा- किडनी से निकाली गई विश्व की सबसे बड़ी पथरी
एसआरएन अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग में जटिल ऑपरेशन कर किडनी से 14 सेमी की पथरी निकाली गई है। डॉक्टरों का दावा है कि यह संभवत: विश्व में अब तक किडनी से निकाली गई सबसे बड़ी पथरी में से एक है।
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एसआरएन अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग में जटिल ऑपरेशन कर किडनी से 14 सेमी की पथरी निकाली गई है। डॉक्टरों का दावा है कि यह संभवत: विश्व में अब तक किडनी से निकाली गई सबसे बड़ी पथरी में से एक है। इससे पहले 2004 में मुंबई के डॉ. हेमेंद्र शाह ने 13 सेमी की पथरी किडनी से निकाली थी।
मिर्जापुर निवासी गुलाब चंद्र (42) आठ महीने से पेट दर्द और यूरिन की समस्या से जूझ रहे थे। ऐसे में उन्होंने जांच कराई तो पता चला कि किडनी में 14 सेमी की पथरी है। इस पर कई अस्पताल गए। लेकिन, पथरी बड़ी होने के कारण ज्यादातर डॉक्टरों ने किडनी निकालने की सलाह दी। ऐसे में परिजन उन्हें बृहस्पतिवार को एसआरएन अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग लाए, जहां जांच की गई तो पता चला कि किडनी में 14 सेमी के साथ ही यूरिनरी ट्रैक्ट में भी कई छोटी-छोटी पथरियां थीं।
यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. दिलीप चौरसिया के नेतृत्व में नेफ्रोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट और अन्य विशेषज्ञों के सहयोग से शुक्रवार को ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। टीम में डॉ. श्रीश मिश्रा, डॉ. दीपक गुप्ता और डॉ. अर्चित सभरवाल भी शामिल रहे। डॉक्टरों का दावा है कि यह विश्व में अब तक किडनी से निकाली गई सबसे बड़ी पथरी में से एक है। ऑपरेशन जटिल था। क्योंकि, इतनी बड़ी पथरी निकालने के दौरान किडनी को बचाना बड़ी चुनौती थी।
चीरा (स्प्लिट ओपेन) विधि से ऑपरेशन से पथरी पूरी तरह से हटाई गई। इसके बाद मरीज को दो दिन निगरानी में रखा गया। अब उन्हें सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। पेट के रास्ते से अस्थायी ड्रेनेज ट्यूब लगाई गई है, जो तीन दिन बाद हटा दी जाएगी।
क्रिएटिनिन सामान्य से बहुत ज्यादा था
मरीज को अस्पताल लाया गया तो उसे बुखार था और किडनी के पास पस नजर आ रहा था। इसके अलावा क्रिएटिनिन सामान्य से बहुत ज्यादा था। पीसीएन ट्यूब लगाई गई तो 250 एमएल पस निकला गया। दाईं ओर की पथरी निकाली गई है, बाईं की बाकी है।
यह संभवत: विश्व में अब तक किडनी से निकाली गई सबसे बड़ी पथरी में से एक है। इससे पहले 2004 में मुंबई के डॉ. हेमेंद्र शाह ने 13 सेमी की पथरी किडनी से निकाली थी। अब यह उपलब्धि स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के डॉक्टरों के नाम दर्ज हो सकती है। - डॉ. दिलीप चौरसिया, विभागाध्यक्ष, यूरोलॉजी विभाग, एसआरएन अस्पताल