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Prayagraj News: देश के प्रोफेशनल क्लबों तक पहुंची शहर के फुटबॉल खिलाड़ियों की पौध
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संजय भट्टाचार्य, पूर्व राष्ट्रीय फुटबाल खिलाड़ी
25 मई को विश्व फुटबॉल दिवस का जश्न पूरी दुनिया में मनाया जाता है। प्रयागराज भी इससे अछूता नहीं है। जिले से निकली फुटबॉल खिलाड़ियों की पौध ने देशभर के प्रोफेशनल क्लबों को खिताबी फल दिए। क्लबों को ट्रॉफी चूमने का मौका दिया।
फुटबॉल के पुरनिये बताते हैं कि आजादी के बाद से यहां की जमीं पर फुटबॉल का ऐसे खुमार चढ़ा कि गली, मोहल्ले में सिर्फ फुटबॉल का ही शोर सुनाई देता था। वर्ष 1956 में मेलबर्न ओलंपिक में भारत के सेमीफाइनल में पहुंचने पर बच्चों में फुटबॉल खेलने का अलग जज्बा दिखा। इसी दौरान शहर में यंगस्टर क्लब की स्थापना हुई। यहां से निकले खिलाड़ियों ने संतोष ट्रॉफी, डूरंड कप और रोवर्स कप में छाप छोड़ी।
ईस्ट बंगाल क्लब और मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब से भी खिलाड़ियों ने मैच खेले। इन क्लबों से खेलने वालों में मूल चंद, अमल सेन गुप्ता, सोमनाथ चंदा, मो. इकबाल, हार्डी डेविड, शौकत अली, बिशुन लाल, जलालुद्दीन और सफीर हसन का नाम शुमार है।
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वहीं, वर्ष 1980 से 2000 के दशक में फुटबॉल का क्रेज थोड़ा कम हुआ लेकिन वर्ष 2000 में शादाब रजा के यूपी टीम की कमान संभालने के बाद फुटबॉल का नया दौर शुरू हुआ।
जिले से अब तक 80 से अधिक खिलाड़ी संतोष ट्रॉफी सहित अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जलवा बिखेर चुके हैं। इसमें सुरेंद्र कुमार, अंबर जायसवाल, हिमांशु गुप्ता, शिवांग कुमार, मीसम रजा, अमित कुमार, अंकित गुप्ता, अरूप दत्ता, मो. शेरान अय्यूबी के नाम शामिल हैं। वहीं, 25 से ज्यादा खिलाड़ियों ने खेल कोटे से सरकारी नौकरी हासिल की।
वर्तमान में जिला फुटबॉल संघ के अध्यक्ष नारायण जी गोपाल, सचिव मकबूल अहमद, संजय भट्टाचार्य समेत अन्य लोग खिलाड़ियों की नई पौध तैयार करने में लगे हैं।
वर्जन
यंगस्टर्स क्लब ने 1940 के दशक शहर की नुमाइंदगी की। बच्चों में फुटबॉल का जुनून पैदा किया। 1964 से 1976 तक लगातार 12 साल तक ‘ए’ डिवीजन चैंपियन रहने का कीर्तिमान क्लब के पास था। इस क्लब ने रोवर्स कप (मुंबई), आईएफए शील्ड (कोलकाता) और डूरंड कप (दिल्ली) जैसे टूर्नामेंट में प्रयागराज का प्रतिनिधित्व किया। - गोपाल जी नारायण, अध्यक्ष, जिला फुटबॉल क्लब
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2000 से 2003 तक उत्तर प्रदेश टीम फुटबॉल टीम की कमान संभाली। टीम अंडर-19 डॉ. बीसी रॉय ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची। राजीव गांधी ट्रॉफी में टीम उपविजेता रही। - शादाब रजा, फुटबॉल कोच और पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी
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वर्ष 1987 में कोलकाता में संतोष ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश टीम के प्रतिनिधित्व का मौका मिला। इससे शहर को अलग पहचान मिली। साथ ही बच्चों में फुटबॉल के लिए दिलचस्पी बढ़ी। - संजय भट्टाचार्य, पूर्व राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी
पिछले साल हुए अंडर-19 राष्ट्रीय फुटबॉल टूर्नामेंट में उत्तर प्रदेश टीम का हिस्सा था। देश के लिए खेलना ही प्राथमिकता है। - अंबर विशाल, राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी
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फुटबॉल के पुरनिये बताते हैं कि आजादी के बाद से यहां की जमीं पर फुटबॉल का ऐसे खुमार चढ़ा कि गली, मोहल्ले में सिर्फ फुटबॉल का ही शोर सुनाई देता था। वर्ष 1956 में मेलबर्न ओलंपिक में भारत के सेमीफाइनल में पहुंचने पर बच्चों में फुटबॉल खेलने का अलग जज्बा दिखा। इसी दौरान शहर में यंगस्टर क्लब की स्थापना हुई। यहां से निकले खिलाड़ियों ने संतोष ट्रॉफी, डूरंड कप और रोवर्स कप में छाप छोड़ी।
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ईस्ट बंगाल क्लब और मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब से भी खिलाड़ियों ने मैच खेले। इन क्लबों से खेलने वालों में मूल चंद, अमल सेन गुप्ता, सोमनाथ चंदा, मो. इकबाल, हार्डी डेविड, शौकत अली, बिशुन लाल, जलालुद्दीन और सफीर हसन का नाम शुमार है।
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वहीं, वर्ष 1980 से 2000 के दशक में फुटबॉल का क्रेज थोड़ा कम हुआ लेकिन वर्ष 2000 में शादाब रजा के यूपी टीम की कमान संभालने के बाद फुटबॉल का नया दौर शुरू हुआ।
जिले से अब तक 80 से अधिक खिलाड़ी संतोष ट्रॉफी सहित अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जलवा बिखेर चुके हैं। इसमें सुरेंद्र कुमार, अंबर जायसवाल, हिमांशु गुप्ता, शिवांग कुमार, मीसम रजा, अमित कुमार, अंकित गुप्ता, अरूप दत्ता, मो. शेरान अय्यूबी के नाम शामिल हैं। वहीं, 25 से ज्यादा खिलाड़ियों ने खेल कोटे से सरकारी नौकरी हासिल की।
वर्तमान में जिला फुटबॉल संघ के अध्यक्ष नारायण जी गोपाल, सचिव मकबूल अहमद, संजय भट्टाचार्य समेत अन्य लोग खिलाड़ियों की नई पौध तैयार करने में लगे हैं।
वर्जन
यंगस्टर्स क्लब ने 1940 के दशक शहर की नुमाइंदगी की। बच्चों में फुटबॉल का जुनून पैदा किया। 1964 से 1976 तक लगातार 12 साल तक ‘ए’ डिवीजन चैंपियन रहने का कीर्तिमान क्लब के पास था। इस क्लब ने रोवर्स कप (मुंबई), आईएफए शील्ड (कोलकाता) और डूरंड कप (दिल्ली) जैसे टूर्नामेंट में प्रयागराज का प्रतिनिधित्व किया। - गोपाल जी नारायण, अध्यक्ष, जिला फुटबॉल क्लब
2000 से 2003 तक उत्तर प्रदेश टीम फुटबॉल टीम की कमान संभाली। टीम अंडर-19 डॉ. बीसी रॉय ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची। राजीव गांधी ट्रॉफी में टीम उपविजेता रही। - शादाब रजा, फुटबॉल कोच और पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी
वर्ष 1987 में कोलकाता में संतोष ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश टीम के प्रतिनिधित्व का मौका मिला। इससे शहर को अलग पहचान मिली। साथ ही बच्चों में फुटबॉल के लिए दिलचस्पी बढ़ी। - संजय भट्टाचार्य, पूर्व राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी
पिछले साल हुए अंडर-19 राष्ट्रीय फुटबॉल टूर्नामेंट में उत्तर प्रदेश टीम का हिस्सा था। देश के लिए खेलना ही प्राथमिकता है। - अंबर विशाल, राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी

संजय भट्टाचार्य, पूर्व राष्ट्रीय फुटबाल खिलाड़ी

संजय भट्टाचार्य, पूर्व राष्ट्रीय फुटबाल खिलाड़ी