स्थापना दिवस पर विशेष : मुझे सुनिए, इलाहाबाद विश्वविद्यालय बोल रहा हूं, परंपरा के साथ आधुनिकता की राह पर
प्रयाग के तीन सदियों के हर मौसम को, हर लम्हे को बेहद करीब से देखा है मैंने। इल्म की रोशनी से नहाया हूं मैं। यहां की परंपराओं, किताबों और बड़ी-बड़ी शख्सियतों को बेहद करीब से देखा है मैंने। अंग्रेजों का शासन और अनुशासन देखा है। संतों-महंतों के ज्ञान और परंपराओं से रूबरू हुआ हूं मैं। देखा है देश की आजादी के पहले सूरज से लेकर अब तक हर साल सजते-संवरते प्रयाग को। संगम तट पर करोड़ों श्रद्धालुओं को नतमस्तक होते देखा है। अब जेन जी की नई ऊर्जा देख रहा हूं। मुझे सुनिए, मैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय बोल रहा हूं...
विस्तार
ज्ञान, शोध और परंपरा की अपनी गौरवशाली विरासत को संजोये इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) अब आधुनिक शिक्षा और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के साथ नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय अपने 139वें स्थापना दिवस पर उपलब्धियों और नई संभावनाओं के साथ भविष्य की राह तैयार कर रहा है। कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव के कार्यकाल में शैक्षणिक, प्रशासनिक और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं।
बीते वर्षों में विश्वविद्यालय में 400 से अधिक शिक्षकों और 600 गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति हुई है। विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों के प्रमोशन, संघटक महाविद्यालयों में पदों के युक्तिकरण और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास किए गए। पांच महाविद्यालयों में प्राचार्यों की पुनर्नियुक्ति और तीन में नए प्राचार्यों की नियुक्ति से कॉलेजों के प्रशासनिक कामकाज को गति मिली है।
नई शिक्षा नीति से रोजगारपरक शिक्षा पर जोर
विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति के तहत पढ़ाई को अधिक व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। करीब 200 इलेक्टिव पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को लाइफ स्किल और व्यक्तित्व विकास से जोड़ रहे हैं। लगभग 10 इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रमों के माध्यम से नए और उभरते क्षेत्रों में शिक्षा के अवसर बढ़ाए गए हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं में भी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की उपलब्धियां उत्साह बढ़ाने वाली हैं। वर्षों बाद 100 से अधिक विद्यार्थियों का आईएएस, पीसीएस समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन हुआ है। इससे विश्वविद्यालय की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान मजबूत हुई है।
छात्र सुविधाओं में विस्तार, हॉस्टल से खेल तक सुविधाएं
छात्रों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तीन नए हॉस्टल बनाए गए हैं। ऐतिहासिक एएन झा छात्रावास का पुनर्निर्माण किया गया है। हिंदू छात्रावास की विरासत को संरक्षित रखते हुए उसके पुनर्निर्माण का काम कराया गया है। जीएन झा और ताराचंद छात्रावास के पुनर्निर्माण का काम भी जारी है। अन्य छात्रावासों में नियमित रखरखाव और स्वच्छता पर ध्यान दिया जा रहा है। खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए हॉकी, क्रिकेट, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेनिस और फुटबॉल समेत विभिन्न खेलों के लिए प्रशिक्षकों और मैदानों की व्यवस्था की गई है।
स्थापित किया गया अर्ली चाइल्ड हुड केयर सेंटर
-विश्वविद्यालय के विभिन्न परिसरों के सुंदरीकरण और हरियाली के संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। शिक्षकों की सुविधा के लिए अर्ली चाइल्ड हुड केयर सेंटर स्थापित किया गया है, जहां शिक्षक अपने छोटे बच्चों को सुरक्षित वातावरण में छोड़कर शिक्षण व शोध कार्य कर सकते हैं।
इविवि के नाम 70 पेटेंट, पांच हजार से ज्यादा शोधपत्र
-इविवि अब शोध व अकादमिक उपलब्धियों के नए मुकाम की ओर बढ़ रहा है। स्थापना दिवस पर विश्वविद्यालय की पिछले पांच वर्षों की उपलब्धियां इसकी बदलती तस्वीर बयां कर रही हैं। इस अवधि में इविवि के नाम 70 पेटेंट, पांच हजार से अधिक शोधपत्र और 1500 से ज्यादा बुक चैप्टर प्रकाशित हुए।
हर कदम पर गढ़े कीर्तिमान, ऐसे बना ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’
प्रयागराज। किराये की एक इमारत में महज 13 विद्यार्थियों से शुरू हुआ शिक्षा का सफर अब देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शुमार है। म्योर कॉलेज की इमारत 1886 में तैयार हुई। तब तक विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 129 हो चुकी थी। विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए पहली परीक्षा मार्च 1889 में हुई। इविवि ने शिक्षा, प्रशासन, राजनीति, विज्ञान और कानून के क्षेत्र में कई दिग्गज दिए। यही वजह रही कि विश्वविद्यालय को कभी ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ और ‘आईएएस की फैक्ट्री’ जैसे नामों से पहचान मिली। शुरुआती दौर में यहां से पंडित मदन मोहन मालवीय, पुरुषोत्तम दास टंडन, मोतीलाल नेहरू, मुंशी राम प्रसाद, मुंशी अशर्फी लाल और कैलाश नाथ काटजू जैसे विद्यार्थियों ने शिक्षा हासिल की।
देश-विदेश के विशेषज्ञों ने संभाले विभाग
विश्वविद्यालय के शुरुआती दौर में विभिन्न विभागों में देश-विदेश के विशेषज्ञों को नियुक्त किया गया। दर्शनशास्त्र में प्रो. राणा डे, अंग्रेजी में प्रो. डन और इतिहास विभाग में प्रो. रश ब्रूक विलियम जैसे शिक्षकों ने विभागों को नई ऊंचाई दी। इनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय के विभाग देश के प्रमुख अकादमिक केंद्रों में गिने जाने लगे।
कई शिक्षकों के नाम नोबेल के लिए हुए प्रस्तावित
इविवि के कई शिक्षकों के नाम नोबेल पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किए गए। भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो. मेघनाद साहा का नाम पांच बार प्रस्तावित किए जाने का उल्लेख मिलता है। प्रो. केएस कृष्णन, प्रो. नील रतन धर और प्रो. के. बनर्जी के नाम भी नोबेल पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किए गए थे।
देश को दिए राजनीति, प्रशासन और शिक्षा के दिग्गज
इविवि की पहचान उसके पूर्व छात्रों से भी रही है। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और वीपी सिंह, पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना, कोठारी आयोग के अध्यक्ष रहे प्रो. डीएस कोठारी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुभाष कश्यप और पूर्व नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (सीएजी) टीएन चतुर्वेदी समेत कई प्रमुख हस्तियां इविवि से जुड़े रहे हैं।