यूपी चुनाव: सपा सांसद एसपी सिंह पटेल का कांग्रेस पर हमला, बोले- 50 सीट देना भी बड़ी बात
UP News : यूपी विधानसभा चुनाव से करीब छह महीने पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। प्रतापगढ़ से सपा सांसद एसपी सिंह पटेल ने कांग्रेस के 150 सीटों के दावे को खारिज करते हुए कहा कि 50 सीट देना भी बड़ी बात होगी। उन्होंने कहा कि सीटों का बंटवारा राजनीतिक ताकत और संगठन की स्थिति के आधार पर होना चाहिए। वहीं, केशव प्रसाद मौर्य के सपा को लेकर दिए बयान पर भी पटेल ने पलटवार किया और भाजपा पर पिछड़ों के साथ अन्याय का आरोप लगाया।
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर सियासी खींचतान शुरू होती दिख रही है। प्रतापगढ़ से समाजवादी पार्टी के सांसद एसपी सिंह पटेल ने कांग्रेस के 150 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मौजूदा राजनीतिक ताकत और संगठन की स्थिति को देखते हुए कांग्रेस को 50 सीट मिलना भी बड़ी बात होगी।
एसपी सिंह पटेल ने कहा कि गठबंधन में सीटों का बंटवारा राजनीतिक दलों की जमीनी ताकत और संगठनात्मक स्थिति के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस को 10 से 20 सीटों तक सीमित करने की बात भी कही। उनके इस बयान से यूपी में सपा-कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर मतभेद की चर्चा तेज हो गई है।
पटेल के बयान पर राजनीतिक सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या आगामी विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर सहमति आसानी से बन पाएगी। कांग्रेस की ओर से यूपी में अधिक सीटों की दावेदारी और सपा की ओर से उसके दावे को खारिज किए जाने से गठबंधन की रणनीति को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है।
केशव मौर्य के बयान पर भी पलटवार
सपा सांसद ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें उन्होंने सपा को ‘सांपनाथ’, बसपा को ‘नागनाथ’ और कांग्रेस को ‘कालिया नाग’ बताया था। पटेल ने कहा कि केशव प्रसाद मौर्य अक्सर अनाप-शनाप बयान देते हैं और उन्हें इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
उन्होंने भाजपा पर पिछड़े समाज के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। पटेल ने कहा कि भाजपा पिछड़े वर्ग के नेता के रूप में केशव मौर्य का राजनीतिक इस्तेमाल करती है, लेकिन पिछड़ा समाज अब भाजपा की नीतियों को समझ चुका है।
गठबंधन में सम्मान और बराबरी का मुद्दा
सपा सांसद के बयान में कांग्रेस के साथ गठबंधन के पुराने अनुभवों का भी हवाला दिया गया। सपा नेताओं की ओर से आरोप लगाया गया कि जरूरत पड़ने पर कांग्रेस ने सपा और क्षेत्रीय दलों का समर्थन लिया, लेकिन सीट बंटवारे के समय सहयोगियों की अपेक्षाओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
सपा की ओर से मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव का उदाहरण भी दिया गया, जहां पार्टी के मुताबिक टिकट बंटवारे के दौरान उसके प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस नेतृत्व से सीटों को लेकर बातचीत की थी, लेकिन उसे कोई सीट नहीं मिली।
सपा सांसद के बयान ने यूपी में आगामी गठबंधन की तस्वीर को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल दोनों दलों के बीच सीटों का औपचारिक फार्मूला सामने नहीं आया है, लेकिन चुनाव से पहले ही सहयोगी दलों के बीच दावेदारी और राजनीतिक दबाव का दौर शुरू हो गया है।