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दो दोहरे हत्याकांडों की तरह नशेड़ियों का ही तो नहीं हाथ?
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soraon double murder case
- फोटो : NAWABGANJ
2018 में थरवई थाना क्षेत्र में हुई थी दोनों वारदातें
दंपति व सास-बहू को उतारा गया था मौत के घाट
प्रयागराज। सोरांव में एक परिवार के पांच लोगों की हत्या के मामले में भले ही नामजद सभी लोगों को हिरासत में ले लिया गया हो। हालांकि पुलिस की जांच का एकमात्र दायरा संपत्ति का विवाद नहीं। जांच का एक बिंदु यह भी है कि वारदात में कहीं नशेड़ियों का हाथ तो नहीं? इसलिए क्योेंकि 2018 में इसी तरह नृशंसता से हुए दो हत्याकांडों को नशे की तलब पूरा करने के लिए लूटपाट करने पहुंचे बदमाशों ने अंजाम दिया था।
2018 में महज 22 दिन के भीतर हुए इन दो सनसनीखेज हत्याकांडों से गंगापार मेें कोहराम मच गया था। दोनों घटनाएं थरवई थाना क्षेत्र में हुई थीं। पहली घटना सहजीपुर गांव में दो जुलाई की रात हुई थी। गांव में तीनों विजय बहादुर के घर चोरी करने गए थे। जहां लूट में नाकाम रहने पर बदमाशों ने घर के बाहर सो रहे विजय भारतीय(55) व उसकी पत्नी ऊषा देवी (45)की चाकुओं व सब्बल से वार कर हत्या कर दी थी। दूसरी वारदात 25 जुलाई को हरिरामपुर में अंजाम दिया गया था। यहां सास-बहू गोमती व सोना देवी की हत्या धारदार हथियार से हमला कर की गई थी। दोनों बरामदे में सो रही थीं कि तभी उन्हें मार दिया गया था।
जांच में जुटी पुलिस ने दंपति हत्याकांड में पहले बेटी की तहरीर पर नामजद किए गए दो ममेरे भाइयों को पकड़ा। हालांकि जांच पड़ताल के दौरान आरोपियों की लोकेशन घटना के वक्त कहीं और पाई गई। मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने पड़ोस में रहने वाले सिपाही के पुत्र को आरोपी बताते हुए जेल भेज दिया। यही नहीं आला ए कत्ल(सब्बल) की बरामदगी भी दिखा दी। लेकिन कुछ महीनों बाद भाई के कत्ल में पकड़े गए बहमलपुर निवासी राजेंद्र भारतीय से पूछताछ के बाद खुलासा किया कि सिपाही का बेटा निर्दोष है और दोनों दोहरे कत्ल उसने अपने साथियों संग मिलकर नशे के लिए रुपयों का इंतजाम करने के लिए अंजाम दिए। पुलिस ने न सिर्फ राजेंद्र बल्कि उसके दो साथियों मिथुन पटेल व सुरेंद्र यादव को भी जेल भेजा था।
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इसलिए बचे रह गए गहने?
वारदात में नशेड़ियों का हाथ होने की आशंका जाहिर करने वाले पुलिस अफसरों का घर में गहने सुरक्षित मिलने के बाबत कहना है कि ऐसा भागने की आपाधापी में हुआ। अफसर कहते हैं कि हत्यारे घुमंतू गिरोह के सदस्य होते, तो निश्चित ही वह घर में रखे गहने उठा ले जाते। यही नहीं पूर्व में भी जिन वारदातों में ऐसे गिरोहों का नाम सामने आया, उनमें महिलाओं के शरीर पर पहने गहने तक उतारे जाने की घटनाएं हुईं।
ऐसे में बहुत संभावना है कि इस वारदात में नशेड़ियों का हाथ हो, जो लूट या चोरी की नीयत से घर में दाखिल हुए हों। ताला टूटने की जगह कुंडे निकालकर बक्से खोलने की वजह भी यही रही हो कि वह चुपचाप वारदात करना चाह रहे हों। इसके उलट घुमंतू गिरोह ताले तोड़ने में देर नहीं करते। चोरी करते वक्त ही परिवार के सदस्य ने जगने पर विरोध किया हो और पकड़े जाने के डर से नशेड़ियों ने उसकी हत्या कर दी हो। फिर अन्य सदस्यों के जगने पर पहचाने जाने के डर से मार दिया हो। और फिर दहशत में आकर वहां से भाग खड़े हुए हों।
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दंपति व सास-बहू को उतारा गया था मौत के घाट
प्रयागराज। सोरांव में एक परिवार के पांच लोगों की हत्या के मामले में भले ही नामजद सभी लोगों को हिरासत में ले लिया गया हो। हालांकि पुलिस की जांच का एकमात्र दायरा संपत्ति का विवाद नहीं। जांच का एक बिंदु यह भी है कि वारदात में कहीं नशेड़ियों का हाथ तो नहीं? इसलिए क्योेंकि 2018 में इसी तरह नृशंसता से हुए दो हत्याकांडों को नशे की तलब पूरा करने के लिए लूटपाट करने पहुंचे बदमाशों ने अंजाम दिया था।
2018 में महज 22 दिन के भीतर हुए इन दो सनसनीखेज हत्याकांडों से गंगापार मेें कोहराम मच गया था। दोनों घटनाएं थरवई थाना क्षेत्र में हुई थीं। पहली घटना सहजीपुर गांव में दो जुलाई की रात हुई थी। गांव में तीनों विजय बहादुर के घर चोरी करने गए थे। जहां लूट में नाकाम रहने पर बदमाशों ने घर के बाहर सो रहे विजय भारतीय(55) व उसकी पत्नी ऊषा देवी (45)की चाकुओं व सब्बल से वार कर हत्या कर दी थी। दूसरी वारदात 25 जुलाई को हरिरामपुर में अंजाम दिया गया था। यहां सास-बहू गोमती व सोना देवी की हत्या धारदार हथियार से हमला कर की गई थी। दोनों बरामदे में सो रही थीं कि तभी उन्हें मार दिया गया था।
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जांच में जुटी पुलिस ने दंपति हत्याकांड में पहले बेटी की तहरीर पर नामजद किए गए दो ममेरे भाइयों को पकड़ा। हालांकि जांच पड़ताल के दौरान आरोपियों की लोकेशन घटना के वक्त कहीं और पाई गई। मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने पड़ोस में रहने वाले सिपाही के पुत्र को आरोपी बताते हुए जेल भेज दिया। यही नहीं आला ए कत्ल(सब्बल) की बरामदगी भी दिखा दी। लेकिन कुछ महीनों बाद भाई के कत्ल में पकड़े गए बहमलपुर निवासी राजेंद्र भारतीय से पूछताछ के बाद खुलासा किया कि सिपाही का बेटा निर्दोष है और दोनों दोहरे कत्ल उसने अपने साथियों संग मिलकर नशे के लिए रुपयों का इंतजाम करने के लिए अंजाम दिए। पुलिस ने न सिर्फ राजेंद्र बल्कि उसके दो साथियों मिथुन पटेल व सुरेंद्र यादव को भी जेल भेजा था।
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इसलिए बचे रह गए गहने?
वारदात में नशेड़ियों का हाथ होने की आशंका जाहिर करने वाले पुलिस अफसरों का घर में गहने सुरक्षित मिलने के बाबत कहना है कि ऐसा भागने की आपाधापी में हुआ। अफसर कहते हैं कि हत्यारे घुमंतू गिरोह के सदस्य होते, तो निश्चित ही वह घर में रखे गहने उठा ले जाते। यही नहीं पूर्व में भी जिन वारदातों में ऐसे गिरोहों का नाम सामने आया, उनमें महिलाओं के शरीर पर पहने गहने तक उतारे जाने की घटनाएं हुईं।
ऐसे में बहुत संभावना है कि इस वारदात में नशेड़ियों का हाथ हो, जो लूट या चोरी की नीयत से घर में दाखिल हुए हों। ताला टूटने की जगह कुंडे निकालकर बक्से खोलने की वजह भी यही रही हो कि वह चुपचाप वारदात करना चाह रहे हों। इसके उलट घुमंतू गिरोह ताले तोड़ने में देर नहीं करते। चोरी करते वक्त ही परिवार के सदस्य ने जगने पर विरोध किया हो और पकड़े जाने के डर से नशेड़ियों ने उसकी हत्या कर दी हो। फिर अन्य सदस्यों के जगने पर पहचाने जाने के डर से मार दिया हो। और फिर दहशत में आकर वहां से भाग खड़े हुए हों।