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High Court : अब्बास अंसारी को हाईकोर्ट से थोड़ी राहत, अपराध संहिता की धाराओं में जारी सम्मन रद्द

Mon, 08 Jan 2024 05:18 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 08 Jan 2024 05:18 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माफिया मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी के खिलाफ जारी सम्मन को गैर कानूनी बताते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने नए सिरे से सम्मन जारी करने का आदेश दिया है। 

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Some relief to Abbas Ansari from High Court, summons issued under sections of Criminal Code canceled
विधायक अब्बास अंसारी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्वांचल के माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी के विरुद्ध जारी सम्मन आदेश अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने अदालत को नए सिरे से सम्मन जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत अपराध के लिए दाखिल चार्जशीट व केस कार्यवाही रद्द करने से इन्कार कर दिया है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश अब्बास अंसारी की धारा 482 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत दाखिल याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याची पर विधान सभा चुनाव 2022 के दौरान आचार संहित उल्लंघन के आरोप में मऊ के दक्षिण टोला थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।,मामला एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट मऊ में विचाराधीन है।
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इस याचिका में पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट और केस  कार्यवाही रद्द करने की  मांग की गई थी। आरोप है कि गाड़ियों की चुनाव प्रचार के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। फिर भी चुनाव के दौरान काफिला निकाला। 12 फरवरी 2022 को इस मामले में अब्बास के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। याची के अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने कहा कि याची के खिलाफ सियासत के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। कहा याची ने गाड़ियों का काफिला नहीं निकाला, वह केवल जनसंपर्क अभियान पर थे। जिन गाड़ियों को प्रचार में ले जाने की अनुमति दी गई थी उसी को ले जाया गया था।

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कोर्ट ने चार्जशीट और केस कार्रवाई रद्द करने से किया इन्कार

कोर्ट ने कहा धारा 171 एच के तहत अपराध नहीं बनता। इसलिए धारा 188 के अंतर्गत जारी सम्मन आदेश अवैध है। धारा 171 एच का अपराध धारा 195 से बाधित है। जिसमें अधिकारी की शिकायत पर कंप्लेंट दाखिल की जा सकती है। पुलिस चार्जशीट पर मजिस्ट्रेट का संज्ञान लेना विधि सम्मत नहीं है। किंतु कोर्ट ने कहा यह नहीं कह सकते कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 133 का अपराध नहीं बनता है। इसलिए चार्जशीट व केस कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती। कोर्ट ने चार्जशीट व केस कार्यवाही रद्द करने से इन्कार कर दिया है।

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