इतनी देर में मौत के मुंह में समा जाएंगे लोग
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किसी बहुमंजिला इमारत में आग लगने पर फंसे लोगों को बचाने के ऑपरेशन में फायर ब्रिगेड की टीम फेल रही। मंगलवार दोपहर सिविल लाइंस के विनायक सिटी सेंटर (पीवीआर) में आग लगने पर राहत कार्य के मॉक ड्रिल के दौरान इमारत की खिड़की और छत पर फंसे लोगों को करोड़ों रुपये कीमत की एरियल लैडर प्लेटफार्म से निकालने कारिहर्सल मजाक बन गया। सही ट्रेनिंग के अभाव में छत पर फंसे आदमी को निकालने में करीब पौन घंटे लग गए। यूं सच में कहीं ऐसी आग लगी तो भीतर फंसे लोग इतनी देर में तो मौत के मुंह में समा जाते। मॉक ड्रिल देखने के लिए मौजूद लोग भी फायर ब्रिगेड की इस कायशैली की आलोचना करते मिले। यूं इस वाकये ने फायर ब्रिगेड की तैयारी की पोल खोलकर रख दी।
किसी अग्निकांड या आतंकी हमले जैसी घटना में बहुमंजिला इमारत में फंसे लोगों को निकालने के लिए आमतौर पर फायर ब्रिगेड का दस्ता ही सबसे कारगर माना जाता है। शासन स्तर से मंगलवार को यूपी के सभी जिलों में दोपहर तीन बजे फायर ब्रिगेड को किसी इमारत में फंसे लोगों को निकालने का मॉक ड्रिल करने का आदेश दिया गया। इलाहाबाद में फायर ब्रिगेड ने विनायक सिटी सेंटर (पीवीआर) में यह ड्रिल किया। करीब साल भर पहले इटली से साढ़े आठ करोड़ रुपये में खरीदे 42 मीटर के एरियल लैडर प्लेटफार्म को पीवीआर ले जाया गया।
पहले इमारत के पिछले हिस्से के दूसरे तल की खिड़की से एक दमकल के एक कर्मचारी को बचाने का ड्रिल किया गया। मगर करीब 25 मिनट तक कोशिश के बावजूद प्लेटफार्म ऑपरेटर वहां तक लैडर (सीढ़ी) नहीं पहुंचा सका। ऑपरेटर खुद पसीना-पसीना हो गया। सीएफओ बार-बार उसकी ओर देखकर पूछते क्या हुआ। वहां मौजूद लोग तमाम तो कहने लगे कि आग लगी हो तब इतनी देर में आदमी या तो मर जाएगा या जान बचाने के लिए खिड़की से छलांग लगा देगा।
ऑपरेटर की नाकामी के चलते लैडर को खिड़की तक पहुंचने में सफलता नहीं मिली तो खिड़की से झांक रहे उसी कर्मचारी को पीवीआर की छत पर भेजा गया। वहां से करीब 15 मिनट बाद उसे उतारकर मॉक ड्रिल पूरा किया गया। नीचे लाकर उस व्यक्ति को स्ट्रेचर के जरिए एंबुलेंस में ले जाकर अस्पताल भेजने का रिहर्सल किया गया। मगर करीब 40 मिनट में एक व्यक्ति को दूसरी जगह भेजकर उतारने का मॉक ड्रिल तमाशा बन गया।
‘यह सच है कि पीवीआर में अग्निकांड में फंसे आदमी को बाहर निकालने के मॉक ़िड्रल में थोड़ी कमी रह गई। ऑपरेटर ने काफी कोशिश की लेकिन आदमी को बाहर निकालने में देर हो गई। अब इस कमी दूर किया जाएगा।’ 0योगेंद्र चौरसिया, चीफ फायर आफिसर