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रामबाग में दूसरे दिन भी ध्वस्त किया गया नाले पर बना स्लैब

Thu, 17 May 2018 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 17 May 2018 01:16 AM IST
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Slab made on the dam drain on second day in Rambagh
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
नगर निगम के अधिकारियों और पुलिस बल की मौजूदगी में बुधवार को दूसरे दिन भी नाले पर अवैध रूप से बनाया गया स्लैब ध्वस्त किया गया। दोपहर बाद पुलिस के आने पर निगम के जनकार्य विभाग के कर्मचारियों ने हैमर मशीन से स्लैब तोड़ने की कार्रवाई शुरू की जो शाम तक चली। मौके पर न विरोध करने वाले थे और न ही किसी तरह का हंगामा हुआ। वहां से गुजरने वाले राहगीर और तमाशबीन सिर्फ मंगलवार को तोड़े गए होटल क्राउन पैलेस को ही देखते रहे।
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नजूल प्रभारी लालमणि यादव, अतिक्रमण निरीक्षक मनोज कुमार प्रवर्तन दल और जनकार्य विभाग की टीम लेकर सुबह ही रामबाग पहुंच गए। सूचना के बाद भी पुलिस नहीं आई तो नाला खोलने का काम रुका रहा। अफसरों से शिकायत के बाद करीब तीन बजे कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची तब स्लैब तोड़ने का काम शुरू किया गया। चार हैमर मशीन और हथौड़ों से स्लैब तोड़ने के लिए जनकार्य विभाग के कर्मचारी शाम तक लगे रहे। इस दौरान वहां जोनल अधिकारी मुन्ना लाल और निगम के जेई भी मुस्तैद रहे। अंधेरा होने के पहले ही कार्रवाई रोक दी गई। बृहस्पतिवार को भी कार्रवाई जारी रहेगी।
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रामबाग में नाले के बगल अवैध रूप से बनी आठ दुकानें कौन ध्वस्त करेगा, इस बारे में संशय बना है। नगर निगम और एडीए के अफसर अभी दुकानों को ध्वस्त करने पर चुप्पी साधे हैं। नियमत: नाला-नाली या सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण नगर निगम हटाता है जबकि बिना नक्शा और अनुमति के किए गए निर्माण एडीए ढहाता है। अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव की हत्या के बाद चर्चा में आया नाला कब्जा और दुकानों को ध्वस्त करने का मामला गरम है, लेकिन मंगलवार को हुई कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि अवैध रूप से बनी दुकानें भी ध्वस्त की जाएंगी।
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रामबाग में मंगलवार को हुई कार्रवाई के बाद लोगों के बीच में यह मामला चर्चा का विषय बना है। चर्चा के दौरान सबका एक सवाल था कि यदि नाले पर कब्जा किया गया। वहां अवैध रूप से एक नहीं आठ दुकानों का निर्माण कराया गया। होटल क्राउन नक्शे के विपरीत बना और उसका आवासीय नहीं व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था तो संबंधित विभाग के अफसर क्या कर रहे थे। क्या ऐसे मामलों में क्या सिर्फ नोटिस जारी कर खानापूरी ही की जाती है।  लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों में खानापूरी करने से ही विवाद बढ़ते हैं। संबंधित विभागों के सक्षम अधिकारी त्वरित निर्णय लेकर कार्रवाई करें तो कई विवाद स्वत: समाप्त हो जाएं। लोगों का कहना है कि इस तरह के मामलों में नोटिस जारी कर चुप बैठने वाले अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।


अधिवक्ता की हत्या के मामले में मंगलवार को आरोपी के होटल का अगला हिस्सा ध्वस्त किए जाने के बाद मलबा बुधवार को भी सड़क तक फैला रहा। शीशे के टुकडे़, शटर और जेसीबी की पहुंच तक आने वाले पिलर के टुकड़े पड़े रहे। होटल में ठहरे सभी 18 लोगों को हटाने के बाद वहां कोई कर्मचारी भी नहीं दिखा। लोगों को होटल का बेसमेंट और उजाड़ी गई लॉबी दिख रही थी, लेकिन वहां कोई नहीं था।
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