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नरेंद्र गिरि: कमरे में मिला छह पेज का सुसाइड नोट, सवाल- आखिर किस अपमान से आहत थे महंत

Tue, 21 Sep 2021 04:23 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 21 Sep 2021 04:23 AM IST
सार

अखाड़ा परिषद की संदिग्ध हाल में मौत के बाद फिलहाल जो भी आशंकाएं, निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं, उसका मूल मौके से बरामद सुसाइड नोट है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सुसाइड नोट की प्रमाणिकता भी तब तक संदेह से परे नहीं है जब तक कि फोरेंसिक जांच न हो जाए।

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six page suicide note was found in the room question after what insult was mahant narendra giri hurt
नरेंद्र गिरि सुसाइड केस - फोटो : amar ujala

विस्तार

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि जिस कमरे में फंदे पर लटके मिले, वहां छह पेज का सुसाइड नोट मिला है। पुलिस के मुताबिक, इस सुसाइड नोट में मठ और अखाड़े के उत्तराधिकारियों के नाम लिखे गए हैं। सबसे खास बात यह है कि इसमें कभी महंत के बेहद करीबी रहे आनंद गिरि के अलावा लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी का नाम भी है। साथ ही सम्मान व अपमान को लेकर भी कुछ बातें लिखी हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर महंत किस अपमान को लेकर आहत थे?

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पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही शव उतारा जा चुका था। सूत्रों के मुताबिक, महंत के शव के पास ही बिस्तर पर सुसाइड नोट पड़ा था। छह पेज के इस सुसाइड नोट में वसीयतनामे से लेकर अन्य कई बातें लिखीं थीं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इसमें महंत के सबसे करीबी शिष्य रहे आनंद गिरि, लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी के नाम के साथ लिखा है कि वह इनके व्यवहार से आहत थे। सुसाइड नोट में लिखा है कि उन्होंने पूरा जीवन सम्मान के साथ जिया। उनके दामन में कभी किसी तरह का दाग नहीं रहा। लेकिन कुछ लोगों ने उन्हें मिथ्या आरोप लगाकर अपमानित किया। जिससे वह बेहद दुखी हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि  आखिर वह कौन सा अपमान था जिसने महंत को इस कदर आहत कर दिया।
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आनंद, आद्या या संदीप, कौन किस बात के लिए कर रहा था परेशान?
सुसाइड नोट में लिखी बातें सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं जिनका जवाब किसी के पास नहीं है। इन सवालों से सबसे ज्यादा घेरे में आनंद गिरि, बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य ख्पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी की भूमिका है। किसकी भूमिका को लेकर क्या उठ रहे हैं सवाल, नीचे पढ़िए...  
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योग गुरु आनंद गिरि
बात आनंद गिरि की करें तो सवाल उठता है कि क्या वह किसी बात को लेकर महंत को परेशान कर रहे थे। गौरतलब है कि कुछ समय पहले आनंद गिरि को अखाड़े से निष्कासित किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई वीडियो वायरल हुए थे। जिसमें अखाड़े व मठ की संपत्तियों के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष के कई शिष्यों के पास करोड़ों की संपत्ति होने से संबंधित तस्वीरें भी वायरल हुई थीं। आरोप लगा था कि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की छवि धूमिल करने को लेकर साजिशन ऐसा किया गया। जिसका खुद अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने खंडन करते हुए कहा था कि यह सभी आरोप बेबुनियाद हैं। ऐसें में सबसे बड़ा सवाल यह है कि  क्या आनंद गिरि किसी बात को लेकर महंत को परेशान कर रहे थे? 

आद्या तिवारी व संदीप तिवारी
इसके बाद लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी का नाम आता है। सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि महंत इनके व्यवहार से आहत थे। चर्चा इस बात की भी रही कि महंत से आद्या तिवारी का लेनदेन का कुछ मामला था, जिसे लेकर पिछले कुछ समय से उनके बीच मनमुटाव हुआ था। तो एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या आद्या व उनके बेटे संदीप की किसी बात को लेकर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष परेशान थे। हालांकि हिरासत में लिए जाने के दौरान आद्या तिवारी ने इन बातों का खंडन किया और साफ कहा कि उनका अखाड़ा परिषद अध्यक्ष से किसी तरह का विवाद नहीं था।

अन्य शिष्यों से कोई लेना-देना नहीं, न किए जाएं परेशान
सुसाइड नोट में उन्होंने यह भी लिखा है कि उनके अन्य शिष्यों का उनकी मौत से कोई लेना-देना नहीं है, ऐसे में उन्हें परेशान न किया जाए। इसके अलावा विस्तार से यह लिखा है कि उनके न रहने के बाद मठ, अखाड़ा व हनुमान मंदिर में किसकी क्या भूमिका होगी। पुलिस अफसरों ने भी इस बात की पुष्टि की। आईजी रेंज केपी सिंह ने सुसाइड नोट में आनंद गिरि व वसीयतनामे के जिक्र के बात की पुष्टि की। हालांकि उन्होंने इससे ज्यादा कुछ बताने से इंकार किया। उनका कहना था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल इससे ज्यादा कुछ बता पाना संभव नहीं है।


सुसाइड नोट कितना सही, फोरेंसिक जांच से खुलेगा राज
अखाड़ा परिषद की संदिग्ध हाल में मौत के बाद फिलहाल जो भी आशंकाएं, निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं, उसका मूल मौके से बरामद सुसाइड नोट है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सुसाइड नोट की प्रमाणिकता भी तब तक संदेह से परे नहीं है जब तक कि फोरेंसिक जांच न हो जाए। फोरेंसिक जांच के दौरान हैंडराइटिंग मिलान में ही यह साफ हो पाएगा कि सुसाइड नोट अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने ही लिखा या नहीं। फिलहाल फोरेंसिक टीम ने इसे कब्जे में ले लिया है। साथ ही अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की हैंडराइटिंग का सैंपल भी एकत्र कर लिया गया। 

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