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Prayagraj News: एसआईटी ने सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों के घर दबिश दी
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चार वर्ष पूर्व मऊआइमा के मोहन का पूरा निवासी एक महिला को घर में बंधक बनाकर तमंचे के बल पर दुष्कर्म करने में दर्ज मुकदमे में एसआईटी ने दबिश दी। आरोपियों के खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी किया है। स्थानीय पुलिस के साथ एसआईटी पहुंची, लेकिन कोई आरोपी घर पर नहीं मिला।
27 सितंबर 2019 में मऊआइमा के मोहन का पूरा गांव में एक महिला से तमंचे के बल पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की जांच हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई को सौंपी गई थी। बाद में सीबीआई ने केस एसआईटी को सौंप दिया।इसकी जांच एसआईटी लखनऊ कर रही है। दोनों पक्षों के बयान एसआईटी दर्ज कर चुकी है।
इधर, मामले में आरोपी राजेश कुमार शुक्ला निवासी घीनपुर, दामोदर पुर के पूर्व प्रधान रामसजीवन पटेल, पूर्व बीडीसी सदस्य घीनपुर राधेश्याम, कमलेश कुमार निवासी धरौता के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट एसआईटी की विशेष अदालत ने जारी किया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वारंट लेकर मऊआइमा पुलिस के सहयोग से एसआईटी उनके घर पहुंची। ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में ही पुलिस ने आरोपियों को दबिश की जानकारी दे दी। इसके बाद सभी फरार हो गए। इसके बाद एसआईटी को लौटना पड़ा।
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सीबीआई को सौंपे थे 51 मामले, इनमें 36 मऊआइमा के
हाईकोर्ट के अधिवक्ता भूपेंद्र पांडेय ने कई थानों में दर्ज दुष्कर्म और एससी एसटी एक्ट के 51 मुकदमों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने इन मामलों की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इनमें 36 मामले केवल मऊआइमा थाने के थे। मामला अधिवक्ताओं से जुड़ा होने के कारण हाईकोर्ट ने सभी मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी थी। बताया गया था कि इस मामले में अधिवक्ताओं का एक गिरोह महिलाओं को मोहरा बना कर लोगों को दुष्कर्म के मुकदमों में फंसाता है और आरोपियों को ब्लैकमेल करता है। संवाद
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27 सितंबर 2019 में मऊआइमा के मोहन का पूरा गांव में एक महिला से तमंचे के बल पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की जांच हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई को सौंपी गई थी। बाद में सीबीआई ने केस एसआईटी को सौंप दिया।इसकी जांच एसआईटी लखनऊ कर रही है। दोनों पक्षों के बयान एसआईटी दर्ज कर चुकी है।
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इधर, मामले में आरोपी राजेश कुमार शुक्ला निवासी घीनपुर, दामोदर पुर के पूर्व प्रधान रामसजीवन पटेल, पूर्व बीडीसी सदस्य घीनपुर राधेश्याम, कमलेश कुमार निवासी धरौता के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट एसआईटी की विशेष अदालत ने जारी किया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वारंट लेकर मऊआइमा पुलिस के सहयोग से एसआईटी उनके घर पहुंची। ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में ही पुलिस ने आरोपियों को दबिश की जानकारी दे दी। इसके बाद सभी फरार हो गए। इसके बाद एसआईटी को लौटना पड़ा।
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सीबीआई को सौंपे थे 51 मामले, इनमें 36 मऊआइमा के
हाईकोर्ट के अधिवक्ता भूपेंद्र पांडेय ने कई थानों में दर्ज दुष्कर्म और एससी एसटी एक्ट के 51 मुकदमों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने इन मामलों की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इनमें 36 मामले केवल मऊआइमा थाने के थे। मामला अधिवक्ताओं से जुड़ा होने के कारण हाईकोर्ट ने सभी मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी थी। बताया गया था कि इस मामले में अधिवक्ताओं का एक गिरोह महिलाओं को मोहरा बना कर लोगों को दुष्कर्म के मुकदमों में फंसाता है और आरोपियों को ब्लैकमेल करता है। संवाद