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सम्राट हर्षवर्धन के समय से ही तीर्थ के पुरोहित रहे तीर्थपुरोहित

Sun, 17 Nov 2019 01:15 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 17 Nov 2019 01:15 AM IST
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Since the time of Emperor Harshavardhana, the priest of the pilgrimage has been a pilgrimage.
Since the time of Emperor Harshavardhana, the priest of the pilgrimage has been a pilgrimage. - फोटो : CITY DESK
सम्राट हर्षवर्धन के काल से ही
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तीर्थ के पुरोहित रहे तीर्थपुरोहित
0 चीनी यात्री ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांत में है उल्लेख
प्रयागराज। संगम पर विभिन्न प्रकार के कर्मकांड तथा धार्मिक अनुष्ठान कराने और दक्षिणा लेने का अधिकार सिर्फ प्रयागवाल को ही है। प्रयागराज के प्राचीन निवासी होने के कारण ही इन्हें प्रयागवाल कहा गया। मान्यता है भगवान राम जब लंका से लौटे तो कविरापुर, बट्टूपुर-अयोध्या के तीर्थपुरोहित ने उनके कर्मकांड कराए थे। लेकिन, सम्राट हर्ष के समय से तीर्थपुरोहितों के कर्मकांड और दान-उपदान के प्रणाम मिलते हैं।
चीनी यात्री ह्वेनसांग ने लिखा है कि हर्ष ने पुरोहितों को ही सब दान किया था। फिर पाल, परिहार, गहरवार से यह परंपरा आगे बढ़ी। प्रतिष्ठानपुर-झूंसी के राजा त्रिलोचन ने वर्ष 1027 ईसवी में एक तीर्थपुरोहित को गांव दान में दिया था। अंग्रेज यात्री स्कोनर ने 1826 में तीर्थ पुरोहितों के तख्त के बारे में लिखा था। यह भी कि पुरोहित, पंडे तीर्थयात्री के विलक्षण प्रकार के गुरु थे। प्रयाग महात्म्य के अनुसार माघ मेले में आने वालों के धार्मिक कार्य प्रयागवाल ही कराते थे।
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बड़े यजमान नियुक्त करते थे तीर्थ पुरोहित
प्रयागराज में प्रत्येक प्रांत के प्रांतपति तीर्थ पुरोहितों का भी जिक्र है। वर्षों पहले उस क्षेत्र के राजा, नरेश जमींदार या अन्य कोई प्रभावी व्यक्ति किसी को अपना तीर्थ पुरोहित नियुक्त करके उसे अपनी ओर से निशान दे देता था। फिर उस क्षेत्र के लोग उसी निशान के तीर्थपुरोहित के शिविर में पहुंचते थे।
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अंग्रेजों ने भी दिए थे पुरोहितों को निशान
नरेशों और जमींदारों से इतर अंग्रेजों ने भी क्षेत्र के तीर्थ पुरोहितों के रूप में पांच सिपाही और बादशाही झंडा जैसे निशान दिए थे। अल्मोड़ा के तत्कालीन कमिश्नर ने तीर्थपुरोहित शीतल प्रसाद तिवारी को पांच सिपाही का निशान दिया था। वहीं दुर्गा प्रसाद शर्मा के पूर्वजों को ‘यूनियन जैक’ का झंडा मिला था, जो स्वतंत्रता मिलने के बाद तिरंगे में तब्दील हो गया।
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