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साइन सिटी घोटाला : राशिद नसीम के लुकआउट नोटिस, रेडकार्नर नोटिस का विवरण प्रस्तुत करे सीबीआई

Thu, 15 Dec 2022 11:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 15 Dec 2022 11:33 PM IST
सार

कोर्ट ने घोटाले के मामले में जांच कर रही यूपी पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा, ईडी, एसएफआईओ की जांच पर अंसतुष्टी जताई। कहा कि एजेंसियां इस मामले में सही तरीके से जांच नहीं कर रही हैं।

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Sign City scam CBI to submit details of Rashid Naseem's lookout notice
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 68 हजार करोड़ रुपये के साइन सिटी घोटाले के मामले में मुख्य आरोपी राशिद नसीम के खिलाफ जारी की गई लुकआउट नोटिस और रेडकार्नर नोटिस के बारे में जानकारी मांगी है। कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई की तिथि पर विवरण प्रस्तुत करे। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ ने श्रीराम राम सहित कई अन्य याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया है।

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कोर्ट ने घोटाले के मामले में जांच कर रही यूपी पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा, ईडी, एसएफआईओ की जांच पर अंसतुष्टी जताई। कहा कि एजेंसियां इस मामले में सही तरीके से जांच नहीं कर रही हैं। कोर्ट ने यूपी सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि जब मुख्य आरोपी नेपाल में गिरफ्तार हुआ तो क्यों नहीं कार्रवाई की गई। कोर्ट ने साइन सिटी कंपनी से जुड़ी दूसरी कंपनी एस्काई ओसन टोकन के इंडिया हेड बृजमोहन, साइन सिटी के आईटी हेड सुनील जायसवाल के गिरफ्तार के बाद पूछताछ क्यों नहीं की है।

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याची के अधिवक्ता एसएन श्रीवास्तव ने इस संबंध में पूरा विवरण कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया। इसके साथ ही कंपनी से जुड़े पूरे रिकॉर्ड दिए। कोर्ट ने कहा कि मामले में जब राशिद नसीम के साथ उसका भाई आकिब नसीम और राशिद की पत्नी सलमा परवीन और आसिफ नसीम की पत्नी जीनत फातमा का नाम प्राथमिकी में दर्ज है तो उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई है। कोर्ट ने कहा कि ये सब भी तो कंपनी को बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर में शामिल हैं। इनसे पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है।


करीब घंटे भी से अधिक समय तक चली सुनवाई में एजेंसियों और यूपी सरकार की ओर से सही तरीके से जवाब न दिए जाने पर कोर्ट असंतुष्ट नजर आई और सीबीआई को लुकआउट और रेडकार्नर नोटिस जारी करने के बारे में पूरी जानकारी 21 दिसंबर को अगली सुनवाई की तिथि पर प्रस्तुत करने को कहा है।

याची के अधिवक्ताओं को कुछ हुआ डीजीपी होंगे जिम्मेदार
सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ताओं ने धमकी मिलने की शिकायत भी कोर्ट के समक्ष रखी। इस पर कोर्ट ने बड़े ही सख्त लहजे में चेतावनी दी। कहा कि याची के अधिवक्ताओं को अगर कुछ भी होता है तो उसके लिए डीजीपी जिम्मेदार होंगे। कोर्ट ने कहा कि दुबारा इस तरह की शिकायतें नहीं मिलनी चाहिए। याची के अधिवक्ता एसएन श्रीवास्तव और मृदुल ने कोर्ट को बताया कि उन्हें पुलिस और आरोपियों के रिश्तेदारों की ओर से धमकी दी गई और पूछताछ की गई। थानेदार ने थाने पर बुलाकर पूछताछ की।

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