सिद्धार्थनाथ सिंह : जमीनी कार्यकर्ताओं से दूरी पड़ गई भारी, संगठन में मिल सकती है यह जिम्मेदारी
माफिया अतीक अहमद का गढ़ मानी जाने वाली पश्चिम विधानसभा सीट पर लगातार दो बार कमल खिलाने वाले सिद्धार्थ नाथ सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने के बाद अब लोगों की जुबां पर यही सवाल है कि अब उनकी आगे क्या भूमिका होगी।
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इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट के नवनिर्वाचित विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह ने इस बार जिले की 12 विधानसभा सीटों में सर्वाधिक मत पाने का रिकार्ड बनाया हो, लेकिन वह योगी सरकार पार्ट टू कैबिनेट में अपनी जगह नहीं बना सके। बताया जा रहा है कि जमीनी कार्यकर्ताओं से दूरी और संघ द्वारा पैरवी न किए जाने की वजह सिद्धार्थ नाथ को भारी पड़ गई।
माफिया अतीक अहमद का गढ़ मानी जाने वाली पश्चिम विधानसभा सीट पर लगातार दो बार कमल खिलाने वाले सिद्धार्थ नाथ सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने के बाद अब लोगों की जुबां पर यही सवाल है कि अब उनकी आगे क्या भूमिका होगी। बताया जा रहा है कि उन्हें संगठन में कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। चर्चा यह भी है कि वह राष्ट्रीय प्रवक्ता की भूमिका में एक बार फिर से दिख सकते हैं।
हिस्ट्रीशीटर से सीएम का स्वागत कराने पर मचा था हल्ला
इस बीच मंत्रिमंडल में उन्हें जगह न मिलने की भी तमाम वजहें शुक्रवार को चर्चा का विषय बनीं। बताया जा रहा है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले डीएसए ग्राउंड में माफिया अतीक के कब्जे से खाली कराई गई जमीन के भूमि पूजन कार्यक्रम में माफिया बच्चा पासी के करीबी मंजीत कुशवाहा द्वारा सीएम योगी का स्वागत कराने के मामले में सपाइयों ने योगी सरकार पर निशाना साधा था।
सूत्र बताते हैं कि इस बात से तब सीएम खफा भी हुए थे। साथ ही शहर पश्चिम में जमीनी कार्यकर्ताओं से दूरी भी सिद्धार्थ नाथ के लिए भारी पड़ गई। चर्चा यह भी है कि संघ पदाधिकारियों ने भी सिद्धार्थ नाथ के लिए कोई खास पैरवी नहीं की। सिद्धार्थ नाथ के करीबी धनंजय सिंह ने कहा कि वे बड़े नेता हैं। सभी को उम्मीद है कि उन्हें आने वाले समय में पार्टी द्वारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी।