जनसुविधा के लिए सरकार ने रद्द किए 150 कानून
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वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद सिंह की ओर से आयोजित संगोष्ठी में में पीयूष गोयल ने कहा अगर मुकदमों का जल्दी निस्तारण होगा तो लोगों की अर्थ हानि भी कम होगी। न्यायमूर्ति सुधीर नारायण, सांसद केशव प्रसाद मौर्य, सांसद श्यामा चरण गुप्ता, सांसद विनोद सोनकर की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में अधिवक्ताओं की तमाम मांगों पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सभी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जा रहा है। हाईकोर्ट की नई खंडपीठ के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट की गरिमा से परिचित है। केंद्र सरकार के पास हाईकोर्ट के विभाजन का कोई प्रस्ताव नहीं है।
न्यायधीशों की कमी पर पीयूष गोयल ने कहा कि इससे संबंधित प्रस्ताव बार सीधे केंद्र सरकार को दे सकता है या मुझे स्वयं दे सकता है। गोष्ठी में शैलेंद्र अवस्थी द्वारा लिखित ‘आदर्श रेवन्यू संहिता’का भी विमोचन हुआ। साथ ही हिंदी में निर्णय निर्गत करने के लिए न्यायमूर्ति प्रेम शंकर गुप्त को मरणोपरांत सम्मानित किया गया। उनका पुरस्कार उनके पुत्र दिलीप कुमार ने ग्रहण किया। इस अवसर पर बार कौंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष वीसी मिश्र, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अशोक मेहता, विकास त्रिपाठी, प्राणेश दत्त त्रिपाठी, शीतला प्रसाद, भाजपा नगर अध्यक्ष शशि वार्ष्णेय, देवेंद्र नाथ मिश्र, सुबोध सिंह, सीपी उपाध्याय, श्रवण दुबे, एलपी तिवारी, आशुतोष शुक्ला आदि मौजूद रहे।