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50 लाख की फिरौती वसूलने के बाद शुभम के हत्या की थी योजना
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Shuats Student kidnapping case
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शुआट्स छात्र के अपहरणकर्ताओं से पूछताछ में खुलासा
दो दोस्तों ने रची थी साजिश, तीसरे को दिया था ठेका
नैनी। शुआट्स के बीफार्मा छात्र शुभम द्विवेदी के अपहरण की योजना उसके बचपन के दोस्त अभिषेक सिंह निवासी सोनवर्षा, बारा ने अपने साथी मनीष त्रिपाठी निवासी लखनपुर, कोरांव संग मिलकर रची थी। दोनों ने नैनी ईसाई मोहल्ला निवासी राहुल जोसेफ को अपहरण का ठेका दिया था। अपहरणकर्ताओं की योजना शुभम के पिता से 50 लाख रुपए की फिरौती वसूलकर उसकी हत्या करने की थी। गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों से पूछताछ में इस बात का खुलासा हुआ है।
गंगोत्री नगर से अगवा किए गए शुभम को एडीए पुलिस चौकी के पास बने एक बंगलेनुमा मकान के दूसरे तल पर तीन दिन तक कैद रखा गया था। शातिर अपहर्ताओं ने एक तरफ शुभम को कैद रखा था तो दूसरी तरफ वह लगातार पुलिस और उसके परिजनों के संपर्क में भी थे। पुलिस को गुमराह करने के लिए ही आरोपी राहुल जोसेफ अपहृत छात्र का मोबाइल लेकर नारीबारी, चाकघाट, एवं सोहागी की तरफ घूम रहा था। योजना के तह 29 अगस्त की शाम 6.22 बजे छात्र के मोबाइल से ही राहुल ने सोहागी के आस-पास से उसके पिता को फोन कर फिरौती की रकम तैयार रखने को कहा। बदले में पिता ने 10 लाख रुपए की रकम इकट्ठा भी कर ली थी। यह बातें पकड़े गए तीन अपहरणकर्ताओं और बरामद शुभम द्विवेदी से पूछताछ के बाद सामने आई हैं। पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता अभिषेक सिंह निवासी सोनवर्षा, बारा, मनीष त्रिपाठी निवासी लखनपुर, कोरांव व बृजेंद्र सिंह उर्फ चंकी निवासी नौढिय़ा उपरहार, शंकरगढ़ को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि राहुल जोसेफ, शशांक तिवारी, राहुल सिंह परिहार निवासी गोझवार, घूरपुर समेत इनके साथ शामिल अन्य लोग फरार हैं।यह भी पता चला है कि जहां शुभम को रखा गया था वहां अपहरणकर्ता रोज शराब पार्टी करते थे। वहां कमरे से पुलिस को शराब की बोतले, सिगरेट और नमकीन के पैकेट मिले हैं। अपहृत छात्र की बरामदगी में व्यापारी सुरक्षा प्रकोष्ठ के बृजेंद्रनाथ राय व अन्य सदस्यों की अहम भूमिका रही।
चौकी से 200 मीटर दूरी, कैसे नहीं लगी भनक
घटना से नैनी पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल एडीए कालोनी में चकबबुरा प्राइमरी स्कूल के पास जिस मकान में अपहृत छात्र को तीन दिन तक कैद रखा गया, वह एडीए पुलिस चौकी से महज 200 मीटर की दूरी पर है। यह मकान मेजा निवासी जीएस मिश्रा का है जिसके दूसरे तल का हिस्सा एक आरोपी शशांक तिवारी ने 15 हजार रुपए में किराए पर ले रखा है। सवाल यह है कि आखिर कैसे नैनी पुलिस को इसकी भनक नहीं लगी। जबकि व्यापारी सुरक्षा प्रकोष्ठ की टीम ने सक्रियता दिखाते हुए मामले का पटाक्षेप कर दिया। बता देें कि बाहर मुख्य गेट पर ताला बंद था। ऐसे में रात में क्राइम ब्रांच की टीम दीवार फांदकर घर के भीतर दाखिल हुई और अपहृत छात्र को मुक्त कराया। शातिर अपहर्ताओं ने शुभम को बीच वाले कमरे में बंद किया था ताकि उसके शोर मचाने पर आवाज बाहर न जाए।
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बेटे के लिए मां-बाप ने तीन साल तक रखा था सोमवार व्रत
नैनी। पेशे से किसान एवं ट्रांसपोर्टर तुलाराम द्विवेदी और उनकी धर्मपत्नी गीता द्विवेदी ने बेटे के लिए बहुत जतन किए थे। तीन साल तक सोमवार का व्रत किया था और भगवान भोलेनाथ की सेवा की थी, तब जाकर आठ बेटियों के बाद नौवीं संतान के रूप में उनके यहां बेटा शुभम पैदा हुआ था। उसे पालन पोषण के लिए यह दंपत्ति अपनी हर खुशी कुर्बान करने को तैयार था। नौ बेटियों के मां-बाप ने बेटे की शीक्षा दीक्षा से लेकर तमाम तरह की खुशियों का हर समय खयाल रखा। जब बेटे का अपहरण हुआ तब तुलाराम द्विवेदी और गीता द्विवेदी यही सोच-सोचकर रो रहे थे कि आखिर जिसके लिए पांच साल तक सोमवार का व्रत किया, आज उसी को कुछ लोग उनसे छीनना चाह रहे हैं। शुक्रवार की देर रात पुलिस की मदद से बेटे को उन्होंने अपनी आंखों के सामने सही सलामत देखा तो उनकी आंखे जो सिर्फ गीली दिख रहीं थी, उनमें से आंसुओं की धारा बह चली और अनायास ही ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करने के लिए उनके सिर और हाथ दोनों ऊपर की तरफ उठ गए। पुलिस के साथ वह अपने हिसाब से भी उसकी खोजबीन में लगे थे। उन्हीं की खोजबीन के चलते ही अपहरणकर्ताओं की सुरागकशी में पुलिस को मदद मिली।
शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के बढ़ैया गांव निवासी तुलाराम द्विवेदी पेशे से किसान है। खेती के ही बल पर ाउन्होंने दो-तीन ट्रकें खरीद लीं थीं और ट्रांसपोर्ट का बिजिनेश भी करने लगे थे। उनके लगातार सात बेटियां पैदा हुईं। बेटे की चाहत में बेटियों की संख्या बढ़ती जा रही थी। पुरोहितों के बताने और मान्यता के अनुसार उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए पत्नी संग सोमवार का व्रत रखना शुरू किया था। जिसके बाद नौवीं संतान के रूप में उन्हें बेटा मिला। अब तक वह सात बेटियों की शादी कर चुके हैं। दो बेटियों और एक बेटे की शादी करनी बाकी हैं। तुलाराम द्विवेदी के मुताबिक शुभम के अपहरण की पोल अपहरणकर्ताओं के साथी ने ही धोखे से खोल दी। उन्हें शक था कि उनके बेटे के अपहरण में हो न हो इलाके के लड़के जरूर शामिल होंगे। वो इसी उधेड़ बुन में लगे थे, तभी उनके दिमाग में शुभम के मित्र रहे राहुल सिंह परिहार निवासी गोझवार, लालापुर का नाम आया। तुलाराम द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने अपने रिश्तेदार को 30 अगस्त की सुबह राहुल के घर में पिता मुनी सिंह परिहार के पास भेजा। मुनी सिंह ने बेटे राहुल को फोन करके पूछा कि शुभम के अपहरण में तुम भी शामिल हो क्या, तो उसका जवाब था कि नहीं, उसने नहीं बल्कि आशुतोष और मनीष त्रिपाठी ने उसे अगवा किया है। बस यहीं से पुलिस को अपहरणकर्ताओं का सुराग मिला गया। शुक्रवार की देर रात जब तुलाराम द्विवेदी ने अपने बेटे शुभम को सही सलामत देखा तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्हें पहले बेटे को गले लगाया फिर पुलिस वालों को हाथ जोड़कर अभिवादन करते हुए शुक्रिया अदा किया। शनिवार को उन्होंने पूरे थाने में मिठाई बंटवाई।
मां की बीमारी बताकर दोस्त से मांगी थी कार
नैनी । शुभम द्विवेदी के अपहरण की योजना बनाने वालों में शामिल शंशाक तिवारी ने अपहरण में प्रयुक्त इनोवा कार नैनी स्टेशन के समीप रहने वाले अपने मित्र से झूठ बोलकर मांगी थी। शशांक ने कहा था कि उसकी मां बहुत बीमार है। जिसे इलाज के लिए ले जाना है। एक घंटे में गाड़ी वापस कर देगा लेकिन चार घंटे बाद वापस किया था।
सिर्फ राहुल जोसेफ ने नहीं पहना था नकाब
नैनी । शुभम ने बताया कि अपहरणकर्ताओं ने अपने चेहरे को गमछे से ढक रखा था, सिर्फ राहुल जोसेफ ने अपन चेहरा खुला रखा था। शुभम के अनुसार राहुल जोसेफ को यह गलतफहमी थी, कि शुभम उसे नहीं पहचानता लेकिन शुभम उसे पहचानता था। बाकि लड़कों को डर था कि शुभम उन्हें पहचान लेगा, इसलिए वो सब नकाब में रहते थे।
तमंचे के बट से शुभम पर किया था प्रहार, दी थी धमकी
नैनी। जब शुभम को अपहरणकर्ता कार से लेकर जा रहे थे तो रास्ते में चिल्लाया तो राहुल जोसेफ ने तमंचे की बट से उसके पैर पर मारा था और धमकी दी थी कि अगर शोर मचाए तो गोली मार देंगे। उसी के सामने असलहों को लोड किया गया था। जिससे शुभम डर गया था। जहां उसे बंद करके रखा गया, वहां लगातार अपहरणकर्ता शुभम को ढांढस बंधा रहे थे कि उन्हें किसी और को उठाना था, धोखे से तुम्हे उठा लिए हैं, जल्द ही तुम्हे छोड़ देंगे।
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दो दोस्तों ने रची थी साजिश, तीसरे को दिया था ठेका
नैनी। शुआट्स के बीफार्मा छात्र शुभम द्विवेदी के अपहरण की योजना उसके बचपन के दोस्त अभिषेक सिंह निवासी सोनवर्षा, बारा ने अपने साथी मनीष त्रिपाठी निवासी लखनपुर, कोरांव संग मिलकर रची थी। दोनों ने नैनी ईसाई मोहल्ला निवासी राहुल जोसेफ को अपहरण का ठेका दिया था। अपहरणकर्ताओं की योजना शुभम के पिता से 50 लाख रुपए की फिरौती वसूलकर उसकी हत्या करने की थी। गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों से पूछताछ में इस बात का खुलासा हुआ है।
गंगोत्री नगर से अगवा किए गए शुभम को एडीए पुलिस चौकी के पास बने एक बंगलेनुमा मकान के दूसरे तल पर तीन दिन तक कैद रखा गया था। शातिर अपहर्ताओं ने एक तरफ शुभम को कैद रखा था तो दूसरी तरफ वह लगातार पुलिस और उसके परिजनों के संपर्क में भी थे। पुलिस को गुमराह करने के लिए ही आरोपी राहुल जोसेफ अपहृत छात्र का मोबाइल लेकर नारीबारी, चाकघाट, एवं सोहागी की तरफ घूम रहा था। योजना के तह 29 अगस्त की शाम 6.22 बजे छात्र के मोबाइल से ही राहुल ने सोहागी के आस-पास से उसके पिता को फोन कर फिरौती की रकम तैयार रखने को कहा। बदले में पिता ने 10 लाख रुपए की रकम इकट्ठा भी कर ली थी। यह बातें पकड़े गए तीन अपहरणकर्ताओं और बरामद शुभम द्विवेदी से पूछताछ के बाद सामने आई हैं। पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता अभिषेक सिंह निवासी सोनवर्षा, बारा, मनीष त्रिपाठी निवासी लखनपुर, कोरांव व बृजेंद्र सिंह उर्फ चंकी निवासी नौढिय़ा उपरहार, शंकरगढ़ को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि राहुल जोसेफ, शशांक तिवारी, राहुल सिंह परिहार निवासी गोझवार, घूरपुर समेत इनके साथ शामिल अन्य लोग फरार हैं।यह भी पता चला है कि जहां शुभम को रखा गया था वहां अपहरणकर्ता रोज शराब पार्टी करते थे। वहां कमरे से पुलिस को शराब की बोतले, सिगरेट और नमकीन के पैकेट मिले हैं। अपहृत छात्र की बरामदगी में व्यापारी सुरक्षा प्रकोष्ठ के बृजेंद्रनाथ राय व अन्य सदस्यों की अहम भूमिका रही।
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चौकी से 200 मीटर दूरी, कैसे नहीं लगी भनक
घटना से नैनी पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल एडीए कालोनी में चकबबुरा प्राइमरी स्कूल के पास जिस मकान में अपहृत छात्र को तीन दिन तक कैद रखा गया, वह एडीए पुलिस चौकी से महज 200 मीटर की दूरी पर है। यह मकान मेजा निवासी जीएस मिश्रा का है जिसके दूसरे तल का हिस्सा एक आरोपी शशांक तिवारी ने 15 हजार रुपए में किराए पर ले रखा है। सवाल यह है कि आखिर कैसे नैनी पुलिस को इसकी भनक नहीं लगी। जबकि व्यापारी सुरक्षा प्रकोष्ठ की टीम ने सक्रियता दिखाते हुए मामले का पटाक्षेप कर दिया। बता देें कि बाहर मुख्य गेट पर ताला बंद था। ऐसे में रात में क्राइम ब्रांच की टीम दीवार फांदकर घर के भीतर दाखिल हुई और अपहृत छात्र को मुक्त कराया। शातिर अपहर्ताओं ने शुभम को बीच वाले कमरे में बंद किया था ताकि उसके शोर मचाने पर आवाज बाहर न जाए।
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बेटे के लिए मां-बाप ने तीन साल तक रखा था सोमवार व्रत
नैनी। पेशे से किसान एवं ट्रांसपोर्टर तुलाराम द्विवेदी और उनकी धर्मपत्नी गीता द्विवेदी ने बेटे के लिए बहुत जतन किए थे। तीन साल तक सोमवार का व्रत किया था और भगवान भोलेनाथ की सेवा की थी, तब जाकर आठ बेटियों के बाद नौवीं संतान के रूप में उनके यहां बेटा शुभम पैदा हुआ था। उसे पालन पोषण के लिए यह दंपत्ति अपनी हर खुशी कुर्बान करने को तैयार था। नौ बेटियों के मां-बाप ने बेटे की शीक्षा दीक्षा से लेकर तमाम तरह की खुशियों का हर समय खयाल रखा। जब बेटे का अपहरण हुआ तब तुलाराम द्विवेदी और गीता द्विवेदी यही सोच-सोचकर रो रहे थे कि आखिर जिसके लिए पांच साल तक सोमवार का व्रत किया, आज उसी को कुछ लोग उनसे छीनना चाह रहे हैं। शुक्रवार की देर रात पुलिस की मदद से बेटे को उन्होंने अपनी आंखों के सामने सही सलामत देखा तो उनकी आंखे जो सिर्फ गीली दिख रहीं थी, उनमें से आंसुओं की धारा बह चली और अनायास ही ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करने के लिए उनके सिर और हाथ दोनों ऊपर की तरफ उठ गए। पुलिस के साथ वह अपने हिसाब से भी उसकी खोजबीन में लगे थे। उन्हीं की खोजबीन के चलते ही अपहरणकर्ताओं की सुरागकशी में पुलिस को मदद मिली।
शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के बढ़ैया गांव निवासी तुलाराम द्विवेदी पेशे से किसान है। खेती के ही बल पर ाउन्होंने दो-तीन ट्रकें खरीद लीं थीं और ट्रांसपोर्ट का बिजिनेश भी करने लगे थे। उनके लगातार सात बेटियां पैदा हुईं। बेटे की चाहत में बेटियों की संख्या बढ़ती जा रही थी। पुरोहितों के बताने और मान्यता के अनुसार उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए पत्नी संग सोमवार का व्रत रखना शुरू किया था। जिसके बाद नौवीं संतान के रूप में उन्हें बेटा मिला। अब तक वह सात बेटियों की शादी कर चुके हैं। दो बेटियों और एक बेटे की शादी करनी बाकी हैं। तुलाराम द्विवेदी के मुताबिक शुभम के अपहरण की पोल अपहरणकर्ताओं के साथी ने ही धोखे से खोल दी। उन्हें शक था कि उनके बेटे के अपहरण में हो न हो इलाके के लड़के जरूर शामिल होंगे। वो इसी उधेड़ बुन में लगे थे, तभी उनके दिमाग में शुभम के मित्र रहे राहुल सिंह परिहार निवासी गोझवार, लालापुर का नाम आया। तुलाराम द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने अपने रिश्तेदार को 30 अगस्त की सुबह राहुल के घर में पिता मुनी सिंह परिहार के पास भेजा। मुनी सिंह ने बेटे राहुल को फोन करके पूछा कि शुभम के अपहरण में तुम भी शामिल हो क्या, तो उसका जवाब था कि नहीं, उसने नहीं बल्कि आशुतोष और मनीष त्रिपाठी ने उसे अगवा किया है। बस यहीं से पुलिस को अपहरणकर्ताओं का सुराग मिला गया। शुक्रवार की देर रात जब तुलाराम द्विवेदी ने अपने बेटे शुभम को सही सलामत देखा तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्हें पहले बेटे को गले लगाया फिर पुलिस वालों को हाथ जोड़कर अभिवादन करते हुए शुक्रिया अदा किया। शनिवार को उन्होंने पूरे थाने में मिठाई बंटवाई।
मां की बीमारी बताकर दोस्त से मांगी थी कार
नैनी । शुभम द्विवेदी के अपहरण की योजना बनाने वालों में शामिल शंशाक तिवारी ने अपहरण में प्रयुक्त इनोवा कार नैनी स्टेशन के समीप रहने वाले अपने मित्र से झूठ बोलकर मांगी थी। शशांक ने कहा था कि उसकी मां बहुत बीमार है। जिसे इलाज के लिए ले जाना है। एक घंटे में गाड़ी वापस कर देगा लेकिन चार घंटे बाद वापस किया था।
सिर्फ राहुल जोसेफ ने नहीं पहना था नकाब
नैनी । शुभम ने बताया कि अपहरणकर्ताओं ने अपने चेहरे को गमछे से ढक रखा था, सिर्फ राहुल जोसेफ ने अपन चेहरा खुला रखा था। शुभम के अनुसार राहुल जोसेफ को यह गलतफहमी थी, कि शुभम उसे नहीं पहचानता लेकिन शुभम उसे पहचानता था। बाकि लड़कों को डर था कि शुभम उन्हें पहचान लेगा, इसलिए वो सब नकाब में रहते थे।
तमंचे के बट से शुभम पर किया था प्रहार, दी थी धमकी
नैनी। जब शुभम को अपहरणकर्ता कार से लेकर जा रहे थे तो रास्ते में चिल्लाया तो राहुल जोसेफ ने तमंचे की बट से उसके पैर पर मारा था और धमकी दी थी कि अगर शोर मचाए तो गोली मार देंगे। उसी के सामने असलहों को लोड किया गया था। जिससे शुभम डर गया था। जहां उसे बंद करके रखा गया, वहां लगातार अपहरणकर्ता शुभम को ढांढस बंधा रहे थे कि उन्हें किसी और को उठाना था, धोखे से तुम्हे उठा लिए हैं, जल्द ही तुम्हे छोड़ देंगे।