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SHUATS : पीएचडी व्यवसाय प्रबंधन में, बना दिया मॉस कॉम का सहा. प्रोफेसर

Sat, 18 Feb 2023 05:20 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 18 Feb 2023 05:20 AM IST
सार

राहत खां वीसी आरबी लाल की पत्नी सुधा लाल की भतीजी के पति हैं। 10 अप्रैल 2007 को मॉस कम्युनिकेशन विभाग में उनकी नियुक्ति असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर की गई। शासनादेश के अनुसार, इस पद पर नियुक्ति के लिए संबंधित विषय में पीएचडी अनिवार्य अर्हता है।

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SHUATS : PhD in Business Management, made Associate of Moss Com. Professor
Prayagraj News : shuats - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

शुआट्स में चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए हर नियम-कायदे ताक पर रख दिए गए। जांच के दौरान कुछ ऐसे भी मामले सामने आए, जिसमें अनिवार्य योग्यता किसी अन्य विषय में होने पर भी नियुक्ति दे दी गई। वीसी आरबी लाल के रिश्तेदार इंजी. राहत खां की नियुक्ति में भी यही खेल हुआ। उन्होंने पीएचडी व्यवसाय प्रबंधन में की, जबकि उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर मॉस कम्युनिकेशन विभाग में बना दिया गया।राहत खां वीसी आरबी लाल की पत्नी सुधा लाल की भतीजी के पति हैं।

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10 अप्रैल 2007 को मॉस कम्युनिकेशन विभाग में उनकी नियुक्ति असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर की गई। शासनादेश के अनुसार, इस पद पर नियुक्ति के लिए संबंधित विषय में पीएचडी अनिवार्य अर्हता है। जबकि राहत खां ने व्यवसाय प्रबंधन में पीएचडी की थी। जानकारों का कहना है कि फिल्म व मास कम्युनिकेशन विषय में चयन किए जाने के लिए इसी विषय में पीएचडी होना अनिवार्य था, लेकिन इसके अभाव में भी उनकी नियुक्ति कर ली गई।

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SHUATS : PhD in Business Management, made Associate of Moss Com. Professor
Prayagraj News : shuats - फोटो : अमर उजाला।

तीन साल सात महीने में ही बना दिया एसो. प्रोफेसर

इसके अलावा एक खेल उनकी प्रोन्नति में भी हुआ। जानकारों का कहना है कि एसोसिएट प्रोफेसर पद पर तैनाती के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर या समकक्ष पर पर पांच साल कार्य का अनुभव होना चाहिए। हालांकि महज तीन वर्ष सात माह के अनुभव पर उन्हें एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर प्रोन्नति दे दी गई। दरअसल एसोसिएट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति से पहले तक उन्होंने सितंबर 2003 से मार्च 2007 तक ही बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर शिक्षण कार्य किया था।

सात सालों में 41 लाख के सरकारी अनुदान का दुरुपयोग

सूत्रों का कहना है कि एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति के साथ ही गवर्नमेंट पे रोल पर समायोजन किया गया। इसके परिणामस्वरूप मूल वेतन के रूप में उन्हें 41.49 लाख रुपये का भुगतान किया गया। नियुक्ति अनियमित होने के चलते इस भुगतान को सरकारी अनुदान का दुरुपयोग माना गया, जिसकी रिकवरी के लिए भी शुआट्स प्रबंधन को लिखा गया था। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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