फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Shuats Case: Neither advertisement nor application and appointment made

शुआट्स प्रकरण : न विज्ञापन न ही आवेदन और कर ली गई नियुक्ति, ऐसे हुआ भ्रष्टाचार का खुलासा

Sun, 05 Feb 2023 07:38 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 05 Feb 2023 07:38 AM IST
सार

शुआट्स में प्रोफेसर समेत 69 पदों पर अवैध तरीके से नियुक्ति किए जाने के मामले में हुई जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। यह भी तथ्य सामने आया है कि इनमें से कुछ पद ऐसे भी हैं, जिन पर बिना आवेदन के ही नियुक्ति कर ली गई।

विज्ञापन
Shuats Case: Neither advertisement nor application and appointment made
Prayagraj News : shuats - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

शुआट्स में प्रोफेसर समेत 69 पदों पर अवैध तरीके से नियुक्ति किए जाने के मामले में हुई जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। यह भी तथ्य सामने आया है कि इनमें से कुछ पद ऐसे भी हैं, जिन पर बिना आवेदन के ही नियुक्ति कर ली गई। साथ ही बिना आवेदन पत्र के ही इन पदों पर चयन को अंतिम रूप दे दिया गया। जो पूरी तरह से नियम विरुद्ध है।

विज्ञापन


निदेशक, स्थानीय लेखा परीक्षा विभाग की ओर से की गई जांच में यह खुलासे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, पता चला है कि प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर के जिन 69 पदों पर नियुक्ति में अनियमितता की गई, उनमें किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया। कुछ पद ऐसे रहे जिनमें एक पद के सापेक्ष महज एक ही आवेदन आया। तो कुछ पदों पर तो बिना आवेदन के ही नियुक्ति हो गई।
विज्ञापन


इन पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन ही जारी नहीं किया गया। इन पदों पर प्रतिस्थापन के आधार पर नियुक्तियां की गईं। यह वह लोग थे जो लाल बंधुओं की ओर से संचालित सोसायटी में थे और बाद में इन्हें ही शुआट्स में अलग-अलग पदों पर नियुक्ति दे दी गई। एक खास बात यह भी है कि यह वह पद हैं, जिन पर नियुक्त शिक्षक के वेतन के भुगतान के लिए अनुदान शासन की ओर से दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कुल 222 पदों पर वेतन का भुगतान सरकारी अनुदान से

सूत्रों का कहना है कि शुआट्स में कुल 222 पद ऐसे हैं, जिन पर तैनात शिक्षकों या कर्मचारियों के वेतन का भुगतान शासन की ओर से दिए जाने वाले अनुदान से होता है। जानकारों की मानें तो एक तरह से इन्हें स्थायी पद भी कहा जा सकता है। इन्हीं में से 69 पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ियों की बात सामने आई। आरोप है कि शासन से अनुदानित होने के कारण इन पदों पर चहेतों की नियुक्ति के लिए सारे नियम ताक पर रख दिए गए।

छह साल पहले ही उधड़ने लगी थी भ्रष्टाचार की परतें

नैनी स्थित शुआट्स में भ्रष्टाचार के जिस खेल का खुलासा तीन दिन पहले हुआ, उसकी परतें छह साल पहले 2017 में ही उधड़ना शुरू हो गई थीं। विश्विविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति में अनियमितता समेत अन्य शिकायतों पर तत्कालीन कमिश्नर आशीष कुमार गोयल ने उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर जांच कराई थी। विवि प्रबंधन पर जांच में सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने शासन को पत्र भेजा था। इसमें विवि का स्पेशल ऑडिट कराने का भी सुझाव दिया था।

दरअसल दिवाकर नाथ त्रिपाठी के अलावा भारतीय मसीही सेवा दल की ओर से कमिश्नर को पत्र भेजकर शुआट्स प्रबंधन की शिकायत की गई थी। आरोप लगाया गया था कि विवि में शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां हो रही हैं। साथ ही घोर वित्तीय अनियमितता व सरकारी अनुदान के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया था।

शिकायतों का संज्ञान लेते हुए तत्कालीन कमिश्नर ने जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया। तीन सदस्यीय इस कमेटी में अपर आयुक्त, इलाहाबाद मंडल के अलावा अपर आयुक्त(वित्त) इलाहाबाद मंडल के अलावा संयुक्त निदेशक(कृषि) इलाहाबाद मंडल को शामिल किया गया। कमेटी ने जांच शुरू करते हुए शुआट्स प्रबंधन से कुछ अभिलेख मांगे। लेकिन अभिलेख नहीं उपलब्ध कराए गए। इसे देखते हुए तत्कालीन कमिश्नर की ओर से प्रमुख सचिव, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान, उप्र शासन को सितंबर 2017 में एक पत्र भेजा गया।

पत्र में शुआट्स प्रबंधन के खिलाफ बेहद सख्त टिप्पणियां की गई थीं। लिखा गया था कि विवि प्रबंधन की ओर से जांच की कार्यवाही में सहयोग नहीं किया गया। यह भी लिखा गया कि जांच में विवि प्रबंधन का सहयोग नहीं मिलने के कारण ही शासकीय अनुदान के उपयोग के संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है। ऐसे में शासन स्तर से एक जांच कमेटी का गठन कराकर शुआट्स विवि का स्पेशल ऑडिट कराना उपयुक्त होगा।

कुलपति समेत फरार आरोपियों के मोबाइल बंद

शुआट्स में अवैध नियुक्ति व सरकारी धन के अनियमित भुगतान के मामले में कुलपति आरबी लाल समेत फरार अन्य आरोपियों ने अपने मोबाइल बंद कर लिए हैं। इनमें कुलपति के दोनों भाई सुनील बिहारी लाल व विनोद बी लाल के अलावा कुलाधिपति जेए ऑलिवर, तत्कालीन रजिस्ट्रार अजय कुमार लाॅरेंस, प्रतिकुलपति सुनील बी लाल, तत्कालीन निदेशक एचआरएएम बिनोद बिहारी लाल, रजिस्ट्रार रॉबिन एल प्रसाद, तत्कालीन वित्त निदेशक स्टीफेन दास, डीन डाॅ. मोहम्मद इम्तियाज, तत्कालीन निदेशक एचआरएम रंजन ए जाॅन शामिल हैं।

रोक दिया गया था वेतन
शिकायतें मिलने के बाद अनुदानित पदों पर नियुक्त शिक्षकों व कर्मचारियों का वेतन भी कुछ समय के लिए रोक दिया गया था। दरअसल शासन की ओर से शुआट्स को दिया जाने वाला अनुदान वेतन भत्तों व अन्य खर्चों के लिए दिया जाता था। इसके लिए संबंधित बिलों पर कमिश्नर के हस्ताक्षर होते थे और इसके बाद ही कोषागार से भुगतान किया जाता था। तत्कालीन कमिश्नर ने शासन को भेजे गए पत्र में इसका भी जिक्र किया था। उन्होंने विवि प्रबंधन की ओर से जांच में सहयोग न करने के साथ ही यह भी बताया था कि अनुदानित बिलों पर हस्ताक्षर के लिए शुआट्स के वित्त नियंत्रक व रजिस्ट्रार उपस्थित होते थे। लेकिन वह वित्तीय अनियमितता(एक्सिस बैंक स्थित संस्था के खाते से 22.29 करोड़ के गबन) मामले में जेल में हैं। इन कारणों से विवि की ओर से प्रस्तुत अनुदान संबंधी वेतन भत्ते व अन्य बिलों पर प्रतिहस्ताक्षर की कार्यवाही नहीं हो पा रही है। जबकि संबंधित शिक्षकों व कर्मचारियेां की ओर से वेतन की मांग की जा रही है।

शुआट्स में प्रशासनिक भवन के आठ कमरों में मिला ताला

नैनी स्थित सैम हिग्गिनबाॅटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलाॅजी एंड साइंसेज (शुआट्स) में अवैध नियुक्ति मामले की जांच शनिवार से शुरू हो गई। इसके तहत प्रति कुलपति सर्वजीत हर्बट व सहायक वित्त नियंत्रक अशोक संदीप सिंह को कस्टडी रिमांड पर लिया गया। उन्हें लेकर पुलिस संस्थान में पहुंची तो वहां प्रशासनिक भवन के आठ कमरों में ताला लटका मिला। जिस पर पुलिस नोटिस देकर चली आई। उधर, कस्टडी रिमांड के दौरान दोनों आरोपियों से आठ घंटे तक गहन पूछताछ की गई।

प्रति कुलपति व सहायक वित्त नियंत्रक को सुबह आठ बजे कस्टडी रिमांड पर लिया गया। नैनी पुलिस की एक टीम ने केंद्रीय कारागार नैनी पहुंचकर अभिरक्षा में ले लिया और फिर उन्हें थाने ले जाया गया। वहां उनसे कई बिंदुओं पर पूछताछ की गई। कुलपति आरबी लाल व उनके दोनों भाइयों समेत फरार सभी आरोपियों के बारे में जानकारी मांगी गई।
दोपहर एक बजे के करीब उन्हें लेकर पुलिस टीम शुआट्स पहुंची। दरअसल पुलिस ने 69 पदों पर हुई अवैध नियुक्ति संबंधी मामले में सवाल पूछे तो प्रति कुलपति व सहायक वित्त नियंत्रक ने गोलमोल जवाब दिए। यह भी कहा कि इस संबंध में दस्तावेजों को देखकर ही कुछ बताया जा सकता है।

कहा कि विवि में चलने पर वह दस्तावेज उपलब्ध करा सकते हैं। इसी पर पुलिस उन्हें लेकर शुआट्स में पहुंची थी। हालांकि यहां प्रशासनिक भवन के आठ कमरों में ताला लटका मिला। इससे पुलिस कोई दस्तावेज हासिल नहीं कर पाई। जिसके बाद वहां मौजूद विवि से संबंधित लोगों को एक नोटिस दिया गया। इसमें निर्देशित किया गया कि 69 पदों पर अवैध नियुक्ति के आरोपों से संबंधित मामले की विवेचना प्रचलित है।

इसके लिए जांच पड़ताल के लिए संबंधित दस्तावेजों को यथाशीघ्र उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद पुलिस दोनों आरोपियों को लेकर वापस थाने चली आई। इसके बाद नैनी थाने में करीब एक घंटे तक दोनों से फिर पूछताछ की गई। इस दौरान विवि में तैनाती के बाद से उनके कार्यकाल के अलावा अन्य कई बिंदुओं पर जानकारी ली गई। फिर रिमांड अवधि खत्म होने पर शाम पांच बजे से पहले उन्हें नैनी जेल ले जाकर दाखिल कर दिया गया।

परिसर में दो घंटे तक चलती रही जांच पड़ताल

शनिवार को करीब दो घंटे तक पुलिस परिसर में रहकर जांच पड़ताल करती रही। पुलिस करीब एक बजे शुुआट्स में पहुंची थी। दो घंटे तक वहां रहकर छानबीन करने के बाद टीम तीन बजे के करीब वापस चली गई। इस दौरान मौके पर मिले कुछ कर्मचारियों से भी बातचीत की। हालांकि वह कोई जानकारी होने की बात से इन्कार करते रहे।

दूसरे मामले में भी बनवाया जाएगा रिमांड
पुलिस सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार कर जेल भेजे गए दोनों आरोपियों का जल्द ही नैनी थाने में दर्ज दूसरे मुकदमे में भी रिमांड बनवाया जा सकता है। इसमें शासन की ओर से अनुदान के रूप में दिए गए 5.56 करोड़ रुपये के भुगतान में अनियमितता के आरोप हैं। विवेचक नैनी इंस्पेक्टर बृजेश सिंह ने इस मामले की विवेचना शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि मामला वित्तीय हेराफेरी के आरोपों से संबंधित है, ऐसे में दस्तावेजी साक्ष्यों का संकलन जरूरी है। इसके बाद अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही जेल भेजे गए प्रति कुलपति व सहायक वित्त नियंत्रक का रिमांड इस मुकदमे में बनवाया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed