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शाइन सिटी घोटाला : अरबों का घोटाला करने वाले इंस्पेक्टर व दरोगा के साथ ही अन्य की भी भूमिका संदिग्ध
Sun, 24 Oct 2021 11:37 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 24 Oct 2021 11:37 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : social media
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अरबों का घोटाला करने वाले शाइन सिटी कंपनी के मालिकों व कर्मचारियों के मददगारों की फेहरिश्त में अभी अन्य नाम भी शामिल हैं। इनमें पुलिसकर्मी ही नहीं अफसर की भी भूमिका संदिग्ध है। मामला हाईप्रोफाइल होने की वजह से ऐसे सभी लोग रडार पर हैं। गोपनीय तरीके से इनकी जांच कराई जा रही है। माना जा रहा है कि जांच में इनके भी चेहरे बेनकाब होंगे।
शाइन सिटी के निदेशक समेत पांच लोगों पर दर्ज मुकदमे में लापरवाही पर एक दिन पहले ही सिविल लाइंस थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर रविंद्र प्रताप सिंह का सस्पेंड किया गया था। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए। निलंबन की कार्रवाई के पीछे आधिकारिक वजह तो मुकदमे के पर्यवेक्षण में लापरवाही बताई गई लेकिन सूत्रों का कुछ और ही कहना है।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों पर कार्रवाई करने में की गई कोताही इंस्पेक्टर के निलंबन का मूल कारण बनी। इस मामले में तत्कालीन विवेचक राजेश कुमार सिंंह के निलंबन की संस्तुति करते हुए भी रिपोर्ट भेजी गई है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि घोटालेबाजों पर मेहरबानी करने वालों में और भी नाम शामिल हैं।
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जांच निष्पक्ष तरीके से हुई तो इनके चेहरों का बेनकाब होना तय है। जिसमें न सिर्फ पुलिसकर्मी बल्कि अफसर भी रडार पर होंगे। दरअसल न सिर्फ स्थानीय थाने बल्कि विवेचना क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित होने के बाद भी कार्रवाई काफी समय तक लंबित रही। ऐसे में क्राइम ब्रांच के विवेचक की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। इसके अलावा पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कोर्ट की फटकार के बाद टूटी थी नींद
प्रदेश भर में अरबों की ठगी करने वाले शाइन शिटी ग्रुप के मालिकों व उनकेमददगरों पर दर्ज मुकदमों को लेकर न सिर्फ प्रयागराज बल्कि अन्य जिलों में भी पुलिस गंभीर नहीं थी। मामला ईओडब्ल्यू को ट्रांसफर होने के बाद जब हाईकोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लिया तब जाकर पुलिस की नींद टूटी। इसके बाद प्रदेश भर में अभियान चलाकर मुकदमों में वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यही नहीं निदेशक राशिद नसीम व उसके भाई आसिफ नसीम पर पांच-पांच लाख जबकि तीन अन्य पर एक-एक लाख का इनाम घोषित किया गया। दोनों भाई देश छोड़कर भाग निकले हैं जबकि वांछित नैनी निवासी जसीम घर छोड़कर फरार है।
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शाइन सिटी के निदेशक समेत पांच लोगों पर दर्ज मुकदमे में लापरवाही पर एक दिन पहले ही सिविल लाइंस थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर रविंद्र प्रताप सिंह का सस्पेंड किया गया था। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए। निलंबन की कार्रवाई के पीछे आधिकारिक वजह तो मुकदमे के पर्यवेक्षण में लापरवाही बताई गई लेकिन सूत्रों का कुछ और ही कहना है।
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सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों पर कार्रवाई करने में की गई कोताही इंस्पेक्टर के निलंबन का मूल कारण बनी। इस मामले में तत्कालीन विवेचक राजेश कुमार सिंंह के निलंबन की संस्तुति करते हुए भी रिपोर्ट भेजी गई है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि घोटालेबाजों पर मेहरबानी करने वालों में और भी नाम शामिल हैं।
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जांच निष्पक्ष तरीके से हुई तो इनके चेहरों का बेनकाब होना तय है। जिसमें न सिर्फ पुलिसकर्मी बल्कि अफसर भी रडार पर होंगे। दरअसल न सिर्फ स्थानीय थाने बल्कि विवेचना क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित होने के बाद भी कार्रवाई काफी समय तक लंबित रही। ऐसे में क्राइम ब्रांच के विवेचक की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। इसके अलावा पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कोर्ट की फटकार के बाद टूटी थी नींद
प्रदेश भर में अरबों की ठगी करने वाले शाइन शिटी ग्रुप के मालिकों व उनकेमददगरों पर दर्ज मुकदमों को लेकर न सिर्फ प्रयागराज बल्कि अन्य जिलों में भी पुलिस गंभीर नहीं थी। मामला ईओडब्ल्यू को ट्रांसफर होने के बाद जब हाईकोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लिया तब जाकर पुलिस की नींद टूटी। इसके बाद प्रदेश भर में अभियान चलाकर मुकदमों में वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यही नहीं निदेशक राशिद नसीम व उसके भाई आसिफ नसीम पर पांच-पांच लाख जबकि तीन अन्य पर एक-एक लाख का इनाम घोषित किया गया। दोनों भाई देश छोड़कर भाग निकले हैं जबकि वांछित नैनी निवासी जसीम घर छोड़कर फरार है।