60 हजार करोड़ की ठगी: आसिफ नसीम हर कॉल के बाद बदल देता था सिम
पांच साल तक छकाए रखा पुलिस को, अलग-अलग शहरों में काटी फरारी। प्रयागराज में करेली के जीटीबी नगर में आने की सूचना पुलिस को मिली तो पुलिस ने घेरकर पकड़ा।
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60 हजार करोड़ की ठगी में गिरफ्तार किए गए शाइन सिटी के एमडी आसिफ नसीम ने पुलिस से बचने के लिए पेशेवर अपराधियों जैसा रवैया अख्तियार किया। फरारी के दौरान वह लगातार अपने बेहद करीबी लोगों के संपर्क में बना रहा। लेकिन हर कॉल के बाद वह अपना सिम बदल देता था। इसी तरीके से वह पांच साल तक पुलिस व अन्य जांच एजेंसियों को छकाता रहा।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में आरोपी आसिफ ने कई अहम बातों का खुलासा किया है। उसने बताया है कि शाइन सिटी के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले दर्ज होने के बाद से ही उसने व उसके भाई ने अपने ठिकाने बदलने शुरू कर दिए। कुछ महीनों तक इधर-उधर रहने के बाद दोनों दुबई चले गए। जिसके बाद राशिद तो वहीं रह गया लेकिन कुछ समय बाद आसिफ वापस चला आया।
वह अपने कुछ बेहद करीबी लोगों की मदद से देश में अलग-अलग जगहों पर फरारी काटता रहा। इस दौरान वह शहर में रहने वाले अपने खास लोगों के भी संपर्क में बना रहा। लेकिन पुलिस को चकमा देने के लिए उसने खास तरकीब अपनाई। वह हर बार कॉल के बाद अपना सिम बदल देता था। ऐसा वह इसलिए करता था ताकि पुलिस व अन्य जांच एजेंसियां उसे ट्रेस न कर पाएं। घरवालों से बात करने के वह व्हाट्सएप व एंड टु एंड इनक्रिप्शन वाले कॉलिंग एप का इस्तेमाल करता था।
दूसरों के नाम पर लेता था सिम
सूत्रों के मुताबिक, फरारी के दौरान उसने अपने करीबियों से संपर्क में रहने के लिए जिन सिमों का इस्तेमाल किया, उनमें से एक भी उसके नाम का नहीं है। वह दूसरों की आईडी पर लिए लिए सिम से अपने जानने वालों को संपर्क करता था। इसके लिए वह करीबियों व परिचितों की मदद लेता था और कई बार सिम बेचने वाले एजेंटों को ज्यादा पैसों का लालच देकर उनसे सिम ले लेता था। यही वजह रही कि तमाम कोशिशों के बावजूद उसने पुलिस को पांच साल तक छकाए रखा।
मुंबई, एमपी में काटा फरारी का ज्यादातर वक्त
आसिफ ने पूछताछ में यह भी बताया है कि उसने फरारी के बाद से अलग-अलग शहरों में फरारी काटी। दुबई से लौटने के बाद वह काफी वक्त तक मुंबई में रहा। इसके बाद वह एमपी के उज्जैन चला आया और यहां काफी वक्त बिताया। यहां से वह मुंबई भी आता-जाता रहा। करीब छह महीनों से वह शहडोल में रहने लगा था।
उसी की कंपनी के कर्मचारी और एक लाख के इनामी जसीम ने शहडोल में ठिकाना बनाने में उसकी मदद की। जसीम की ससुराल शहडोल में है और फरारी के दौरान उसके भी वहां पहुंचने की खबर पुलिस टीमों तक पहुंची थी। जिसके बाद जनपदीय एसओजी की टीम ने वहां दबिश भी दी थी। लेकिन वह नहीं मिला।