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शिक्षा सेवा अधिकरण को लेकर एक और पीआईएल
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13 सितंबर को हो सकती है सुनवाई
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव एसी तिवारी और अधिवक्ता सुनीता शर्मा ने लखनऊ में प्रस्तावित शिक्षा सेवा अधिकरण को लेकर एक और जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में प्रस्तावित शिक्षा सेवा अधिकरण विधेयक 2019 को वापस लेने एवं लखनऊ में स्थित 12 अधिकरणों की प्रयागराज में स्थापित करने की मांग की है।
साथ ही मांग की है कि राज्य सरकार को हाईकोर्ट की प्रधानपीठ प्रयागराज के अतिरिक्त अन्य स्थान पर अधिकरण स्थापित न करने का समादेश जारी किया जाए। याचिका की सुनवाई शुक्रवार 13 सितंबर को होगी। याची के अधिवक्ता विजय चन्द्र श्रीवास्तव और शरदचन्द्र मिश्र ने बताया कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 में इलाहाबाद हाईकोर्ट को प्रदेश का हाईकोर्ट माना गया है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में कहा गया है कि जहां हाईकोर्ट हो, वहीं पर अधिकरण गठित होना चाहिए ताकि न्यायिक पर्यवेक्षण हो सके। राज्य सरकार इसकी अनदेखी कर लखनऊ में ही अधिकरण स्थापित कर रही है। जो स्थापित विधि सिद्धांतों के विपरीत है। इससे पहले पूर्व महासचिव प्रभाशंकर मिश्र भी इसी मुद्दे पर जनहित याचिका दाखिल की है। जिस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका 23 सितंबर को अंतिम सुनवाई के लिए नियत की गई है।
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव एसी तिवारी और अधिवक्ता सुनीता शर्मा ने लखनऊ में प्रस्तावित शिक्षा सेवा अधिकरण को लेकर एक और जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में प्रस्तावित शिक्षा सेवा अधिकरण विधेयक 2019 को वापस लेने एवं लखनऊ में स्थित 12 अधिकरणों की प्रयागराज में स्थापित करने की मांग की है।
साथ ही मांग की है कि राज्य सरकार को हाईकोर्ट की प्रधानपीठ प्रयागराज के अतिरिक्त अन्य स्थान पर अधिकरण स्थापित न करने का समादेश जारी किया जाए। याचिका की सुनवाई शुक्रवार 13 सितंबर को होगी। याची के अधिवक्ता विजय चन्द्र श्रीवास्तव और शरदचन्द्र मिश्र ने बताया कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 में इलाहाबाद हाईकोर्ट को प्रदेश का हाईकोर्ट माना गया है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में कहा गया है कि जहां हाईकोर्ट हो, वहीं पर अधिकरण गठित होना चाहिए ताकि न्यायिक पर्यवेक्षण हो सके। राज्य सरकार इसकी अनदेखी कर लखनऊ में ही अधिकरण स्थापित कर रही है। जो स्थापित विधि सिद्धांतों के विपरीत है। इससे पहले पूर्व महासचिव प्रभाशंकर मिश्र भी इसी मुद्दे पर जनहित याचिका दाखिल की है। जिस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका 23 सितंबर को अंतिम सुनवाई के लिए नियत की गई है।
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