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sharad navratri 2020: नवरात्र में घोड़े पर मां दुर्गा का आगमन, भैंसे पर होगा प्रस्थान
Sun, 04 Oct 2020 04:21 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 04 Oct 2020 04:21 PM IST
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नवरात्रि 2020
- फोटो : अमर उजाला
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पुरुषोत्तम मास की वजह से आदि शक्ति स्वरूपा की आराधना का शारदीय नवरात्र इस बार महीने भर की देरी से 17 अक्तूबर से आरंभ होगा। नवरात्रि की शुरुआत शनिवार के दिन होने से मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर होगा। घोड़े पर सवार होकर जगदंबा धरती पर पर भक्तों के बीच आएंगी। जबकि, प्रस्थान भैंसे पर होगा। ज्योतिषियों के अनुसार इस बार नवरात्र में मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान दोनों की उथल-पुथल के साथ ही रोग में वृद्धि करने वाला होगा।
देवी भागवत पुराण के अनुसार नवरात्र में मां दुर्गा के आगमन को भविष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत के रूप में देखा जाता है। प्रतिवर्ष नवरात्र में मां दुर्गा का आगमन तिथि व दिन के हिसाब से अलग-अलग वाहनों की सवारी पर होता रहा है। पुराणों में घोड़े पर मां दुर्गा के आगमन को ‘छत्रभंग स्तुरंगमे’ कहा गया है। इससे शासन-सत्ता में उथल-पुथल की स्थिति बन सकती है। पड़ोसी देशों से तनाव भी बढ़ सकते हैं।
ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार 23 सितंबर को राहु का परिवर्तन हो चुका है। वृषभ का राहु वातावरण में अशांति पैदा कर सकता है। पहले भी राहु के वृषभ में आने पर ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ा है। एक ओर जहां शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा का अश्व पर आगमन होगा, वहीं नौ दिन के पूजा महोत्सव के बाद मां भैंसे पर प्रस्थान करेंगी। भैंसे पर देवी के प्रस्थान को लेकर मान्यता है कि यह स्थिति रोग को बढ़ा सकता है। इस लिहाज से माता का आगमन, गमन का फलित ठीक नहीं होगा।
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देवी भागवत पुराण के अनुसार नवरात्र में मां दुर्गा के आगमन को भविष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत के रूप में देखा जाता है। प्रतिवर्ष नवरात्र में मां दुर्गा का आगमन तिथि व दिन के हिसाब से अलग-अलग वाहनों की सवारी पर होता रहा है। पुराणों में घोड़े पर मां दुर्गा के आगमन को ‘छत्रभंग स्तुरंगमे’ कहा गया है। इससे शासन-सत्ता में उथल-पुथल की स्थिति बन सकती है। पड़ोसी देशों से तनाव भी बढ़ सकते हैं।
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ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार 23 सितंबर को राहु का परिवर्तन हो चुका है। वृषभ का राहु वातावरण में अशांति पैदा कर सकता है। पहले भी राहु के वृषभ में आने पर ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ा है। एक ओर जहां शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा का अश्व पर आगमन होगा, वहीं नौ दिन के पूजा महोत्सव के बाद मां भैंसे पर प्रस्थान करेंगी। भैंसे पर देवी के प्रस्थान को लेकर मान्यता है कि यह स्थिति रोग को बढ़ा सकता है। इस लिहाज से माता का आगमन, गमन का फलित ठीक नहीं होगा।
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