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किसी दल विशेष से नहीं जुड़ा होता है शंकराचार्य
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Updated Thu, 13 Dec 2018 01:00 AM IST
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प्रयागराज
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो,प्रयागराज
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स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने दो टूक कहा है कि किसी भी धर्माचार्य को किसी दल विशेष से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। कोई भी शंकराचार्य किसी दल विशेष से नहीं जुड़ा होता है। शंकराचार्य सनातन धर्म का प्रतिनिधि, संरक्षक होता है। यदि वह किसी दल विशेष से जुड़ा होगा तो वह आचार्य हो ही नहीं सकता है। पुरी पीठाधीश्वर को किसी धर्माचार्य को भाजपा या किसी अन्य दल से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। यदि उन्हें भाजपा से ऐसी कोई आपत्ति है तो उससे कहें, किसी अन्य से नहीं।
अलोपीबाग स्थित शंकराचार्य आश्रम में बुधवार को ‘अमर उजाला’ से मुलाकात में उन्होंने कहा कि शास्त्रों में प्रयागराज में कुंभपर्व का जो ज्योतिषीय संयोग बताया गया है, वह इस बार घटित नहीं हो रहा है। हालांकि हमारे शास्त्रों में अर्द्धकुंभ का विधान भी नहीं है। ऐसे में यदि सरकार अर्द्धकुंभ को ही कुंभ कहकर व्यवस्थाएं पूरी कर रही है तो इस पर बहुत आपत्ति करना उपयुक्त नहीं है। धार्मिक परंपरा की रक्षा करना संतों, धर्माचार्यों का दायित्व है।
वहीं राम मंदिर निर्माण के सवाल पर कहा, यह मुद्दा हिन्दू जनमानस की भावनाओं से सीधे तौर पर जुड़ा है। हैरत इस बात की है कि जिस सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि राम मंदिर पर प्रतिदिन सुनवाई करके फैसला दिया जाएगा, उसी सर्वोच्च अदालत ने बाद में कह दिया कि यह मुद्दा उनकी प्राथमिकता में ही शामिल नहीं है। ऐसे में जरूरी हो गया है कि सरकार बिना बिलंब किए संसद के शीतकालीन सत्र में राम मंदिर निर्माण के लिए प्रस्ताव पारित करते हुए कानून बनाए ताकि राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सके।
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अलोपीबाग स्थित शंकराचार्य आश्रम में 13 से 21 दिसंबर तक ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्यों, पीठाधीश्वरों, गुरुओं के सम्मान व उनकी स्मृति में आराधना महोत्सव आयोजित किया जाएगा। वेदी रचना, गौरीगणेश पूजन, देवों के आह्वान के बाद श्रीमद्भागवत महात्म्य कथा सहित अन्य अनुष्ठान भी होंगे। समारोह में अनेक संतों, मनीषियों, आचार्यों को सम्मानित भी किया जाएगा। प्रेसवार्ता के दौरान प्रवक्ता ओंकारनाथ त्रिपाठी ने बताया कि 21 दिसंबर को कार्यक्रम की अध्यक्षता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजाराम शुक्ल अध्यक्षता करेंगे जबकि स्वामी वासुदेवानंद जी का आशीर्वचन होगा। चर्चा के दौरान आचार्य छोटेलाल मिश्र सहित अनेक विद्वान भी मौजूद थे।
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अलोपीबाग स्थित शंकराचार्य आश्रम में बुधवार को ‘अमर उजाला’ से मुलाकात में उन्होंने कहा कि शास्त्रों में प्रयागराज में कुंभपर्व का जो ज्योतिषीय संयोग बताया गया है, वह इस बार घटित नहीं हो रहा है। हालांकि हमारे शास्त्रों में अर्द्धकुंभ का विधान भी नहीं है। ऐसे में यदि सरकार अर्द्धकुंभ को ही कुंभ कहकर व्यवस्थाएं पूरी कर रही है तो इस पर बहुत आपत्ति करना उपयुक्त नहीं है। धार्मिक परंपरा की रक्षा करना संतों, धर्माचार्यों का दायित्व है।
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वहीं राम मंदिर निर्माण के सवाल पर कहा, यह मुद्दा हिन्दू जनमानस की भावनाओं से सीधे तौर पर जुड़ा है। हैरत इस बात की है कि जिस सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि राम मंदिर पर प्रतिदिन सुनवाई करके फैसला दिया जाएगा, उसी सर्वोच्च अदालत ने बाद में कह दिया कि यह मुद्दा उनकी प्राथमिकता में ही शामिल नहीं है। ऐसे में जरूरी हो गया है कि सरकार बिना बिलंब किए संसद के शीतकालीन सत्र में राम मंदिर निर्माण के लिए प्रस्ताव पारित करते हुए कानून बनाए ताकि राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सके।
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अलोपीबाग स्थित शंकराचार्य आश्रम में 13 से 21 दिसंबर तक ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्यों, पीठाधीश्वरों, गुरुओं के सम्मान व उनकी स्मृति में आराधना महोत्सव आयोजित किया जाएगा। वेदी रचना, गौरीगणेश पूजन, देवों के आह्वान के बाद श्रीमद्भागवत महात्म्य कथा सहित अन्य अनुष्ठान भी होंगे। समारोह में अनेक संतों, मनीषियों, आचार्यों को सम्मानित भी किया जाएगा। प्रेसवार्ता के दौरान प्रवक्ता ओंकारनाथ त्रिपाठी ने बताया कि 21 दिसंबर को कार्यक्रम की अध्यक्षता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजाराम शुक्ल अध्यक्षता करेंगे जबकि स्वामी वासुदेवानंद जी का आशीर्वचन होगा। चर्चा के दौरान आचार्य छोटेलाल मिश्र सहित अनेक विद्वान भी मौजूद थे।