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हाईकोर्ट में ही होगी ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य की सुनवाई

Tue, 19 Apr 2016 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 19 Apr 2016 12:41 AM IST
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Shankaracharya in the High Court will be hearing Jyotishpit
शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती - फोटो : pti
ज्योतिष्पीठ बद्रिकाश्रम विवाद की सुनवाई हाईकोर्ट में ही होगी। प्रदेश सरकार द्वारा सिविल प्रक्रिया संहिता में किए गए संशोधन का इस पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। मुख्य न्यायाधीश ने शंकराचार्य स्वरूपानंद की अर्जी पर प्रशासनिक स्तर से सुनवाई हाईकोर्ट में ही किए जाने का आदेश दिया है। स्वरूपानंद ने अपनी अधिक उम्र का हवाला देकर कहा था कि वह 92 वर्ष के पूरे हो चुके हैं, इसलिए उनके मामले का निस्तारण शीघ्रता से किया जाए, जबकि स्वामी वासुदेवानंद के वकीलों का कहना था कि राज्य सरकार द्वारा सीपीसी में किए गए संशोधन के अनुसार मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट में होनी चाहिए। सोमवार को प्रकरण न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव की पीठ में प्रस्तुत किया गया। खंडपीठ ने चीफ जस्टिस के आदेश का हवाला देते हुए प्रकरण को सुनवाई के लिए चार मई को प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
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स्वामी स्वरूपानंद के अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने बताया कि सिविल जज जूनियर डिविजन की कोर्ट ने गत वर्ष ज्योतिष्पीठ प्रकरण के विवाद पर स्वामी स्वरूपानंद के पक्ष में निर्णय दिया था। इसके विरुद्ध स्वामी वासुदेवानंद ने हाईकोर्ट में प्रथम अपील दाखिल की। अपील पर सुनवाई होती इससे पूर्व अपीलार्थी की ओर से स्थगन आदेश को लेकर मामला सुप्रीमकोर्ट तक गया। सुप्रीमकोर्ट ने भी स्थगनादेश देने से इंकार करते हुए प्रकरण का शीघ्रता से निस्तारण करने का आदेश दिया। इस दौरान राज्य सरकार ने सिविल प्रक्रिया संहिता में बदलाव करते हुए यह तय कर दिया कि 25 लाख रुपये से कम के मामलों में प्रथम अपील सिविल कोर्ट में ही सुनी जाएगी।
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वासुदेवानंद के वकीलों का कहना था कि नियमानुसार अब इस मामले को सिविल कोर्ट में स्थानांतरित कर देना चाहिए। स्वरूपानंद के वकीलों का कहना था कि वर्ष 2006 में फुल बेंच का निर्णय है कि ऐसे विवादों का निस्तारण करने के लिए चीफ जस्टिस सक्षम हैं। स्वरूपानंद ने चीफ जस्टिस को अर्जी दी थी। चूंकि इस मामले में काफी सुनवाई हाईकोर्ट में हो चुकी है। शंकराचार्य काफी वृद्ध हैं, इसलिए शीघ्र निस्तारण जरूरी है। चीफ जस्टिस ने सभी पहलुओं पर विचार के बाद हाईकोर्ट में सुनवाई करने का आदेश दिया है। अपील पर चार मई से दिन प्रतिदिन के आधार पर सुनवाई होगी।
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