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शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन पूजी गईं शैलपुत्री

Fri, 22 Sep 2017 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 22 Sep 2017 01:17 AM IST
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Shailputri was worshiped on the first day of the Shardi Navaratri
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
देवी की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र बृहस्पतिवार से शुरू हो गया। शहर के देवी मंदिरों में पूजा-पाठ के साथ लोगों ने घरों में कलश स्थापना कर भगवती के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा अर्चना की और व्रत रखा। अधिकतर लोगों ने पूरे नवरात्र तक व्रत रखने का संकल्प लिया। वहीं बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्होंने पहले दिन व्रत रखा और आखिरी दिन व्रत करेंगे।  भोर से पहले ही शक्तिपीठ अलोपशंकरी, सिद्धपीठ ललिता देवी मंदिर, सिद्धपीठ कल्याणी देवी मंदिर आदि में  मंगला आरती करने को लोगों की भीड़ उमड़ी। घंटा-घड़ियाल शंखनाद के बीच देवी मंदिर में दुर्गा सप्तशती का सामूहिक पाठ आरंभ हुआ। शुभ मुहूर्त में विधिविधान से कलश स्थापना की गई। देवी का आवाहन कर जौ बोया गया। देवी को लाल चुनरी, नारियल, सिंदूर, माला, फल नैवेद्य आदि अर्पित कर विराजने की प्रार्थना की गई। हवन, धूप से घर आंगन महके।
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सिद्धपीठ अलोपशंकरी मंदिर में भगवती का पालना स्पर्श करने की भक्तों में होड़ रही। सुबह से ही भक्तों की उमड़ पड़ी। कतार में खड़े लोग देवी का जयकारा लगाकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। हालांकि दोपहर को भीड़ का दबाव कम रहा। जैसे-जैसे शाम होने लगी, भीड़ बढ़ी। देवी को चुनरी नारियल सुहाग सामग्री अर्पित की गई। पूजा अर्चना के बाद मंदिर परिसर में दुर्गा सप्तशती का पाठ भी किया गया। बड़ी संख्या में पुरोहित यजमानों को दुर्गा सप्तशती के पाठ का संकल्प कराते रहे। अलोपशंकरी को निशान अर्पित करने के लिए शहर ही नहीं आसपास के जिलों से लोग आए। महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामसेवक गिरि की देखरेख में चारो पहर की आरती हुई। बिजली की आकर्षण सजावट मंत्रमुग्ध करती रही। देर रात तक दर्शन- पूजन का क्रम चलता रहा।
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सिद्धपीठ ललिता देवी मंदिर में त्रिपुर सुंदरी ललिता देवी का शैलपुत्री स्वरूप में शृंगार हुआ। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना करने को भोर से भक्तों की भीड़ लगनी शुरू हो गई। दोपहर बाद महिलाओं की ओर से भजन कीर्तन प्रस्तुत किए गए। रात में बृजभान एवं साथियों की ओर से देवी जागरण हुआ। दर्शन दे दो ललिता मइया आदि भजनों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हुए। इसके बाद हुई त्रिकाल आरती में शामिल होने के लिए कतार लगी। जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। इसके पहले आचार्य पुरोहितों की द्वारा शतचंडी महायज्ञ आरंभ हुआ। मुख्य यजमान संजीव अग्रवाल थे। अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा की अगुवाई में  पीसी वर्मा, धीरज नागर, संजय उपाध्याय, उमेश मिश्रा, महेंद्र मालवीय, सरदार सत्येंद्र सिंह, अनूप केशरवानी, कौशल दिलीप केशरी, पुरुषोत्तम यादव आदि व्यवस्था में लगे रहे।
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मां कल्याणी देवी के मंदिर के पट मंगला आरती के बाद दर्शन- पूजन के लिए खुले। दर्शन पूजन को भक्तों की  कतार लगी। दोपहर बाद देवी का महाभिषेक अध्यक्ष सुशील पाठक की देखरेख में हुआ। उसके बाद भगवती के प्रथम शैलपुत्री स्वरूप में कल्याणी देवी का शृंगार किया गया। शृंगार दर्शन करने भक्तों का तांता देर रात तक लगा  व्यवस्थापक श्याम जी पाठक के अनुसार शुक्रवार को देवी के ब्रह्मचारिणी स्वरूप का पूजा-अर्चना की जाएगी। व्यवस्था में दिलीप पाठक, आनंद जी टंडन, राजू यादव, बबलू सिंह सोनू श्रीमाली, पवन सिंह आदि लगे हैं।


सिविल लाइंस स्थित सिद्धेश्वरी गुप्तपीठ में आचार्य कुशमुनि की देखरेख में तांत्रिक पद्धति से देवी का पूजन अर्चन हुआ। हाईकोर्ट हनुमान मंदिर मंदिर, अष्टभुजी मंदिर, सिविल लाइंस हनुमत निकेतन के दुर्गा मंदिर, कर्नलगंज कालीबाड़ी, कटरा कालीबाड़ी आदि में कलश स्थापना सहित अनेक अनुष्ठान हुए। दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से मंदिर परिसर गूंजते रहे।

0 आचार्य विद्याकांत पांडेय के मुताबिक दुर्गा सप्तशती के इन अध्यायों के पाठ से कामना पूर्ति होती है।
प्रथम /चिंता से मुक्ति।
द्वितीय/ शत्रु परास्त ।
तृतीय/ शत्रु परास्त।
चतुर्थ/अध्यात्मिक उन्नति।
पंचम/अध्यात्मिक उन्नति।
षष्ठम /ऊपरी बाधा से छुटकारा।
सप्तम/मनोकामना पूर्ति।
अष्टम/पारिवारिक शांति ।
नवम/संतान की प्राप्ति।
दशम/संतान की प्राप्ति।
एकादश/आर्थिक उन्नति, सुख सौभाग्य की प्राप्ति।
द्वादश/मान सम्मान वृद्धि।
त्रयोदश/आध्यात्मिक उन्नति।

0  कामना पूर्ति को करें अर्पित
गाय का घी/आरोग्य की प्राप्ति
शक्कर/दीर्घायु
दूध/दुखों से छुटकारा
केला/बुद्धि का विकास
शहद/सुंदरता एवं आकर्षण
नारियल/पीड़ा शमन
धान/सुख, समृद्धि
मालपुआ/निर्णय शक्ति का विकास
गुड़/शोक मुक्ति, विपत्तियों से रक्षा
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