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शहीद गिरीश का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

Mon, 06 Jun 2016 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 06 Jun 2016 12:26 AM IST
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Girish martyr 's funeral with state honors
शहीद ग‌िरीश की राजकीय सम्मान के साथ अंत‌िम संस्कार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
आतंकी हमले में शहीद इलाहाबाद जनपद की करछना तहसील के सुलमई गांव के बीएसएफ जवान गिरीश कुमार शुक्ला का अंतिम संस्कार अरैल घाट पर रविवार दोपहर बाद पूरे राष्ट्रीय सम्मान के साथ पारिवारिक परम्परानुसार हुआ। बीएसएफ की टुकड़ी ने असिस्टेंट कमांडेंट के नेतृत्व में अपने शहीद साथी को मातमी धुन बजाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उनको गार्ड ऑफ आनर दिया गया।
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शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने शासन की ओर से कबीना मंत्री उज्ज्वल रमण सिंह, सांसद श्यामाचरण गुप्त के प्रतिनिधि के तौर पर उनके पुत्र विद्रुप अग्रहरि, करछना विधायक दीपक पटेल, मेजा विधायक गिरीश चंद्र पाण्डेय उर्फ गामा, प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी, एडीएम सिटी, आईजी, एसएसपी, एसपी यमुनापार, सीओ करछना, एसडीएम करछना समेत कई अधिकारी अरैल घाट पर मौजूद रहे। सभी ने तिरंगे में लिपटे उनके शव पर पुष्प चक्र अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद शहीद की चिता को उनके ज्येष्ठ पुत्र बीएसएफ जवान राघवेंद्र शुक्ल ने आग दी। जिसका साक्षी पूरा यमुनापार क्षेत्र बना। सभी ने संगम के लाल शहीद गिरीश कुमार शुक्ला को अश्रुपूरित नेत्रों से विदा किया। विधायक दीपक पटेल ने परिजनों को मदद दिलाने के लिए डीएम से बात की। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में शहीद के गांव और आसपास के क्षेत्रों से भीड़ भीषण गर्मी में घाट पर उमड़ पड़ी थी। भीड़ में शहीद के परिजन, नाते रिश्तेदार, मित्र और परिचित भी शामिल रहे। 

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इसके पहले शहीद का शव उनके पैतृक गांव सुलमई से बीएसएफ के वाहन से अरैल घाट पर दोपहर करीब डेढ़ बजे पहुंचा। शव के साथ जिला व पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी पहुंचे। इसके बाद बीएसएफ के जवानों की टुकड़ी ने वाहन से शहीद के तिरंगे में लिपटे शव को कांधा देकर उतारा। फिर परिजनों ने कांधा देकर गंगा तट पर पहुंचाया। जहां बीएसएफ की टुकड़ी ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। मातमी धुन के बीच शहीद के शव को उनके पुत्र राघवेंद्र शुक्ल ने दोपहर करीब दो बजकर बीस मिनट पर मुखागिभन दी। इस दौरान मौजूद भीड़ की आंखों में आंसू आ गए।

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घाट पर मौजूद अन्य गणमान्य लोगों में भाजपा नेता डाक्टर भगवत पाण्डेय, सुबोध सिंह, जिला पंचायत सदस्य व वरिष्ठ भाजपा नेता त्रिवेणी प्रसाद पाण्डेय, राम मनोहर , पूर्व सांसद के निजी सचिव राजेश्वर पाण्डेय, जिला पंचायत सदस्य रवीश चंद्र तिवारी, संकर्षण महाराज, बृजेश भारतीया, सपा नेता प्रदीप महरा, प्रधान शिवशंकर दीक्षित, पूर्व जिला पंचायत सदस्य भामे शुक्ल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मुकुंद लाल सोनकर आदि सैकड़ों अन्य दलों के नेता व कार्यकर्ता शामिल रहे।



शहीद बीएसएफ के जवान गिरीश कुमार शुक्ल के अंतिम संस्कार के दौरान उनके परिवार को मुआवजा दिए जाने को लेकर अरैल घाट पर कबीना मंत्री उज्जवल रमण सिंह और भाजपा नेता सुबोध सिंह व डा. भगवत पाण्डेय के बीच बहस होने लगी। भाजपा नेताओं ने 50 लाख रुपया मुआवजा दिए जाने की मांग प्रदेश सरकार से की। जिसपर कबीना मंत्री ने कहा कि शासन से बीस लाख रुपया दिया जाना स्वीकृत कर दिया गया है। इसपर भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रदेश शासन की तरफ से स्वीकृत की गई धनराशि बहुत कम है। जिसे लेकर कबीना मंत्री और भाजपा नेताओं के बीच तू-तू मैं-मैं होती रही। इसबीच जिलाधिकारी से भाजपा नेता राम मनोहर लोहिया ने शहीद के गांव के खस्ताहाल संपर्क मार्ग को नए सिरे से बनाए जाने की मांग की। डीएम ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

शहीद के ससुराल पक्ष ने उनके नाम से पेट्रोल पम्प व डिग्री कालेज खोले जाने तथा सुलमई गांव सम्पर्क मार्ग को शहीद के नाम किए जाने की शासन-प्रशासन से मांग की। शहीद की पत्नी कविता देवी के भतीजे अधिवक्ता विनोद कुमार द्विवेदी ने इस आशय की मांग की है। उनकी मांगों पर शासन-प्रशासन समेत मौजूद राजनैतिक दलों के नेताओं ने सहानुभूति पूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है।

श्रीनगर के जम्मू कश्मीर राजमार्ग पर बिजबिहड़ा के समीप शुक्रवार को आतंकी हमले में शहीद हुए करछना के सुलमई गांव के बीएसएफ जवान गिरीश कुमार शुक्ला का शव रविवार सुबह करीब ग्यारह बजे पहुंचा। जिसके बाद गांव में कोहराम मच गया। उनके शव के गांव में आने का सुबह से ही लोग इंतजार करते रहे। इकलौते पुत्र का शव पहुंचते ही उनकी मां इंद्रकली देवी उससे लिपट कर बिलखने लगीं। शहीद के तीनों पुत्र राघवेंद्र शुक्ल, धर्मेंद्र शुक्ल एवं नागेंद्र शुक्ल भी पिता के शव के पास आंसू बहा रहे थे। शहीद की पत्नी कविता देवी बेसुध हो गई थीं। शहीद का बड़ा बेटा राघवेंद्र शुक्ल मेघालय में बीएसएफ में तैनात है। बहु प्रियंका का भी रो-रोकर बुरा हाल है। शहीद गिरीश कुमार शुक्ला के पिता स्व. प्रभुनाथ शुक्ल की मौत बहुत पहले हो चुकी थी। तब गिरीश कुमार शुक्ला पांच साल के थे।


शहीद की शहादत के गम में स्थानीय व्यापार मंडल की ओर से सुलमई गांव के भड़ेवरा बाजार में रविवार को बंदी रही। व्यापारियों का कहना था कि किसान का बेटा देश की सेवा करते हुए शहीद हो गया। जिसका हमें गर्व है और उसके जाने का गम भी है। व्यापारियों ने शहीद गिरीश कुमार शुक्ल के सरल व्यवहार की काफी प्रशंसा की।

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