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हर क्षण बोलता रहा शाह का ‘मौन’
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 28 Jul 2018 01:04 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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तकरीबन डेढ़ साल के बाद इलाहाबाद पहुंचे अमित शाह शुक्रवार को बदले-बदले से नजर आए। डेढ़ वर्ष पूर्व जब वह इलाहाबाद आए थे तो रोड शो के माध्यम से उन्होंने भाजपाइयों के साथ ही आम लोगों तक अपनी बात पहुंचाई थी लेकिन, शुक्रवार को अमित शाह का ‘मौन’ कुछ और ही इशारा कर रहा था। मौजगिरि आश्रम और बाघम्बरी मठ में यूं तो वह धार्मिक कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे। इस दौरान उन्होंने अपना ज्यादातर समय पूजन अर्चन में ही बिताया। वे पूरी तरह संतों के सानिध्य में ही रहे। गुरु पूर्णिमा के दिन राजनीतिक बयानबाजी से उन्होंने परहेज किया मगर, उनका मौन यह संकेत देता रहा कि संतों से संवाद भी 2019 की तैयारी का एक हिस्सा है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने साढ़े चार घंटे के प्रवास के दौरान पार्टी नेताओं से भी दूरी बनाए रखी। अपनी इलाहाबाद की यात्रा के दौरान उन्होंने सार्वजनिक तौर पर एक शब्द भी निकाले। संतों के मार्गदर्शन पर वे पूजन अर्चन कार्यक्रम में तल्लीन नजर आए। हालांकि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष डा. महेंद्र नाथ पांडेय एवं प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल से जरूर गुफ्तगू करते नजर आए। अपने इलाहाबाद प्रवास के दौरान शाह ने इन तीन नेताओं को कुछ ज्यादा ही तवज्जो दी। दरअसल, कुंभ मेले के आयोजन के आसपास ही लोकसभा चुनाव कराए जाने की तैयारी चल रही है। पार्टी का जोर इस बात पर है कि यूपी में वर्ष 2014 की पुनरावृत्ति वर्ष 2019 में भी हो। इस वजह से आज भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की प्रयाग यात्रा के कई मायने निकाले जा रहे हैं। पार्टी कुंभ के पूर्व संत और उनके बहाने बड़े जनमानस को साधने की तैयारी कर रही है। इसी वजह से इस बार कुंभ की अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भी खासी ब्राडिंग की जा रही है। हालांकि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने शाह की यात्रा को धार्मिक ही बताया है। योगी सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि इस यात्रा के राजनीतिक मायने न निकाले जाए। यह पूरी तरह से धार्मिक यात्रा ही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने गुरु पूर्णिमा के दिन संतों का आशीर्वाद लेने के साथ ही कुंभ के सफल आयोजन के लिए संतों से वार्ता की।
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने साढ़े चार घंटे के प्रवास के दौरान पार्टी नेताओं से भी दूरी बनाए रखी। अपनी इलाहाबाद की यात्रा के दौरान उन्होंने सार्वजनिक तौर पर एक शब्द भी निकाले। संतों के मार्गदर्शन पर वे पूजन अर्चन कार्यक्रम में तल्लीन नजर आए। हालांकि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष डा. महेंद्र नाथ पांडेय एवं प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल से जरूर गुफ्तगू करते नजर आए। अपने इलाहाबाद प्रवास के दौरान शाह ने इन तीन नेताओं को कुछ ज्यादा ही तवज्जो दी। दरअसल, कुंभ मेले के आयोजन के आसपास ही लोकसभा चुनाव कराए जाने की तैयारी चल रही है। पार्टी का जोर इस बात पर है कि यूपी में वर्ष 2014 की पुनरावृत्ति वर्ष 2019 में भी हो। इस वजह से आज भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की प्रयाग यात्रा के कई मायने निकाले जा रहे हैं। पार्टी कुंभ के पूर्व संत और उनके बहाने बड़े जनमानस को साधने की तैयारी कर रही है। इसी वजह से इस बार कुंभ की अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भी खासी ब्राडिंग की जा रही है। हालांकि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने शाह की यात्रा को धार्मिक ही बताया है। योगी सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि इस यात्रा के राजनीतिक मायने न निकाले जाए। यह पूरी तरह से धार्मिक यात्रा ही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने गुरु पूर्णिमा के दिन संतों का आशीर्वाद लेने के साथ ही कुंभ के सफल आयोजन के लिए संतों से वार्ता की।
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