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सात साल बाद अपील दाखिल करने पर चार लाख हर्जाना
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 17 Sep 2016 02:28 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : डेमो फोटो
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इलाहाबाद। भूमि अधिग्रहण के मामले में मुआवजा अवार्ड होने के सात साल बाद उसके खिलाफ अपील दाखिल करने पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार पर चार लाख रुपये का हर्जाना लगा दिया है। कोर्ट ने इस अनावश्यक विलंब को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि इस विलंब के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से हर्जाने की राशि वसूल कर हाईकोर्ट के विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा की जाए। राज्य सरकार की आठ अपीलों को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने यह आदेश दिया।
सरकार की ओर से विलंब माफ करने की अर्जी दी गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। सरकार ने बुलंदशहर के मध्य गंगा कैनाल कंस्ट्रक्शन डिवीजन के लिए 1985 में जमीन अधिग्रहीत की। जमीनें शिकारपुर, रनिवाल, भाईपुर, असवर, मुस्तफाबाद, ददुआ गांवों की जमीन का अधिग्रहीत की गई। इसका मुआवजा 2007 में अवार्ड हुआ। सरकार को अवार्ड की राशि पर आपत्ति थी। इसके सात साल बाद उसने हाईकोर्ट में 2016 में अपीलें दाखिल की। एक लाख 60 हजार 463 रुपये कोर्ट फीस जमा की गई। अपीलें भी बेहद लापरवाही से तैयार की गईं। कोर्ट ने समय और पैसे की बर्बादी मानते हुए आठ अपीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने 50 हजार रुपये प्रति अपील की दर से हर्जाना राशि दोषी अधिकारियों से छह सप्ताह में वसूल करने का आदेश दिया है।
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सरकार की ओर से विलंब माफ करने की अर्जी दी गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। सरकार ने बुलंदशहर के मध्य गंगा कैनाल कंस्ट्रक्शन डिवीजन के लिए 1985 में जमीन अधिग्रहीत की। जमीनें शिकारपुर, रनिवाल, भाईपुर, असवर, मुस्तफाबाद, ददुआ गांवों की जमीन का अधिग्रहीत की गई। इसका मुआवजा 2007 में अवार्ड हुआ। सरकार को अवार्ड की राशि पर आपत्ति थी। इसके सात साल बाद उसने हाईकोर्ट में 2016 में अपीलें दाखिल की। एक लाख 60 हजार 463 रुपये कोर्ट फीस जमा की गई। अपीलें भी बेहद लापरवाही से तैयार की गईं। कोर्ट ने समय और पैसे की बर्बादी मानते हुए आठ अपीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने 50 हजार रुपये प्रति अपील की दर से हर्जाना राशि दोषी अधिकारियों से छह सप्ताह में वसूल करने का आदेश दिया है।
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