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हत्यारोपी की उम्रकैद की सजा बरकरार, अपील खारिज
Thu, 07 Mar 2019 01:00 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 07 Mar 2019 01:00 AM IST
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अदालत
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हाईकोर्ट ने पीलीभीत के विशालपुर निवासी मुन्ना लाल को हत्या का दोषी करार देते हुए उसेे मिली उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। मुन्ना लाल पर हरवंश की गोली मारकर हत्या करने का आरोप था। सत्र न्यायालय पीलीभीत ने उसे दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मुन्ना लाल ने सजा के खिलाफ जेल से अपील दाखिल की थी। अपील पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति आरके गौतम ने सुनवाई की।
घटना पांच फरवरी 2010 की है। वादी मुकदमा शेर सिंह के पिता हरबंश सिंह अपने घर के बाहर बैठकर परिवारवालों से बातचीत कर रहे थे। इसी बीच मुन्ना लाल दो तीन लोगों के साथ वहां पहुंचा और टाटा सूमो खरीद को लेकर दोनों में विवाद होने लगा। हरवंश सिंह सूमो के 90 हजार रुपये लौटाने को तैयार हो गए। मगर बहस इतनी ज्यादा बढ़ी की मुन्ना सिंह ने पिस्टल निकालकर हरवंश को गोली मार दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। दो अन्य आरोपी रूपलाल और प्यारे लाल सबूतों के अभाव में बरी कर दिए गए मगर मुन्ना लाल को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा में कोई अवैधानिकता नहीं है।
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घटना पांच फरवरी 2010 की है। वादी मुकदमा शेर सिंह के पिता हरबंश सिंह अपने घर के बाहर बैठकर परिवारवालों से बातचीत कर रहे थे। इसी बीच मुन्ना लाल दो तीन लोगों के साथ वहां पहुंचा और टाटा सूमो खरीद को लेकर दोनों में विवाद होने लगा। हरवंश सिंह सूमो के 90 हजार रुपये लौटाने को तैयार हो गए। मगर बहस इतनी ज्यादा बढ़ी की मुन्ना सिंह ने पिस्टल निकालकर हरवंश को गोली मार दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। दो अन्य आरोपी रूपलाल और प्यारे लाल सबूतों के अभाव में बरी कर दिए गए मगर मुन्ना लाल को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा में कोई अवैधानिकता नहीं है।
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