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नई शिक्षा नीति से बाजारीकरण को मिलेगा बढ़ावा
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seminar on new education policy in Allahabad University campus
- फोटो : CITY DESK
इविवि में छात्र संगठनों की गोष्ठी में नई शिक्षा नीति का विरोध
प्रयागराज, 21 नवंबर। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन पर बृहस्पतिवार को ‘नई शिक्षा नीति और शैक्षिक परिसरों में घटता जनवाद’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें अखिल भारत शिक्षा अधिकार मंच के दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ आइसा, दिशा छात्र संगठन, इंकलाबी छात्र मोर्चा, एसएफआई, भारतीय विद्यार्थी मोर्चा आदि ने भागीदारी की।
डॉ. नीता चौबे ने कहा कि शिक्षा के बाजारीकरण की नीतियों को अमलीजामा पहनाने के खिलाफ कोई विरोध न हो, इसके लिए विश्वविद्यालय में छात्रसंघ को समाप्त किया जा रहा है। इविवि भी इसका एक उदाहरण है। प्रो. मृत्युंजय ने कहा कि शिक्षा को बाजार के हवाले करके उससे मुनाफा कामना ही नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य है। इससे शिक्षा आम घरों से आने वाले युवाओं की पहुंच से दूर हो जाएगी। इस दौरान लोकेश मालती प्रकाश, डॉ.चतुरानन ओझा, नरभिंदर सिंह, भगवत स्वरूप,शक्ति रजवार, प्रसेन, रितेश विद्यार्थी, विकास स्वरूप, विकास भारतीय, चारुलेखा, नीशू, नीलम सरोज ने भी अपनी बात रखी।
हिंदी विभाग की परिचर्चा में उठा बीएचयू का मुद्दा
प्रयागराज, 21 नवंबर। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में सांप्रदायिक सद्भाव अभियान सप्ताह के तहत बृहस्पतिवार को हिंदी विभाग में ‘सांप्रदायिक सद्भाव एकता के लिए आवश्यक है’ विषय पर छात्र-छात्राओं के लिए परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान शोध छात्र धीरेंद्र ने हाल ही में उठे बीएचयू के मुद्दे को अपनी परिचर्चा में शामिल किया। इससे पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. चंदा देवी एवं राजभाषाअनुभाग के संयोजक प्रो. संतोष भदौरिया ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस मौके पर डॉ. अमृता, डॉ. वीरेंद्र मीणा, डॉ. सुजीत सिंह, डॉ. दीनानाथ मौर्या ने भी अपनी बात रखी। संचालन हिंदी अनुवादक हरिओम ने किया।
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प्रयागराज, 21 नवंबर। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन पर बृहस्पतिवार को ‘नई शिक्षा नीति और शैक्षिक परिसरों में घटता जनवाद’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें अखिल भारत शिक्षा अधिकार मंच के दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ आइसा, दिशा छात्र संगठन, इंकलाबी छात्र मोर्चा, एसएफआई, भारतीय विद्यार्थी मोर्चा आदि ने भागीदारी की।
डॉ. नीता चौबे ने कहा कि शिक्षा के बाजारीकरण की नीतियों को अमलीजामा पहनाने के खिलाफ कोई विरोध न हो, इसके लिए विश्वविद्यालय में छात्रसंघ को समाप्त किया जा रहा है। इविवि भी इसका एक उदाहरण है। प्रो. मृत्युंजय ने कहा कि शिक्षा को बाजार के हवाले करके उससे मुनाफा कामना ही नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य है। इससे शिक्षा आम घरों से आने वाले युवाओं की पहुंच से दूर हो जाएगी। इस दौरान लोकेश मालती प्रकाश, डॉ.चतुरानन ओझा, नरभिंदर सिंह, भगवत स्वरूप,शक्ति रजवार, प्रसेन, रितेश विद्यार्थी, विकास स्वरूप, विकास भारतीय, चारुलेखा, नीशू, नीलम सरोज ने भी अपनी बात रखी।
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हिंदी विभाग की परिचर्चा में उठा बीएचयू का मुद्दा
प्रयागराज, 21 नवंबर। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में सांप्रदायिक सद्भाव अभियान सप्ताह के तहत बृहस्पतिवार को हिंदी विभाग में ‘सांप्रदायिक सद्भाव एकता के लिए आवश्यक है’ विषय पर छात्र-छात्राओं के लिए परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान शोध छात्र धीरेंद्र ने हाल ही में उठे बीएचयू के मुद्दे को अपनी परिचर्चा में शामिल किया। इससे पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. चंदा देवी एवं राजभाषाअनुभाग के संयोजक प्रो. संतोष भदौरिया ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस मौके पर डॉ. अमृता, डॉ. वीरेंद्र मीणा, डॉ. सुजीत सिंह, डॉ. दीनानाथ मौर्या ने भी अपनी बात रखी। संचालन हिंदी अनुवादक हरिओम ने किया।

seminar on new education policy in Allahabad University campus- फोटो : CITY DESK
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