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वेतन नहीं मिलने से निजी स्कूलों के शिक्षक बदहाल
Sat, 29 Aug 2020 12:42 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 29 Aug 2020 12:42 AM IST
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school and colleges news in covid 19 period
सरकारी दावे के बाद भी निजी स्कूल प्रबंधन शिक्षकों एवं कर्मचारियों को वेतन नहीं दे रहे हैं। खासकर वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक तो भुखमरी की कगार पर आ गए हैं। अपने ही बच्चों की फीस जमा कर पाने में असमर्थ शिक्षकों के घर में अकसर राशन का संकट भी खड़ा हो जाता है। ऐसे में साथी शिक्षक एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं।
नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि निजी स्कूल तो अभिभावकों की ओर से फीस जमा करने में देरी होने पर बच्चों की ऑनलाइन क्लास बंद कर देते हैं, नोटिस भेजकर फीस जमा करने का दबाव बनाते हैं। ऐसे में स्कूल वालों का यह कहना है कि फीस नहीं जमा होने से वह वेतन नहीं दे पा रहे हैं, समझ से परे है। वहीं शहर के कुछ स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में शिक्षकों एवं कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने की धमकी भी दी गई है। ऐसे में शिक्षक व कर्मचारी दबी जुबां से अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
एक शिक्षक ने बताया कि उनका और उनके परिवार का बीपीएल कार्ड भी नहीं बन सकता, नहीं तो इस दौर में कुछ राहत मिलती। शहर के ही एक स्कूल में शिक्षक के परिवार के सामने उस समय विषम परिस्थिति खड़ी हो गई, जब उनके परिवार में राशन खत्म हो गया। इसकी जानकारी उनके साथी शिक्षकों को होने के बाद उनके घर मदद पहुंची।
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शिक्षक के दो बच्चों की फीस नहीं जमा होने पर उन्हें ऑनलाइन क्लास से रोक दिया गया। शिक्षक विधायक सुरेश त्रिपाठी ने शुक्रवार को वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने के मामले को विधान परिषद में उठाया। उन्होंने प्रदेश सरकार से शिक्षकों को 15 हजार रुपये मानदेय देने की मांग की है।
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नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि निजी स्कूल तो अभिभावकों की ओर से फीस जमा करने में देरी होने पर बच्चों की ऑनलाइन क्लास बंद कर देते हैं, नोटिस भेजकर फीस जमा करने का दबाव बनाते हैं। ऐसे में स्कूल वालों का यह कहना है कि फीस नहीं जमा होने से वह वेतन नहीं दे पा रहे हैं, समझ से परे है। वहीं शहर के कुछ स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में शिक्षकों एवं कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने की धमकी भी दी गई है। ऐसे में शिक्षक व कर्मचारी दबी जुबां से अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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एक शिक्षक ने बताया कि उनका और उनके परिवार का बीपीएल कार्ड भी नहीं बन सकता, नहीं तो इस दौर में कुछ राहत मिलती। शहर के ही एक स्कूल में शिक्षक के परिवार के सामने उस समय विषम परिस्थिति खड़ी हो गई, जब उनके परिवार में राशन खत्म हो गया। इसकी जानकारी उनके साथी शिक्षकों को होने के बाद उनके घर मदद पहुंची।
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शिक्षक के दो बच्चों की फीस नहीं जमा होने पर उन्हें ऑनलाइन क्लास से रोक दिया गया। शिक्षक विधायक सुरेश त्रिपाठी ने शुक्रवार को वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने के मामले को विधान परिषद में उठाया। उन्होंने प्रदेश सरकार से शिक्षकों को 15 हजार रुपये मानदेय देने की मांग की है।