पीसीएस में स्केलिंग सिस्टम में हुआ बदलाव, भड़के अभ्यर्थी
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- पीसीएस-2020 के विज्ञापन के अनुसार आवश्यकता के अनुरूप लागू होगा स्केलिंग सिस्टम
- अभ्यर्थियों का आरोप, आयोग ने पीसीएसी-2018 की मुख्य परीक्षा से ही कर दिया बदलाव
- मुख्य परीक्षा में मानविकी विषयों के अभ्यर्थियों का रिजल्ट प्रभावित होने से बढ़ा विवाद
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने पीसीएस में स्केलिंग सिस्टम लागू करने में बदलाव कर दिया है। यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए पीसीएस-2020 से किया गया है, लेकिन अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग ने पीसीएस-2018 में भी इस बदलाव को लागू कर दिया और इस वजह से बड़ी संख्या में मानविकी विषयों के अभ्यर्थी परीक्षा-2018 की मुख्य परीक्षा में असफल हो गए। अभ्यर्थी अब इस मामले में न्यायालय जाने की तैयारी कर रहे हैं।
आयोग की ओर से पीसीएस भर्ती-2020 के लिए जारी विज्ञापन सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। आयोग ने पूर्व में जकिन पीसीएस परीक्षाओं के विज्ञापन जारी किए थे, उनमें यही लिखा था कि मुख्य परीक्षा (लिखित परीक्षा) में स्केलिंग सिस्टम वैकल्पिक विषयों में लागू किया जाएगा। पीसीएस-2018 के विज्ञापन में भी यही व्यवस्था थी, जबकि पीसीएस-2020 के विज्ञापन से इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया। आयोग की ओर से जारी पीसीएस 2020 के विज्ञापन में लिखा गया कि संजय सिंह बनाम उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग व अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी आदेश के अनुपालन में स्केलिंग सिस्टम आवश्यकता के अनुरूप लागू किया जाएगा। अभ्यर्थी इसकी विवेचना अपने हिसाब से कर रहे हैं। उनका कहना है कि नई व्यवस्था के तहत आयोग जहां चाहे वहां अपने हिसाब से स्केलिंग सिस्टम लागू करेगा, जबकि पहले स्केलिंग अनिवार्य थी।
आयोग की ओर से 21 अप्रैल को जारी पीसीएस-2020 के विज्ञापन में हुए इस बदलाव पर किसी ने ध्यान नहीं दिया था। लेकिन, जब 23 जून को पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा का रिजल्ट आया और बड़ी संख्या में मानविकी विषयों के अभ्यर्थी परीक्षा में असफल घोषित कर दिए गए, तो अभ्यर्थियों ने आयोग में यह पता लगाना शुरू किया कि परिणाम प्रभावित होने की वजह क्या है। हालांकि इस मामले में अभ्यर्थियों को आयोग की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई। अभ्यर्थी अब दावा कर रहे हैं कि आयोग ने पीसीएस-2018 में स्केलिंग लागू नहीं की। इसके पीछे उनका तर्क है कि आयोग ने पीसीएस-2020 के विज्ञापन में स्केलिंग सिस्टम को आवश्यकता के अनुसार लागू करने की बात की है और इसी की आड़ में आयोग ने पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा में भी स्केलिंग नहीं की। अभ्यर्थी अब मांग कर रहे हैं कि आयोग इस मामले में लिखित जवाब दे और संशोधित रिजल्ट जारी करे। आयोग ने अगर उनकी बात नहीं सुनी तो वे न्यायालय जाएंगे।
आयोग सचिव के बयान पर उठाए सवाल
अभ्यर्थियों का कहना है कि पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा का परिणाम आने के बाद सचिव ने बयान दिया था कि स्केलिंग को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया है। अभ्यर्थी सवाल उठा रहे हैं कि अगर किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है तो पीसीएस-2020 के नोटिफिकेशन में स्केलिंग में परिवर्तन का बिंदु क्यों प्रस्तुत किया गया। अभ्यर्थियों का यह दावा है कि आयोग सुप्रीम कोर्ट के जिस आदेश का हवाला दे रहा है, उसका मूल रूप से ऑर्डर पीसीएस जे के लिए हुआ था। पीसीएस में अलग-अलग विषय होते हैं और इस परीक्षा में स्केलिंग सिस्टम लागू करना अनिवार्य है।