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अब एसआरएन में शिफ्ट हो जाएगा चिल्ड्रेन अस्पताल

Fri, 01 Apr 2016 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 01 Apr 2016 01:43 AM IST
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Saran Children's Hospital will now be moved to
एसआरएन अस्पताल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
नवजात बच्चों की लंबे समय से परेशानी को देखते हुए आखिरकार शासन ने सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय (चिल्ड्रेन अस्पताल) को स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में शिफ्ट करने की स्वीकृति दे दी है। जल्दी ही वहां पर इसके लिए भवन बनाने का काम शुरू हो जाएगा। शासन ने भवन बनाने के लिए कुल बजट (24 करोड़) में एक तिहाई राशि भी आवंटित कर दी है। भवन के निर्माण की जिम्मेदारी सरकारी एजेंसी यूपी सिडको को दी गई है।
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चिल्ड्रेन अस्पताल, एसआरएन अस्पताल से दो किलोमीटर दूर है। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर नवजात बच्चों को, क्योंकि मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज का गॉयनी विभाग एसआरएन अस्पताल में है। प्रसव के बाद नवजात को कोई परेशानी या फिर दिक्कत होती है तो उसे लेकर चिल्ड्रेन अस्पताल भागना पड़ रहा है। एसआरएन से दूरी होने पर कई बार नवजात को वहां लेकर पहुंचना ही भारी पड़ जाता है। इसके अलावा चिल्ड्रेन अस्पताल में जांच के लिए भी कोई खास व्यवस्था नहीं है। जांच कराने के लिए बच्चों को एसआरएन अस्पताल की पैथालॉजी या फिर मेडिकल कॉलेज में स्थित पैथालॉजी और माइक्रोबायोलॉजी विभाग जाना पड़ रहा है। नवजात बच्चों में होने वाली दिक्कतों, सारी बीमारियों के उपचार की व्यवस्था चिल्ड्रेन अस्पताल में है।

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कई बार मांग होने पर चिल्ड्रेन अस्पताल के चिकित्सकों की ड्यूटी एसआरएन के गॉयनी विभाग में लगाई जाती रही, लेकिन चिल्ड्रेन अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या बहुत अधिक है, जिसके चलते चिकित्सकों का वहां काम कर पाना मुश्किल है। मरीजों की तरफ से यह मांग लगातार उठती रही। मेडिकल प्रशासन ने भी अपनी परेशानियों को गिनाई तो शासन ने इस पर अपनी स्वीकृति दे दी और नौ करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित कर दिया। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि इस संबंध में शासन का पत्र आ चुका है। चिल्ड्रेन अस्पताल एसआरएन में शिफ्ट होने से मरीजों को काफी सहूलियतें हो जाएंगी।

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एसआरएन में स्थापित होने वाला चिल्ड्रेन अस्पताल का भवन अस्पताल परिसर में पीडब्ल्यूडी की जमीन पर बनाया जाएगा। हालांकि यह जमीन अब पीडब्ल्यूडी की नहीं रह गई है। शासन ने इसे एसआरएन अस्पताल को दे दी है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने अपना सारा सामान हटा लिया है। जगह को खाली कर दिया है, लेकिन अस्पताल परिसर में स्थित यह जमीन एतिहासिक है। डॉ. नीरज त्रिपाठी कहते हैं कि अंग्रेजों के जमाने में यहां पर जेल थी। रोशन सिंह को यहीं फांसी दी गई थी। कुछ दिनों पहले बैरकों को तोड़ा जा रहा था, जिसको लेकर काफी हंगामा हुआ तो रोक दिया गया। बैरकों की दीवारें अब भी खड़ी हैं लेकिन उसकी छत गायब है। 

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