Allahabad University: इविवि में शुरू हुई अंग्रेजी माध्यम से संस्कृत की पढ़ाई, बनाया गया नया सेक्शन
संस्कृत विभाग में एमए के दो सेक्शन हैं और इन दोनों सेक्शन में 146 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें 40 से अधिक छात्र अंग्रेजी माध्यम से संस्कृत की पढ़ाई कर रहे हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. राम सेवक दुबे का कहना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से इविवि के छात्र विदेशों में जाकर संस्कृत पढ़ा सकेंगे।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के संस्कृत विभाग में अंग्रेजी माध्यम से भी संस्कृत की पढ़ाई शुरू करा दी गई है। संस्कृत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के उद्देश्य से विभाग ने यह पहल की है। विश्वविद्यालय में हिंदी माध्यम से संस्कृत की पढ़ाई काफी पहले से हो रही थी, लेकिन सत्र 2022-23 से अंग्रेजी माध्यम से भी संस्कृत की पढ़ाई शुरू करा दी गई है। इसके लिए अलग से एक सेक्शन बनाया गया है, जिसमें एमए के छात्र-छात्राएं अंग्रेजी माध्यम से संस्कृत की पढ़ाई कर सकते हैं।
संस्कृत विभाग में एमए के दो सेक्शन हैं और इन दोनों सेक्शन में 146 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें 40 से अधिक छात्र अंग्रेजी माध्यम से संस्कृत की पढ़ाई कर रहे हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. राम सेवक दुबे का कहना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से इविवि के छात्र विदेशों में जाकर संस्कृत पढ़ा सकेंगे और विदेशी छात्र भी विभाग में प्रवेश लेकर संस्कृत को आसानी से समझ सकेंगे।
विभागाध्यक्ष ने हाल ही में इविवि के संस्कृत विभाग में नियुक्ति हुए प्रो. अनिल प्रताप गिरि और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. लेखराम दन्नाना को यह जिम्मेदारी सौंपी है। दोनों ही शिक्षक अंग्रेजी सहित कई भाषाओं के जानकार हैं।
प्रो. दुबे का कहना है कि जल्द ही संस्कृत संभाषण, कंप्यूटर जागरूकता और नाट्यशास्त्र की पढ़ाई भी शुरू करा दी जाएगी। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि संस्कृत विभाग को 23 नए शिक्षक मिले हैं, जिनमें से सात शिक्षक जेएनयू से आए हैं। इनके अलावा बीएचयू, दिल्ली विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय बिहार के भी कई शिक्षकों को इविवि में नियुक्त किया गया है। इसी वजह से अकादमिक गतिविधियों में काफी तेजी आई है।
एमए में अब व्याकरण विशेषज्ञता
इविवि के संस्कृत विभाग में एमए के छात्र-छात्राएं अब व्याकरण में भी विशेषज्ञता हासिल कर सकेंगे। विभाग में अब तक एमए में दर्शन, वेद और साहित्य में विशेषज्ञता की पढ़ाई कराई जा रही थी। नए शिक्षकों की नियुक्ति के बाद अब व्याकरण विशेषज्ञता को भी एमए में शामिल कर लिया गया। हालांकि काफी पहले यह कोर्स एमए का हिस्सा था, लेकिन विभाग में शिक्षकों की कमी के कारण इसे समाप्त कर दिया गया था। वर्षों बाद सत्र 2022-23 से व्याकरण विशेषज्ञता का कोर्स पुन: शुरू किया गया है।