फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Sages, saints and householders took the Trijata dip with the rules of Yama

Mahakumbh : यम नियमों के साथ साधु-संत एवं गृहस्थों ने लगाई त्रिजटा डुबकी, दिन भर चलता रहा स्नान का क्रम

Sat, 15 Feb 2025 02:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 15 Feb 2025 02:45 PM IST
सार

फाल्गुन तृतीया पर शनिवार को साधु-संतों के साथ गृहस्थों ने भी संगम की पवित्र धारा में त्रिजटा स्नान किया। स्नान-ध्यान का क्रम तड़के से आरंभ होकर पूरे दिन चला। डुबकी के साथ महीने भर के कल्पवास और स्नान, ध्यान का पुण्य फल अर्जित किया।

विज्ञापन
Sages, saints and householders took the Trijata dip with the rules of Yama
महाकुंभ में स्नान करते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

फाल्गुन तृतीया पर शनिवार को साधु-संतों के साथ गृहस्थों ने भी संगम की पवित्र धारा में त्रिजटा स्नान किया। स्नान-ध्यान का क्रम तड़के से आरंभ होकर पूरे दिन चला। डुबकी के साथ महीने भर के कल्पवास और स्नान, ध्यान का पुण्य फल अर्जित किया। इस आखिरी स्नान के साथ कल्पवासियों की शेष बची खेप ने भी कुंभ नगरी से विदाई ले ली। इसी के साथ माघी पूर्णिमा के बाद बचे शिविर भी खुलने आरंभ हो गए। त्रिजटा स्नान के साथ ही तंबुओं को समेटने का काम तेज हो गया।

विज्ञापन

शनिवार तड़के से संगम पर त्रिजटा स्नान को श्रद्धालुओं का तांता लगना आरंभ हो गया। त्रिजटा स्नान की खातिर बड़ी संख्या में कल्पवासी समेत साधु-संत पूर्णिमा के बाद भी कुंभनगरी में डटे रहे। मान्यता है कि माघ मास में स्नान न कर पाने पर त्रिजटा स्नान करने से उसका कल्पवास के तरह फल मिलता है। जो माह भर संगम में डुबकी नहीं लगा पाते, वह इस तिथि पर स्नान करके पूरे माह कल्पवास का फल अर्जित कर लेते हैं। इसी मान्यता के चलते भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने संगम की डुबकी लगाई।

विज्ञापन


भगवान भाष्कर को अर्ध्य अर्पित करने के साथ ही दान एवं ध्यान किया। कहीं ग्रामीण अंचलों से आईं महिलाओं ने मां गंगा के गीत गाते हुए डुबकी लगाई, तो कहीं दीपदान के साथ मां गंगा का दुग्ध से अभिषेक हुआ। त्रिजटा स्नान के बाद आखिरी बची खेप भी कुंभनगरी से वापस लौटना आरंभ हो गई। अब कल्पवासियों की बसावट वाले सेक्टर तकरीबन खाली हो गए हालांकि अभी खाक चौक में कुछ संतों के शिविर शिवरात्रि स्नान तक रहेंगे। दंडीबाड़ा, आचार्य बाड़ा में रुके संन्यासी त्रिजटा स्नान के साथ ही अपने आश्रम की ओर रवाना हो गए।

विज्ञापन
विज्ञापन

त्रिजटा राक्षसी के नाम पर स्नान को मान्यता

दंडी संन्यासी विजयानंद सरस्वती के मुताबिक मां सीता के वरदान की वजह से त्रिजटा स्नान की मान्यता मिली। सीता का हरण करके रावण ने उनको अशोक वाटिका में रखा था। यहां उनकी सुरक्षा को त्रिजटा नामक राक्षसी को लगाया गया था। त्रिजटा ने मां सीता की सेवा की। इससे प्रसन्न होकर मां सीता ने त्रिजटा को आशीष दिया। उसको दिए वरदान के मुताबिक ही त्रिजटा स्नान को मान्यता मिली।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed