Prayagraj : श्री बड़े हनुमान मंदिर कॉरिडोर का रास्ता साफ, सेना से मिली अनुमति, पीडीए जल्द शुरू करेगा कार्य
बड़े हनुमान मंदिर कॉरिडोर बनाने के लिए पीडीए ने पिछले हफ्ते बोर्ड की बैठक में सेना को जमीन देने पर सहमति दे दी थी। कॉरिडोर के लिए 11,186 वर्ग मीटर (2.76 एकड़) जमीन चाहिए। बदले में सेना को नीवां में 19 हजार हेक्टेयर जमीन दी जाएगी। जमीन की अदला-बदली की प्रक्रिया चल रही है।
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संगम तट पर श्री बड़े हनुमान मंदिर कॉरिडोर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। सेना ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) को अनुमति दे दी है। निर्माण जल्द ही शुरू हो जाएगा। कॉरिडोर का काम दो चरणों में होगा। पहले चरण का काम दिसंबर तक पूरा करना होगा। दूसरे चरण का काम महाकुंभ के बाद होगा। इसके लिए 38.18 करोड़ का टेंडर हुआ है।
श्री बड़े हनुमान मंदिर कॉरिडोर बनाने के लिए पीडीए ने पिछले हफ्ते बोर्ड की बैठक में सेना को जमीन देने पर सहमति दे दी थी। कॉरिडोर के लिए 11,186 वर्ग मीटर (2.76 एकड़) जमीन चाहिए। बदले में सेना को नीवां में 19 हजार हेक्टेयर जमीन दी जाएगी। जमीन की अदला-बदली की प्रक्रिया चल रही है।
इसी बीच महाकुंभ को देखते हुए सेना ने पीडीए को निर्माण की अनुमति दे दी। जल्द ही वहां पर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। पीडीए के अधिकारी माैका-मुआयना कर चुके हैं। निर्माण से पहले पुराने भवनों को गिराया जाएगा और कब्जे भी हटाए जाएंगे। वर्तमान में मंदिर का जितना परिसर है, वहीं पर नया निर्माण होगा। कॉरिडोर बनने के बाद प्रवेश और निकास सुव्यवस्थित हो जाएगा। साथ ही पूजन सामग्री और प्रसाद की दुकानों का स्थान परिवर्तित होगा।
बनेंगे छह द्वार, अक्षयवट मार्ग से प्रवेश
श्री बड़े हनुमान मंदिर में छह द्वार बनाए जाएंगे। अभी बांध से उतरते ही श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर जाते हैं, लेकिन कॉरिडोर बनने के बाद यह निकास द्वार होगा और बांध से उतरने वाली सड़क सीढ़ीदार बनाई जाएगी। यह सीढ़ी दर्शन करके लाैटने वालों के लिए होगी। इसी के बगल में एक और निकास द्वार होगा, जो शंकर विमान मंडपम वाले रास्ते पर खुलेगा। प्रवेश की व्यवस्था अक्षयवट मार्ग की ओर से होगी। श्रद्धालुओं को त्रिवेणी बांध से उतरकर अक्षयवट मार्ग पर जाना होगा। मंदिर के पूर्व दिशा में तीन और द्वार होंगे।
बनाई जाएगी करीब 40 दुकानें
पूजा सामग्री और प्रसाद वितरण के लिए करीब 40 दुकानों का निर्माण कराया जाएगा। यह दुकानें कॉरिडोर की बाउंड्री पर होगी। अभी प्रसाद की दुकानें मंदिर के पश्चिम में किला की दीवार से लगकर बनी हैं। वहां से दुकानें हटाई जाएंगी। किला की दीवार से लगे हुए निर्माण तोड़कर वहां पर नियंत्रण कक्ष और मंदिर के महंत के लिए कमरे बनाए जाएंगे। मंदिर के गर्भगृह को छोड़कर अन्य कार्य पहले चरण में दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। गर्भगृह का निर्माण वर्तमान मंदिर स्थल पर ही महाकुंभ के बाद कराया जाएगा। मंदिर परिसर में परिक्रमा की पर्याप्त जगह होगी।
कमेटी का मामला लंबित
पीडीए की योजना थी कि कॉरिडोर का निर्माण कराने के बाद मंदिर संचालन की कमेटी बनाई जाएगी। वह कमेटी कॉरिडोर की मरम्मत, मंदिर की सुरक्षा और दुकानों के आवंटन का काम देखेगी। लेकिन इसे लेकर विवाद हो गया। इसलिए पीडीए ने कमेटी के मामला को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। अधिकारियों ने बताया कि निर्माण के बाद कमेटी के गठन पर काम होगा।