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Research : पित्त की थैली में पथरी, लीवर इंफेक्शन से कैंसर का खतरा, MLN के रेडियोथेरपी विभाग में हुआ शोध

Fri, 05 Jul 2024 06:16 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 05 Jul 2024 06:16 PM IST
सार

वाराणसी के बीएचयू मेडिकल कॉलेज व दिल्ली के एम्स अस्पताल में भी इसी विषय पर शोध हो चुका है। जिसमें गॉल ब्लेडर के कैंसर के संबंध में समय पर जानकारी होने के लिए पित्त की थैली में पथरी, लीवर इन्फेक्शन व टाइफाइड होने की दशा में मरीज के बॉयोप्सी व इन्फेक्शन के कल्चर की जांच होना जरूरी माना गया।

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Risk of cancer due to gallstones, liver infection, research conducted in the radiotherapy department of MLN
शोध। - फोटो : istock

विस्तार

अगर पित्त की थैली में पथरी, लीवर में इंफेक्शन और टाइफाइड है तो कैंसर का खतरा पैदा हो सकता है। चिकित्सक को चाहिए कि मरीज का उपचार करते समय कैंसर की जांच अवश्य करा लें। इससे बॉयोप्सी और इंफेक्शन के कल्चर की जांच से पता चल जाएगा, कि मरीज को गॉल ब्लेडर का कैंसर है या नहीं। ऐसे में मरीज का समय रहते गॉल ब्लेडर के कैंसर का इलाज हो सकेगा।

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दरअसल गॉल ब्लेडर का कैंसर होने पर शुरूआती चरण में मरीज को इसकी जानकारी नहीं होती है और जब मरीज को इस कैंसर के बारे में पता चलता है, तब तक देर हो चुकी होती है।
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इसी विषय पर मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के रेडियोथेरेपी विभाग में शोध हुआ है। जिसमें असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. देव कुमार यादव ने 40 से 50 वर्ष की उम्र के 25 गॉल ब्लेडर कैंसर के मरीजों को अपने शोध में शामिल किया। इनमें 18 महिलाएं व नौ पुरूष शामिल थे। इस दौरान इन सभी मरीजों के इतिहास को जाना। जिसमें खानपान, कहां के निवासी हैं, कितना पढ़े हैं व पहले कोई बीमारी तो नहीं थी, के बारे में जाना गया। वहीं सभी मरीजों का अल्टासाउंड व ब्लड टेस्ट कराया गया। इनमें से 80 फीसदी मरीजों को टायफाइड की शिकायत निकली।
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इसके अलावा अन्य मरीजों को पित्त की थैली में पथरी व लीवर इन्फेक्शन की समस्या देखने को मिली। एक जनवरी 2023 से जुलाई 2023 तक चले शोध में पाया गया, कि अगर किसी मरीज को आंत या पेट का इन्फेक्शन है, गॉल ब्लेडर में पथरी है, या फिर बार-बार पीलिया की शिकायत हो रही है, तो चिकित्सक को चाहिए कि वह मरीज के बॉयोप्सी व इन्फेक्शन के कल्चर की जांच जरूर करा ले। ऐसे में अगर कैंसर की समस्या सामने आती है, तो मरीज का इलाज समय रहते किया जा सकता है। यह शोध दिसंबर 2023 में इंडियन जनरल ऑफ अप्लाइड रिसर्च में प्रकाशित हुआ है।

बीएचयू व एम्स में भी हो चुका है शोध

वाराणसी के बीएचयू मेडिकल कॉलेज व दिल्ली के एम्स अस्पताल में भी इसी विषय पर शोध हो चुका है। जिसमें गॉल ब्लेडर के कैंसर के संबंध में समय पर जानकारी होने के लिए पित्त की थैली में पथरी, लीवर इन्फेक्शन व टाइफाइड होने की दशा में मरीज के बॉयोप्सी व इन्फेक्शन के कल्चर की जांच होना जरूरी माना गया।

समय रहते नहीं पता चलता कैंसर

गॉल ब्लेडर का कैंसर शुरूआती दौर में पता नहीं चलता है। क्योंकि इस दौरान मरीज को कोई समस्या नहीं होती है। मगर काफी समय बाद जब मरीज को भीषण पेट दर्द या फिर अन्य समस्या होती है, तब जांच में कैंसर की बात सामने आती है। मगर तब तक कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच जाता है। ऐसे में मरीज को बचा पाना मुश्किल होता है।

गंगा किनारे के इलाकों में गॉल ब्लेडर के कैंसर की समस्या अधिक देखने को मिलती है। इसके अलावा यह कैंसर पुरूषों से अधिक महिलाओं में होता है। समय रहते कैंसर का पता चले, इसके लिए बॉयोप्सी व इन्फेक्शन के कल्चर की जांच होना जरूरी है। - डॉ. देव कुमार यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर, रेडियोथेरेपी एवं कैंसर विभाग, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज।

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