Prayagraj : गंगा-यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी थमी लेकिन बनी हुईं हैं समस्याएं
दोनों नदियों का जलस्तर 85.95 मीटर तक पहुंच गया है। जबकि, खतरे का निशान 84.734 मीटर है। इस तरह से खतरे के निशान से करीब सवा मीटर ऊपर गंगा-यमुना बह रही हैं। इस वजह से शहर के बघाड़ा, सलोरी, तेलियरगंज, बेली, राजापुर, करेली आदि क्षेत्रों के दर्जनों मोहल्लों में हजारों घरों में पानी घुस गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गंगा और यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी सोमवार को थम गई। बीच-बीच में जलस्तर में मामूली कमी भी दर्ज की गई। इससे तटीय इलाके लोगों ने राहत जरूर महसूस की लेकिन समस्याएं अब भी बरकरार हैं। बाढ़ की वजह से हजारों लोग अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हैं तो गंदगी की वजह से इन इलाकों में बीमारियों का खतरा भी बन गया है।
दोनों नदियों का जलस्तर 85.95 मीटर तक पहुंच गया है। जबकि, खतरे का निशान 84.734 मीटर है। इस तरह से खतरे के निशान से करीब सवा मीटर ऊपर गंगा-यमुना बह रही हैं। इस वजह से शहर के बघाड़ा, सलोरी, तेलियरगंज, बेली, राजापुर, करेली आदि क्षेत्रों के दर्जनों मोहल्लों में हजारों घरों में पानी घुस गया है। बड़ी संख्या में लोगों को पलायन करना पड़ा है।
मुसीबत को इससे समझा जा सकता है कि राहत शिविरों में ही सात हजार से अधिक लोगों ने शरण ले रखी है। इसके अलावा हजारों परिवार बाढ़ में फंसे हैं। उनके मकान के प्रथम तल पानी में डूबे हैं। चोरी के डर से लोग आशियाना छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
मुश्किल यह कि उन तक राहत भी नहीं पहुंच पा रही। इससे उनके सामने खाना, पानी तक की समस्या खड़ी हो गई है। इसके अलावा जहरीले जंतुओं का भी खतरा बढ़ गया है। हालांकि अब जलस्तर में कमी का अनुमान है। इससे जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। डीएम संजय कुमार खत्री का कहना है कि दोनों नदियों के जलस्तर में कुछ कमी दर्ज की गई है। मंगलवार से और तेजी से पानी घटेगा।