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कर्मचारी को अंतर्जनपदीय तबादले के लिए दोबारा आवेदन का अधिकार - हाईकोर्ट
Wed, 08 Sep 2021 04:04 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 08 Sep 2021 04:04 PM IST
सार
याची के अधिवक्ता नवीन कुमार शर्मा का कहना था कि याची ने फतेहपुर से वाराणसी स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था। मगर उसका आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया किया याची पहले भी एक बार अंतर्जनपदीय स्थानांतरण ले चुकी है।
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allahabad high court
- फोटो : social media
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कर्मचारी द्वारा अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के लिए दिए गए आवेदन को मात्र इस आधार पर नहीं खारिज किया जा सकता है कि उसने दूसरी बार अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा फतेहपुर में नियुक्त शिक्षिका शशि सिंह द्वारा दिए गए अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के आवेदन को रद्द करने का आदेश खारिज़ कर दिया है। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह याची का आवेदन मात्र इस आधार पर निरस्त न करें कि उसने दोबारा अंतर्जनपदीय स्थानांतरण की मांग की है तथा इस फैसले के आलोक में अधिकारियों को स्थानांतरण आवेदन पर छह सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया है। शशि सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने सुनवाई की।
याची के अधिवक्ता नवीन कुमार शर्मा का कहना था कि याची ने फतेहपुर से वाराणसी स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था। मगर उसका आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया किया याची पहले भी एक बार अंतर्जनपदीय स्थानांतरण ले चुकी है। अधिवक्ता का कहना था कि इस मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि 1981 की नियमावली नियम 21 और 2008 की नियमावली के नियम 8 (2)( डी) के अनुसार कर्मचारी को एक से अधिक बार अंतर्जनपदीय तबादले के लिए आवेदन करने की छूट है और यह भी स्पष्ट किया है कि मात्रा आवेदन करने से स्थानांतरण का अधिकार नहीं उत्पन्न होता है । यह तब भी सरकार के विवेक पर निर्भर करेगा। कोर्ट ने अंतर्जनपदीय स्थानांतरण का आवेदन निरस्त करने संबंधी आदेश को रद्द करते हुए मामले का 6 सप्ताह में निस्तारण करने का आदेश दिया है।
गलत वेतन भुगतान की वसूली का आदेश रद्द
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीआईजी रेलवे पुलिस प्रयागराज के कार्यालय से सेवानिवृत्त उप निरीक्षक से गलत वेतन भुगतान की वसूली आदेश रद्द कर दिया है और निर्देश दिया है कि तीन माह के भीतर सेवानिवृत्ति परिलाभों से कटौती राशि का भुगतान किया जाय। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने उषा श्रीवास्तव की याचिका पर दिया है।
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याची का कहना है कि वह 31 दिसंबर 20 को सेवानिवृत्त हुई। 19 नवंबर 20 के आदेश से अधिक वेतन भुगतान के एवज में सेवानिवृत्ति परिलाभों से कटौती कर ली गई। याची के अधिवक्ता का तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब राज्य बनाम रफीक मसीह केस में कहा है कि विभाग की गलती से अधिक भुगतान की तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से वसूली नहीं की जा सकती। विभाग द्वारा गलत वेतन निर्धारण में याची की कोई भूमिका नहीं है। इसलिए वसूली नहीं की जा सकती।
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याची के अधिवक्ता नवीन कुमार शर्मा का कहना था कि याची ने फतेहपुर से वाराणसी स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था। मगर उसका आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया किया याची पहले भी एक बार अंतर्जनपदीय स्थानांतरण ले चुकी है। अधिवक्ता का कहना था कि इस मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि 1981 की नियमावली नियम 21 और 2008 की नियमावली के नियम 8 (2)( डी) के अनुसार कर्मचारी को एक से अधिक बार अंतर्जनपदीय तबादले के लिए आवेदन करने की छूट है और यह भी स्पष्ट किया है कि मात्रा आवेदन करने से स्थानांतरण का अधिकार नहीं उत्पन्न होता है । यह तब भी सरकार के विवेक पर निर्भर करेगा। कोर्ट ने अंतर्जनपदीय स्थानांतरण का आवेदन निरस्त करने संबंधी आदेश को रद्द करते हुए मामले का 6 सप्ताह में निस्तारण करने का आदेश दिया है।
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गलत वेतन भुगतान की वसूली का आदेश रद्द
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीआईजी रेलवे पुलिस प्रयागराज के कार्यालय से सेवानिवृत्त उप निरीक्षक से गलत वेतन भुगतान की वसूली आदेश रद्द कर दिया है और निर्देश दिया है कि तीन माह के भीतर सेवानिवृत्ति परिलाभों से कटौती राशि का भुगतान किया जाय। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने उषा श्रीवास्तव की याचिका पर दिया है।
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याची का कहना है कि वह 31 दिसंबर 20 को सेवानिवृत्त हुई। 19 नवंबर 20 के आदेश से अधिक वेतन भुगतान के एवज में सेवानिवृत्ति परिलाभों से कटौती कर ली गई। याची के अधिवक्ता का तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब राज्य बनाम रफीक मसीह केस में कहा है कि विभाग की गलती से अधिक भुगतान की तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से वसूली नहीं की जा सकती। विभाग द्वारा गलत वेतन निर्धारण में याची की कोई भूमिका नहीं है। इसलिए वसूली नहीं की जा सकती।