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अमन की दुआओं के बीच बारगाह में सजदा

Sat, 24 Jun 2017 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 24 Jun 2017 02:23 AM IST
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Restored in the barges between the prayers of peace
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
माहे मुकद्दस के आखिरी जुमे यानी शुक्रवार को ‘अलविदा’ की खास नमाज अदा की गई। जामा मस्जिद चौक, जामा मस्जिद वसीउल्लाह, जामा मस्जिद वसीयाबाद सहित शहर की तमाम मस्जिदों में बड़ी संख्या में खुदा की बारगाह में अकीदतमंदों ने सजदा किया। जुमातुलविदा के लिए रोजेदारों में खासा उत्साह रहा। नए या साफ कपड़े पहने नमाजी इबादतगाह पहुंचे। तमाम रास्ते इबादतगाहों की ओर मुड़े। हर जगह नमाजियों के लिए खास इंतजाम किए गए थे।
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तय वक्त के पहले ही नमाजियों का जुटना शुरू हो गया था। सबसे बड़ी जमात जामा मस्जिद चौक में जुटी। यहां मस्जिद भरी तो बाहर ठठेरी बाजार, पुरानी जीटी रोड पर  कोतवाली के सामने से लेकर लोकनाथ फूलमंडी, बजाजा पट्टी, लाल डिग्गी, घंटाघर फल मार्केट तक सीधी सफ (कतार) में नमाजियों ने नमाज अदा की। सैयद कारी मकबूल हुसैन हबीबी की सरपरस्ती में यहां नायाब शहर काजी और खतीम व इमाम जामा मस्जिद मौलाना सैयद रईस अख्तर ने नमाज पढ़वाई। बाद में कारी मकबूल ने बयान किया। नमाज और रोजे की फजीलत भी बताई गई। जकात की जानकारी देने के साथ ही फितरे की रकम तकरीबन 45 रुपये तय की गई।
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दुआओं के लिए हाथ उठे तो मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली, तरक्की, भाईचारा सहित अच्छी बारिश के लिए भी दुआएं मांगी गईं। इसी तरह खानकाहे अजमली मस्जिद दायराशाह अजमल, अब्दुल्लाह मस्जिद, काटजू मस्जिद, संगमरमर मस्जिद, मस्जिद इलाहाबाद जंक्शन, हरी मस्जिद धोबीघाट, शाही मस्जिद नखासकोहना, खुसरोबाग, मस्जिदे आजम अतरसुइया, मक्का, मदीना, अबूबकर सहित सौ से ज्यादा मस्जिदों में अलविदा की नमाज अदा की गई।
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जुमातुलविदा पर शिया जामा मस्जिद चक में इमाम जुमा व जमात मौलाना हसन रजा जैदी ने खास नमाज पढ़वाई। उन्होंने दुनिया में बढ़ रहे आतंकवाद और अलगाववाद पर चिंता जताई। नमाज से पहले खुत्बे में मौलाना ने कहा, नमाजी किसी भी तरह की नफरत की निंदा करते हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान, अमेरिका, सऊदी अरब, इस्राइल आदि देश दहशतगर्दी को बढ़ावा दे रहे हैं जिसकी वजह से दुनिया का अमन-चैन खो गया है। हमें अपने वतन के ऐसे दुश्मनों से सावधान रहना है, जो हमारे कपड़े पहनकर, हमारी बोली बोलकर, हमारा ही खाना खाकर घड़ियाली आंसू बहाते लेकिन लड़ने पर आमादा रहते हैं।

इसी क्रम में उन्होंने वक्फ संपत्तियों की बर्बादी का सवाल भी उठाया। कहा, शिया समुदाय वक्फ की हिफाजत के लिए उठ खड़ा हुआ है। अब किसी तरह के जुल्म को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नमाज पूरी होने के बाद मस्जिद के सामने विरोध में नारे भी लगाए गए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग मौजूद थे।


वहीं मुसल्ला-ए-आरिफ यूनिटी डिग्री कॉलेज कैंपस में इमाम जुमा मौलाना अहसन अब्बास ने अलविदा की नमाज के बाद मुल्क में अमन कायम रहने की दुआ करवाई। बाद नमाज मजलिस को मौलाना डॉ रिजवान हैदर ने खिताब किया। इस मौके पर मौलाना ताहिर हुसैन, मौलाना मौजिज अब्बास, मौलाना जीशान हैदर, आफताब रिजवी, हुसैन अब्बास, जुल्फिकार आब्दी, जफर हुसैन, एहतेशाम हैदर आदि मौजूद थे।
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