{"_id":"57f4039f4f1c1bc332270bf1","slug":"relief-policemen-living-in-government-quarters","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी क्वार्टर में रहने वाले पुलिसकर्मियों को राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी क्वार्टर में रहने वाले पुलिसकर्मियों को राहत
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 05 Oct 2016 01:06 AM IST
विज्ञापन
अदालत का फैसला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद। सरकारी क्वार्टर में रहने वाले पुलिसकर्मियों को तबादला होने के बाद क्वार्टर खाली करने की फिलहाल चिंता नहीं करनी होगी। न ही उनसे पेनल रेंट वसूला जाएगा। हाईकोर्ट ने ऐसा करने पर रोक लगा दी है। प्रमुख सचिव गृह से पूछा है कि महकमे में हेडक्वार्टर किसे माना जाएगा। जिला, जोन या रेंज में से हेडक्वार्टर कौन है यह परिभाषित नहीं है। कोर्ट ने सरकार से हेडक्वार्टर परिभाषित करने के बाद ही पुलिसकर्मियों से क्वार्टर खाली कराने या पेनल रेंट वसूल करने के लिए कहा है।
प्रदेश के तमाम जिलों आगरा, गोरखपुर, कानपुर, मेरठ, गाजियाबाद, बरेली आदि के सिपाहियों, हेडकांस्टेबलों और सब इंस्पेक्टरों ने हाईकोर्ट में दर्जनों याचिकाएं दाखिल कर स्थानांतरण के बाद क्वार्टर खाली या पेनल रेंट वसूलने को चुनौती दी थी। विभाग ने इन पर रेंट के तौर पर लाखों रुपये की वसूली निकाली है। झांसी के सिपाही बाबू राम और अन्य की याचिकाओें पर न्यायमूर्ति बी अमित स्थालेकर सुनवाई कर रहे हैं। याचीगण के अधिवक्ता विजय गौतम ने कहा ने 28 जनवरी 1998 के शासनादेश का हवाला देकर कहा कि हेडक्वार्टर पर रहने वाले पुलिसकर्मियों से स्थानांतरण होने पर क्वार्टर नहीं खाली कराने का नियम है। इस हिसाब से यदि याची झांसी रेंज में तैनात है तो झांसी रेंज मुख्यालय है और याची रेंज के सरकारी क्वार्टर में रह सकता है। सरकारी अधिवक्ता की दलील थी कि मुख्यालय जिला, रेंज या जोन भी हो सकता है। ऐसा कहीं परिभाषित नहीं है कि मुख्यालय किसे माना जाएगा।
याची के वकील का कहना था कि याची की तैनाती यदि रेंज में है तो वह इसके अंतर्गत किसी भी जिले में रहे उससे पेनल रेंट नहीं वसूला जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि क्वार्टर के आवंटन को लेकर सरकार की कोई स्पष्ट नीति अब तक नहीं है। चूंकि मामला प्रदेश भर के पुलिसकर्मियों से जुड़ा है इसलिए प्रमुख सचिव गृह चार सप्ताह के भीतर यह स्पष्ट करें कि मुख्यालय किसे माना जाएगा। इस दौरान पेनल रेंट और क्वार्टर खाली कराने पर रोक लगा दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदेश के तमाम जिलों आगरा, गोरखपुर, कानपुर, मेरठ, गाजियाबाद, बरेली आदि के सिपाहियों, हेडकांस्टेबलों और सब इंस्पेक्टरों ने हाईकोर्ट में दर्जनों याचिकाएं दाखिल कर स्थानांतरण के बाद क्वार्टर खाली या पेनल रेंट वसूलने को चुनौती दी थी। विभाग ने इन पर रेंट के तौर पर लाखों रुपये की वसूली निकाली है। झांसी के सिपाही बाबू राम और अन्य की याचिकाओें पर न्यायमूर्ति बी अमित स्थालेकर सुनवाई कर रहे हैं। याचीगण के अधिवक्ता विजय गौतम ने कहा ने 28 जनवरी 1998 के शासनादेश का हवाला देकर कहा कि हेडक्वार्टर पर रहने वाले पुलिसकर्मियों से स्थानांतरण होने पर क्वार्टर नहीं खाली कराने का नियम है। इस हिसाब से यदि याची झांसी रेंज में तैनात है तो झांसी रेंज मुख्यालय है और याची रेंज के सरकारी क्वार्टर में रह सकता है। सरकारी अधिवक्ता की दलील थी कि मुख्यालय जिला, रेंज या जोन भी हो सकता है। ऐसा कहीं परिभाषित नहीं है कि मुख्यालय किसे माना जाएगा।
विज्ञापन
याची के वकील का कहना था कि याची की तैनाती यदि रेंज में है तो वह इसके अंतर्गत किसी भी जिले में रहे उससे पेनल रेंट नहीं वसूला जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि क्वार्टर के आवंटन को लेकर सरकार की कोई स्पष्ट नीति अब तक नहीं है। चूंकि मामला प्रदेश भर के पुलिसकर्मियों से जुड़ा है इसलिए प्रमुख सचिव गृह चार सप्ताह के भीतर यह स्पष्ट करें कि मुख्यालय किसे माना जाएगा। इस दौरान पेनल रेंट और क्वार्टर खाली कराने पर रोक लगा दी है।
विज्ञापन